05.  नहीं होना बीमार अध्याय समाधान 

पाठ से

मेरी समझ से(क) सही उत्तर चुनें और उसके सामने तारा (*) बनाएँ
1. बच्चे के विद्यालय न जाने का मुख्य कारण क्या था?

  • उसका विद्यालय जाने का मन नहीं था। (*)
  • उसने गृहकार्य नहीं किया था। (*)
  • उसका साबुदाने की खीर खाने का मन था।
  • उसे बुखार हो गया था।

उत्तर: उसका विद्यालय जाने का मन नहीं था।
उसने गृहकार्य नहीं किया था।
विश्लेषण: बच्चे ने स्कूल न जाने का फैसला इसलिए किया क्योंकि उसका मन स्कूल जाने का नहीं था और उसने होमवर्क भी नहीं किया था। वह बीमारी का बहाना बनाकर घर पर रहना चाहता था। साबुदाने की खीर और बुखार का कोई वास्तविक कारण नहीं था।

2. कहानी के अंत में बच्चे ने कहा, “इसके बाद स्कूल से छुट्टी मारने के लिए मैंने बीमारी का बहाना कभी नहीं बनाया।” बच्चे ने यह निर्णय लिया क्योंकि—

  • घर में रहने के बजाय विद्यालय जाना अधिक रोचक है।
  • बीमारी का बहाना बनाने से साबूदाने की खीर नहीं मिलती।
  • झूठ बोलने से झूठ के खुलने का डर हमेशा बना रहता है।
  • इस बहाने के कारण उसे दिनभर अकेले और भूखे रहना पड़ा। (*)

उत्तर: इस बहाने के कारण उसे दिनभर अकेले और भूखे रहना पड़ा। 
विश्लेषण: बच्चे को दिनभर भूखे और अकेले रहने का अनुभव हुआ, जिससे उसे स्कूल न जाने का पछतावा हुआ। 

3. “लेटे-लेटे पीठ दुखने लगी” इस बात से बच्चे के बारे में क्या पता चलता है?

  • उसे बिस्तर पर लेटे रहने के कारण ऊब हो गई थी। (*)
  • उसे अपनी बीमारी की कोई चिंता नहीं रह गई थी।
  • वह बिस्तर पर आराम करने का आनंद ले रहा था।
  • बीमारी के कारण उसकी पीठ में दर्द हो रहा था।

उत्तर: उसे बिस्तर पर लेटे रहने के कारण ऊब हो गई थी।
विश्लेषण: बच्चा बीमारी का बहाना बनाकर लेटा था, लेकिन लंबे समय तक लेटे रहने से उसे ऊब और असुविधा हुई, जिससे उसकी पीठ में दर्द शुरू हो गया। यह दर्द बीमारी के कारण नहीं, बल्कि ऊब और निष्क्रियता के कारण था।

4. “क्या ठाठ हैं बीमारों के भी!” बच्चे के मन में यह बात आई क्योंकि—

  • बीमार व्यक्ति को बहुत आराम करने को मिलता है। (*)
  • बीमार व्यक्ति को अच्छे खाने का आनंद मिलता है। (*)
  • बीमार व्यक्ति को विद्यालय नहीं जाना पड़ता है। (*)
  • बीमार व्यक्ति अस्पताल में शांति से लेटा रहता है।

उत्तर: बीमार व्यक्ति को बहुत आराम करने को मिलता है।, बीमार व्यक्ति को अच्छे खाने का आनंद मिलता है।, बीमार व्यक्ति को विद्यालय नहीं जाना पड़ता है।
विश्लेषण: बच्चे ने सुधाकर काका को अस्पताल में साफ-सुथरे बिस्तर पर लेटे और साबुदाने की खीर खाते देखा। इससे उसे लगा कि बीमार होने में आराम, अच्छा खाना, और स्कूल न जाने की छुट्टी जैसे “ठाठ” हैं।

(ख) अपने मित्रों के साथ चर्चा करें कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर: अपने मित्रों के साथ चर्चा करते समय मैंने ये उत्तर इसलिए चुने क्योंकि वे कहानी के घटनाक्रम और बच्चे की सोच से मेल खाते हैं। उदाहरण के लिए, बच्चे ने होमवर्क न करने और स्कूल न जाने की इच्छा के कारण बीमारी का बहाना बनाया, जो कहानी में स्पष्ट है। साथ ही, दिनभर भूखे और अकेले रहने के अनुभव ने उसे यह निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया कि वह फिर कभी ऐसा बहाना नहीं बनाएगा। मित्रों के अलग-अलग उत्तर हो सकते हैं, लेकिन कहानी के आधार पर सही उत्तर चुनना महत्वपूर्ण है।

मिलकर करें मिलानपाठ में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में उन पर बात कीजिए और इनके सही अर्थ से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने परिजनों और शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।
उत्तर: नीचे दिए गए शब्दों को उनके सही अर्थों से मिलाया गया है:

पंक्तियों पर विचार

पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इस पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समझ में साझा कीजिए और लिखिए—
(क) “मैंने सोचा बीमार पड़ने के लिए आज का दिन बिलकुल ठीक रहेगा। चलो बीमार पड़ जाते हैं।”
उत्तर: इस पंक्ति में बच्चे की नटखट और बचकानी सोच झलकती है। वह स्कूल जाने से बचने और होमवर्क न करने की सजा से बचने के लिए बीमारी का बहाना बनाने का फैसला करता है। यह दिखाता है कि बच्चा सोचता है कि बीमार होने से उसे आराम और अच्छा खाना (जैसे साबुदाने की खीर) मिलेगा।
मेरे विचार: यह पंक्ति मुझे बहुत रोचक लगी क्योंकि यह बच्चों की मासूम और शरारती सोच को दिखाती है। बच्चा बिना परिणाम सोचे जल्दबाजी में फैसला लेता है, जो बाद में उसे परेशानी में डाल देता है।

(ख) “देखो! उन्होंने एक बार भी आकर नहीं पूछा कि तू क्या खाएगा? पूछते तो मैं साबुदाने की खीर ही तो माँगता। कोई ताजमहल तो नहीं माँग लेता। लेकिन नहीं! भूखे रहो!! इससे सारे विकार निकल जाएँगे। विकार निकल जाएँ बस। चाहे इस चक्कर में तुम खुद शिकार हो जाओ।”
उत्तर: इस पंक्ति में बच्चे का गुस्सा, निराशा और भूख के कारण तंज भरा लहजा दिखता है। वह सोचता है कि नानीजी और नानाजी ने उसकी भूख की परवाह नहीं की और उसे भूखा रखा। वह मजाक में कहता है कि वह तो बस साबुदाने की खीर माँगता, कोई बड़ी चीज (जैसे ताजमहल) नहीं। वह नानाजी के “विकार निकल जाएँगे” वाले तर्क पर नाराज है, क्योंकि उसे लगता है कि इस चक्कर में वह खुद भूख से परेशान हो गया।
मेरे विचार: यह पंक्ति बहुत हास्यपूर्ण और भावुक है। बच्चे का गुस्सा और उसका अतिशयोक्ति भरा लहजा (ताजमहल की तुलना) पढ़कर हंसी आती है। साथ ही, यह दिखाता है कि बच्चा अपनी गलती के परिणाम को समझने लगा है।

सोच-विचार के लिएपाठ को एक बार फिर ध्यान से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए I
(क) अस्पताल में बच्चे को कौन-कौन सी चीजें अच्छी लगीं और क्यों?
उत्तर:

  • बड़ी-बड़ी खिड़कियाँ और हरे-हरे पेड़: बच्चे को खिड़कियों के पास हरे पेड़ झूमते हुए अच्छे लगे क्योंकि वे सुंदर और शांतिपूर्ण थे।
  • शांति और साफ-सफाई: अस्पताल में ट्रैफिक का शोर, धूल, या मच्छर-मक्खियाँ नहीं थीं, जो बच्चे को बहुत अच्छा लगा। केवल लोगों की धीमी-धीमी बातचीत की आवाज थी, जिससे माहौल शांत और सुखद था।
  • साफ-सुथरे बिस्तर: बच्चे को साफ चादरों और लाल कंबल वाले बिस्तर अच्छे लगे क्योंकि वे आरामदायक और सुंदर थे।
  • चमकता हुआ फर्श और हरे परदे: ये चीजें अस्पताल को और आकर्षक बनाती थीं, जिससे बच्चे को माहौल बहुत पसंद आया।

क्यों अच्छा लगा?
ये चीजें बच्चे को इसलिए अच्छी लगीं क्योंकि वह पहली बार अस्पताल गया था, और वहाँ का शांत, साफ, और सुंदर माहौल उसके रोजमर्रा के शोर-शराबे वाले माहौल से अलग था।

(ख) कहानी के अंत में बच्चे को महसूस हुआ कि उसे स्कूल जाना चाहिए था। क्या आपको लगता है कि उसका निर्णय सही था? क्यों?
उत्तर: हाँ, बच्चे का यह निर्णय सही था। क्योंकि:

  1. अस्पताल का अनुभव: अस्पताल में जाकर बच्चे को समझ में आया कि बीमार होना कोई मज़े की बात नहीं होती।
  2. बीमार होने की तकलीफ: उसे यह भी महसूस हुआ कि डॉक्टर की सुई, दवाइयाँ और टेस्ट कराना आसान नहीं होता।
  3. स्कूल की अहमियत: उसने समझा कि स्कूल जाना और वहाँ पढ़ना, खेलना और दोस्तों के साथ समय बिताना कहीं ज़्यादा अच्छा और सुखद है।
  4. गलती का अहसास: उसे अपनी गलती का एहसास हुआ कि उसने झूठ बोलकर स्कूल से छुट्टी लेने की कोशिश की।

इसलिए, बच्चे ने जो सीखा और जो निर्णय लिया, वह बिल्कुल सही और समझदारी भरा था।

(ग) जब बच्चा बीमार पड़ने का बहाना बनाकर बिस्तर पर लेटा रहा तो उसके मन में कौन-कौन से भाव आ रहे थे?
(संकेत — मन में उत्पन्न होने वाले विकार या विचार को भाव कहते हैं, उदाहरण के लिए — क्रोध, दुख, भय, करुणा, प्रेम आदि)
उत्तर:

  • उम्मीद: शुरू में बच्चा यह सोचकर खुश था कि उसे साबुदाने की खीर मिलेगी और आराम करने को मिलेगा।
  • ऊब: लंबे समय तक बिस्तर पर लेटे रहने से उसकी पीठ दुखने लगी और वह ऊब गया।
  • भूख: बच्चे को भूख लगी, और वह खाने की चीजों (जैसे कचौड़ी, बर्फी, गोलगप्पे) के बारे में सोचने लगा।
  • निराशा: जब उसे खाना नहीं मिला और परिवार वालों ने उसकी परवाह नहीं की, तो वह निराश हुआ।
  • गुस्सा: मुनु को आम खाते देखकर और परिवार के खाना खाने की आवाज सुनकर उसे गुस्सा और जलन हुई।
  • पछतावा: अंत में उसे अपनी गलती पर पछतावा हुआ, और उसने स्कूल न जाने के फैसले को गलत माना।

(घ) कहानी में बच्चे ने सोचा था कि “ठाठ से साफ-सुथरे बिस्तर पर लेटे रहो और साबुदाने की खीर खाते रहो।” आपको क्या लगता है, असल में बीमार हो जाने और इस बच्चे की सोच में कौन-कौन सी समानताएँ और अंतर होंगे?
उत्तर
समानताएँ:

  • बीमार होने पर व्यक्ति को बिस्तर पर आराम करने और स्कूल या काम से छुट्टी मिलती है, जैसा बच्चा सोचता है।
  • बीमार व्यक्ति को हल्का और पौष्टिक खाना (जैसे साबुदाने की खीर) दिया जाता है, जैसा बच्चे ने देखा।

अंतर:

  • बच्चे की सोच: बच्चा सोचता है कि बीमारी में सिर्फ आराम और अच्छा खाना मिलता है, और यह मजेदार है।
    वास्तविकता: असल में बीमारी में दर्द, कमजोरी, और असुविधा होती है। दवाइयाँ लेनी पड़ती हैं, और खाना सीमित होता है।
  • बच्चे की सोच: बच्चे को लगता है कि बीमारी में सब उसका ध्यान रखेंगे। 
    वास्तविकता: बीमार व्यक्ति को कई बार अकेलापन और परेशानी महसूस होती है, जैसा बच्चे को बाद में हुआ।
  • बच्चे की सोच: बच्चे को बीमारी एक खेल जैसी लगती है।
    वास्तविकता: बीमारी गंभीर हो सकती है और ठीक होने में समय लगता है।

(ङ) नानीजी और नानाजी ने बच्चे को बीमारी की दवा दी और उसे आराम करने को कहा। बच्चे को खाना नहीं दिया गया। क्या आपको लगता है कि उन्होंने सही किया? आपको ऐसा क्यों लगता है?
उत्तर: हाँ, नानीजी और नानाजी ने सही किया।
क्यों:

  • नानाजी ने बच्चे की नब्ज और माथा छूकर उसकी हालत जाँची और उसे दवा दी, जो बीमारी के इलाज के लिए जरूरी थी।
  • उनका मानना था कि बीमारी में भूखे रहने से “विकार निकल जाते हैं,” जो उस समय की पारंपरिक सोच थी। इसलिए, उन्होंने बच्चे को खाना न देकर आराम करने की सलाह दी।
  • इससे बच्चे को उसकी गलती का सबक मिला, और उसने भविष्य में झूठ न बोलने का फैसला किया।

हालांकि: बच्चे को थोड़ा हल्का खाना (जैसे फल) दे सकते थे, क्योंकि वह वास्तव में बीमार नहीं था। लेकिन उनकी सख्ती ने बच्चे को अनुशासन सिखाया।

अनुमान और कल्पना से(क) कहानी के अंत में बच्चा नानाजी और नानीजी को सब कुछ सच-सच बताने का निर्णय कर लेता तो कहानी में आगे क्या होता?
(संकेत — उसका दिन कैसे बदल जाता? उसकी सोच और अनुभव कैसे होते?)
उत्तर:

  • बच्चा नानाजी और नानीजी को बता देता कि उसने बीमारी का बहाना बनाया था ताकि स्कूल न जाना पड़े।
  • नानाजी और नानीजी शुरू में नाराज हो सकते थे, लेकिन बच्चे की ईमानदारी देखकर उसे माफ कर देते।
  • वे बच्चे को समझाते कि झूठ बोलना गलत है और होमवर्क समय पर करना चाहिए।
  • बच्चे को हल्का खाना (जैसे साबुदाने की खीर या फल) मिल जाता, और वह खुश हो जाता।
  • बच्चा स्कूल न जाने के बजाय अगले दिन स्कूल जाता और अपने दोस्तों से होमवर्क की नोटबुक माँगकर काम पूरा करता।
  • उसका दिन भूखे और अकेले रहने के बजाय खुशी और सीख से भरा होता।

बदलाव: बच्चे की सोच में बदलाव आता, और वह झूठ बोलने के बजाय ईमानदारी को महत्व देने लगता। उसका अनुभव सकारात्मक और प्रेरणादायक होता।

(ख) कहानी में बच्चे की नानीजी के स्थान पर आप हैं। आप सारे नाटक को समझ गए हैं लेकिन चाहते हैं कि बच्चा सारी बात आपको स्वयं बता दे। अब आप क्या करेंगे?
(संकेत — इस सवाल में आपको नानीजी की जगह लेकर सोचना है और एक मनोरंजक योजना बनानी है जिससे बच्चा आपको स्वयं सारी बातें बता दे।)
उत्तर:

  • मैं बच्चे के पास जाऊँगा और प्यार से पूछूँगा, “बेटा, तुम्हें सचमुच बुखार है या कुछ और बात है? तुम मुझे सब सच बता सकते हो, मैं नाराज़ नहीं होऊँगा।”
  • मैं बच्चे को बताऊँगा कि स्कूल में आज कुछ मज़ेदार हुआ, जैसे “आज रिसेस में सभी बच्चे नमक-मिर्च वाले अमरूद खा रहे थे।” इससे बच्चे को स्कूल न जाने का पछतावा होगा।
  • मैं रसोई से साबुदाने की खीर की खुशबू आने का ज़िक्र करूँगा, जैसे “मैं खीर बना रही हूँ, जो बीमार नहीं है, उसे भी मिल सकती है, बशर्ते वह सच बोले।”
  • मैं बच्चे को कहानी सुनाऊँगा कि कैसे मैंने बचपन में एक बार झूठ बोला था और बाद में सच बोलकर अच्छा महसूस किया।
  • इससे बच्चा प्रेरित होकर सच बोल देगा, और मैं उसे गले लगाकर उसकी ईमानदारी की तारीफ करूँगा।

योजना का उद्देश्य: बच्चे को डराने के बजाय प्यार और प्रोत्साहन से सच बोलने के लिए प्रेरित करना।

(ग) कहानी में बच्चे के स्थान पर आप हैं और घर में अकेले हैं। अब आप ऊबने से बचने के लिए क्या-क्या करेंगे?
उत्तर: मैं घर में अकेले रहते हुए ऊब से बचने के लिए

  • किताब पढ़ना: मैं अपनी पसंदीदा कहानी की किताब या कॉमिक्स पढ़ूँगा।
  • चित्र बनाना: कागज और रंगों से अस्पताल या अपनी गली का चित्र बनाऊँगा।
  • खेल खेलना: अकेले ही कागज पर टिक-टैक-टो या पहेलियाँ सुलझाऊँगा।
  • सपने देखना: कल्पना करूँगा कि मैं एक सुपरहीरो हूँ और रोमांचक साहसिक यात्रा पर हूँ।
  • घर की खोज: घर में पुरानी चीजें (जैसे खिलौने या फोटो) ढूँढूँगा और उनकी कहानियाँ याद करूँगा।
  • हल्का व्यायाम: बिस्तर पर ही हल्की स्ट्रेचिंग या नाचने की कोशिश करूँगा।
  • रेडियो सुनना: अगर रेडियो हो, तो गाने या कहानियाँ सुनूँगा।

उद्देश्य: ये गतिविधियाँ मुझे व्यस्त और खुश रखेंगी, और ऊब से बचने में मदद करेंगी।

(घ) कहानी के अंत में बच्चे को लगा कि उसे स्कूल जाना चाहिए था। कल्पना कीजिए, अगर वह स्कूल जाता तो उसका दिन कैसा बीतता? अगला दिन जब वह स्कूल गया होगा तो उसे क्या-क्या अच्छा लगा होगा?
उत्तर: 
अगर बच्चा स्कूल जाता:

  • बच्चा सुबह जल्दी उठता, नहाता, और नाश्ता करके स्कूल के लिए तैयार होता।
  • स्कूल में अपने दोस्तों के साथ मस्ती करता और कक्षा में शिक्षक की बातें ध्यान से सुनता।
  • होमवर्क न करने की सजा से बचने के लिए शिक्षक से माफी माँगता और अगले दिन होमवर्क पूरा करने का वादा करता।
  • रिसेस में ठेले पर नमक-मिर्च वाले अमरूद खाता और दोस्तों के साथ खेलता।
  • दिन खुशी और सीख से भरा होता, और बच्चा घर लौटकर नानीजी को स्कूल की बातें बताता।

अगले दिन स्कूल में:

  • बच्चा समय पर होमवर्क पूरा करके स्कूल जाता।
  • अपने दोस्तों से नोटबुक माँगकर छूटी हुई पढ़ाई पूरी करता।
  • शिक्षक को होमवर्क दिखाता और उनकी तारीफ पाता।
  • रिसेस में दोस्तों के साथ गोलगप्पे या चाट खाता और खेल के मैदान में दौड़ लगाता।
  • घर लौटकर नानाजी और नानीजी को स्कूल के मजे की बातें बताता और कहता कि वह अब कभी झूठ नहीं बोलेगा।

(ङ) कहानी में नानाजी और नानीजी ने बच्चे की बीमारी ठीक करने के लिए उसे दवाई दी और खाने के लिए कुछ नहीं दिया। अगर आप नानीजी या नानाजी की जगह होते तो क्या-क्या करते?
उत्तर:

  • मैं बच्चे का माथा छूकर और नब्ज देखकर उसकी हालत जाँचता।
  • बच्चे को थर्मामीटर से बुखार नापने की कोशिश करता, और अगर बुखार न हो तो हल्का खाना (जैसे फल या दूध) देता।
  • बच्चे से प्यार से पूछता कि क्या वह सचमुच बीमार है या स्कूल जाने से डर रहा है।
  • बच्चे को कहानी सुनाकर या खेल खेलकर उसका मन बहलाता ताकि वह ऊब न जाए।
  • बच्चे को समझाता कि होमवर्क न करने की सजा से डरने की बजाय शिक्षक से माफी माँगना बेहतर है।
  • अगर बच्चा सच बोलता, तो उसे साबुदाने की खीर बनाकर खिलाता और उसकी ईमानदारी की तारीफ करता।
  • बच्चे को अगले दिन स्कूल जाने के लिए प्रोत्साहित करता और होमवर्क पूरा करने में मदद करता।

उद्देश्य: बच्चे को सजा देने के बजाय प्यार और समझदारी से उसकी गलती सुधारना।

कहानी की रचना“अस्पताल का माहौल मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था। बड़ी-बड़ी खिड़कियों के पास हरे-हरे पेड़ झूम रहे थे। न ट्रैफिक का शोरगुल, न धूल, न मच्छर-मक्खी…! सिर्फ लोगों के धीरे-धीरे बातचीत करने की धीमी-धीमी गुनगुनाहट। बाकी एकदम शांति।”
इन पंक्तियों पर ध्यान दीजिए। इन पंक्तियों में ऐसा लग रहा है मानो हमारी आँखों के सामने अस्पताल का चित्र-सा बन गया हो। लेखन में इसे ‘चित्रात्मक भाषा’ कहते हैं। अनेक लेखक अपनी रचना को रोचक और सरस बनाने के लिए उपयुक्त शब्दों एवं अनेक वस्तुओं, कार्यों, स्थानों आदि का विस्तार से वर्णन करते हैं।
लेखक ने इस कहानी को सरस और रोचक बनाने के लिए और भी अनेक तकनीकों का उपयोग किया है। उदाहरण के लिए, उन्होंने कहानी में ‘बच्चे द्वारा कल्पना करना’ का भी प्रयोग किया है (जब वह घर में अकेले लेटे-लेटे घर और बाहर के लोगों के बारे में सोच रहा था)। इस कहानी में ऐसी कई विशेषताएँ छिपी हैं।

(क) इस पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और अपने समूह में मिलकर इस पाठ की अन्य विशेषताओं की सूची बनाइए। अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
उत्तर

  • बीमार व्यक्ति की देखभाल हेतु समय निकालना, मिलने जाते समय कुछ पसंदीदा व उपयुक्त चीज़ ले जाना — ये संबंधी प्रसंग बच्चों के लिए प्रेरणादायी हैं।
  • पाठ को पढ़कर अस्पताल के शांत, स्वच्छ वातावरण और वहाँ के कर्मचारियों के प्रति एक सकारात्मक छवि उभरती है।
  • छोटे बच्चों के भोले विचारों का मनोविज्ञान जानकर मन में हास्य का भाव आता है, जब बच्चा बीमारी से होने वाले कष्टों को न समझकर केवल साबूदाने की खीर खाने की इच्छा के कारण स्वयं बीमार होने की कामना करता है।
    उदाहरण – “क्या ठाठ हैं बीमारी के भी। मैंने सोचा, ठाठ से साफ-सुथरे बिस्तर पर लेटे रहो और साबूदाने की खीर खाते रहो। काश! सुधाकर काका की जगह मैं होता! मैं कब बीमार पड़ूँगा?”
  • पहली बार अस्पताल जाने पर वहाँ के दृश्य देखकर सहज कौतूहल उत्पन्न होना, अनेक प्रश्नों का मन में उठना — ये स्वाभाविक दृश्य कहानी की गत्यात्मकता बनाए रखते हैं।
  • बाल-सुलभ चंचलता युक्त कहानी के दृश्य एवं गतिविधियाँ अत्यंत रोचक और विशिष्ट हैं।
  • बच्चे की उलझनें — जबरदस्ती लेटने का बंधन, स्कूल की दिनचर्या की याद, अपने बहाने पर पछतावा आदि — कहानी के रोचक तथ्य हैं।
  • बच्चे का झुँझलाहट भरा कथन उसकी मानसिक स्थिति और घर के वातावरण को चित्रित करने में सहायक है, जैसे – “वे खाना खा रहे हैं। चबाने की आवाजें आ रही हैं। देखो! उन्होंने एक बार भी आकर नहीं पूछा कि तू क्या खाएगा? पूछते तो मैं साबूदाने की खीर ही तो माँगता। कोई ताजमहल तो नहीं माँग लेता। लेकिन नहीं। भूखे रहो!! इससे सारे विकार निकल जाएँगे।”
  • सहज, सरल भाषा-शैली युक्त संपूर्ण कहानी बच्चों का मनोरंजन करने के साथ-साथ उन्हें एक सबक भी देती प्रतीत होती है।

(ख) कहानी में से निम्नलिखित के लिए उदाहरण खोजकर लिखें I
उत्तर:

समस्या और समाधान

कहानी को एक बार पुनः पढ़कर पता लगाइए—
(क) बच्चे के सामने क्या समस्या थी? उसने उस समस्या का क्या समाधान निकाला?
उत्तर:

  • समस्या: बच्चे ने होमवर्क नहीं किया था और उसे स्कूल में सजा मिलने का डर था। साथ ही, उसका स्कूल जाने का मन नहीं था।
  • समाधान: बच्चे ने बीमारी का बहाना बनाकर स्कूल न जाने का फैसला किया। उसने रजाई में लेटे रहकर बीमार होने का नाटक किया।

(ख) नानीजी-नानाजी के सामने क्या समस्या थी? उन्होंने उस समस्या का क्या समाधान निकाला?
उत्तर:

  • समस्याः नानीजी-नानाजी को संदेह था कि बच्चा वास्तव में बीमार नहीं है लेकिन वह झूठ बोलकर बीमारी का ढोंग कर रहा है।
  • समाधानः उन्होंने बच्चे को दवाई और काढ़ा देकर उसकी बीमारी का इलाज किया, लेकिन खाना नहीं दिया और उसे आराम करने को कहकर छोड़ दिया ताकि बच्चा झूठ बोलने के परिणाम को खुद समझे।

शब्द से जुड़े शब्दनीचे दिए गए स्थानों में ‘बीमार’ से जुड़े शब्द पाठ में से चुनकर लिखिए—
उत्तर:

खोजबीनकहानी में से वे वाक्य ढूँढकर लिखें जिनसे पता चलता है कि:
(क) कहानी में सर्दी के मौसम की घटनाएँ बताई गई हैं।
उत्तर: वाक्य:

  • “मैं रजाई से निकला ही नहीं।”
  • “मैं रजाई में पड़ा-पड़ा घर में चल रही गतिविधियों का अनुमान लगाता रहा।”

(ख) बच्चे को बहाना बनाने के परिणाम का आभास हो गया।
उत्तर: वाक्य:

  • “इसके बाद स्कूल से छुट्टी मारने के लिए मैंने बीमारी का बहाना कभी नहीं बनाया।”
  • “क्या मूसीबत है। पड़े रहो। आखिर कब तक कोई पड़ा रह सकता है?”

(ग) बच्चे को खाना-पीना बहुत प्रिय है।
उत्तर: वाक्य:

  • “गरमागरम खस्ता कचौड़ी… माव की बर्फी… बेसन की चक्की… गोलगप्पे। और सबसे ऊपर साबुदाने की खीर।”
  • “अरहर की दाल में हींग-जीरे का बघार और ऊपर से बारीक कटा हरा धनिया और आधा चम्मच देसी घी।”

(घ) बच्चे को स्कूल जाना अच्छा लगता है।
उत्तर: वाक्य:

  • “कितना मज़ा आता जब रिसेस में ठेले पर जाकर नमक-मिर्च लगे अमरूद खाते कटक-कटक।”
  • “सारे बच्चे हल्ला मचाते हुए आँगन में खेल रहे होंगे और मैं बिस्तर में पड़ा इख मार रहा हूँगा।”

शीर्षक

(क) आपने जो कहानी पढ़ी है, इसका नाम ‘नहीं होना बीमार’ है। अपने समूह में चर्चा करके लिखें कि इस कहानी का यह नाम उपयुक्त है या नहीं। अपने उत्तर के कारण भी बताएँ।
उत्तर: हाँ, कहानी का नाम “नहीं होना बीमार” उपयुक्त है। 
कारण:

  • कहानी का मुख्य पाठ यह है कि बीमारी का बहाना बनाना गलत है, क्योंकि इससे परेशानी ही होती है।
  • बच्चे को बीमारी का बहाना बनाने के बाद भूख, अकेलापन, और पछतावा झेलना पड़ता है, जिससे वह कहता है कि वह फिर कभी ऐसा नहीं करेगा।
  • शीर्षक कहानी के संदेश को स्पष्ट करता है कि बीमार होने या बहाना बनाने से बचना चाहिए।

(ख) यदि आपको इस कहानी को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा, यह भी बताइए |
उत्तर: 

  • नाम: “झूठ का सबक”
  • कारण: यह नाम कहानी के मुख्य संदेश को दर्शाता है कि झूठ बोलने से नुकसान होता है और इससे बच्चे को सबक मिलता है। बच्चे ने बीमारी का झूठ बोला, लेकिन अंत में उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने सच बोलने का फैसला किया।

अभिनय

कहानी में से चुनकर कुछ संवाद नीचे दिए गए हैं। आपको इन्हें अभिनय के साथ बोलकर दिखाना है। प्रत्येक समूह से बारी-बारी से छात्र/छात्राएँ कक्षा में सामने आएँगे और एक संवाद अभिनय के साथ बोलकर दिखाएँगे—

1. “बुखार आ गया।” मैंने कराहते हुए कहा। 
उत्तर: अभिनय: माथे पर हाथ रखकर, चेहरा उदास बनाकर, धीमी और दर्द भरी आवाज में बोलना।

2. “आपको पता नहीं चल रहा। थर्मामीटर लगाकर देखिए।” मैंने कहा। 
उत्तर: अभिनय: थोड़ा गुस्से और जलन के साथ, उंगली दिखाते हुए, जोर देकर बोलना।

3. “मेरे सिर में दर्द हो रहा है। पेट भी दुख रहा है और मुझे बुखार भी है।” 
उत्तर: अभिनय: रजाई में लेटे हुए, कमजोर और शिकायती आवाज में, चेहरा दर्द से भरा हुआ दिखाना।

4. नानाजी आए। बोले, “अब कैसा है सिरदर्द?” 
उत्तर: अभिनय: गंभीर और चिंतित चेहरा, धीमी और देखभाल करने वाली आवाज में बोलना।

5. फिर नानाजी बोले, “आज इसे कुछ खाने को मत देना। आराम करने दो। शाम को देखेंगे।” 
उत्तर: अभिनय: सख्त लेकिन प्यार भरी आवाज, बच्चे की ओर देखते हुए, गंभीर चेहरा बनाकर बोलना।

चेहरों पर मुस्कान, मुँह में पानी

(क) इस कहानी में अनेक रोचक घटनाएँ हैं जिन्हें पढ़कर चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। इस कहानी में किन बातों को पढ़कर आपके चेहरे पर भी मुस्कान आ गई थी? उन्हें रेखांकित कीजिए।
उत्तर: 1. “क्या ठाठ हैं बीमारों के भी। मैंने सोचा… ठाठ से साफ-सुथरे बिस्तर पर लेटे रहो और साबुदाने की खीर खाते रहो!”
(मुस्कान क्योंकि बच्चे की मासूम सोच बहुत मज़ेदार है।)
2. “पूछते तो मैं साबुदाने की खीर ही तो माँगता, कोई ताजमहल तो नहीं माँग लेता।”
(मुस्कान क्योंकि बच्चे का तंज और अतिशयोक्ति हास्यपूर्ण है।)
3. “मुनु एक बार भी मुझे देखने नहीं आया। आया भी होगा तो दबे पाँव आया होगा और मुझे सोता जान लौट गया होगा।”
(मुस्कान क्योंकि बच्चे की जलन और शिकायत भरी सोच मज़ेदार है।)

(ख) इस कहानी में किन वाक्यों को पढ़कर आपके मुँह में पानी आ गया था? उन्हें रेखांकित कीजिए।
उत्तर: 1. “गरमागरम खस्ता कचौड़ी… माव की बर्फी… बेसन की चक्की… गोलगप्पे। और सबसे ऊपर साबुदाने की खीर।”
(मुँह में पानी क्योंकि इन स्वादिष्ट खानों का वर्णन बहुत ललचाने वाला है।)
2. “अरहर की दाल में हींग-जीरे का बघार और ऊपर से बारीक कटा हरा धनिया और आधा चम्मच देसी घी।”
(मुँह में पानी क्योंकि दाल की खुशबू और स्वाद का वर्णन बहुत आकर्षक है।)
3. “तली हुई हरी मिर्च।”
(मुँह में पानी क्योंकि तली मिर्च का ज़िक्र चटपटे स्वाद की याद दिलाता है।)

लेखन के अनोखे तरीके

मैं बिना आवाज़ किए दरवाज़े तक गया और ऐसे झाँककर देखने लगा जिससे किसी को पता न चले कि मैं बिस्तर से उठ गया हूँ।
इस बात को कहानी में इस प्रकार विशेष रूप से लिखा गया है—

“दबे पाँव दरवाज़े तक गया और चुपके से झाँककर देखा।”
इस कहानी में अनेक स्थानों पर वाक्यों को विशेष ढंग से लिखा गया है। साधारण बातों को कुछ अलग तरह से लिखने से लेखन की सुंदरता बढ़ सकती है।

नीचे दिए गए वाक्यों को कहानी में कैसे लिखा गया है:

  1. ऐसा लगा मानो हमें देखकर सुधाकर काका खुश हो गए।
  2. खिड़कियाँ बहुत बड़ी थीं और उनके बाहर हरे पेड़ हवा से हिल रहे थे।
  3. वहाँ केवल लोगों के फुसफुसाने की आवाजें आ रही थीं।
  4. फुसफुसाने की आवाजों के सिवा वहाँ कोई आवाज नहीं थी।
  5. बीमार लोगों के बहुत मजे होते हैं।
  6. मैं झूठमूठ बीमार पड़ जाता हूँ ।

उत्तर:

  1. हमें देखकर सुधाकर काका जैसे खुश हो गए।
  2. बड़ी-बड़ी खिड़कियों के पास हरे-हरे पेड़ झूम रहे थे ।
  3. सिर्फ लोगों के धीरे-धीरे बात करके की धीमी-धीमी गुनगुन ।
  4. बाकी एकदम शांति ।
  5. क्या ठाठ हैं बीमारों के भी।
  6. मैंने सोचा बीमार पड़ने के लिए आज का दिन बिल्कुल ठीक रहेगा। चलो बीमार पड़ जाते हैं।

विराम चिह्न

‘देखें!’ नानाजी ने रजाई हटाकर मेरा माथा छुआ। पेट देखा और नब्ज़ देखने लगे।
इस बीच नानीजी भी आ गईं। ‘क्या हुआ?’, नानीजी ने पूछा।

पिछले प्रश्न पर दिए गए वाक्यों को ध्यान से देखिए। इन वाक्यों में आपको कुछ शब्दों से पहले या बाद में कुछ चिह्न दिखाई दे रहे हैं। इन्हें विराम चिह्न कहते हैं।
अपने समूह के साथ मिलकर नीचे दिए गए विराम चिह्नों को कहानी में ढूँढिए। ध्यानपूर्वक देखकर समझिए कि इनका प्रयोग वाक्यों में कहाँ-कहाँ किया जाता है। आपने जो पता किया, उसे नीचे लिखिए—

आवश्यकता हो तो इस प्रश्न का उत्तर पता करने के लिए आप अपने परिजनों, शिक्षकों, पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता ले सकते हैं।
उत्तर: विराम चिह्न का प्रयोग निम्नलिखित प्रकार से किया जा सकता है:

कैसी होगी गली

“मुझे बड़ी तेज़ इच्छा हुई कि इसी समय बाहर निकलकर दिन की रोशनी में अपनी गली की चहल-पहल देखूँ।”
आपने कहानी में बच्चे के घर के साथ वाली गली के बारे में बहुत-सी बातें पढ़ी हैं। उन बातों और अपनी कल्पना के आधार पर उस गली का एक चित्र बनाईए।

उत्तर: बच्चे की गली का दृश्यात्मक विवरणः

  • एक संकरी, लेकिन साफ़-सुथरी गली
  • एक ओर चंदभाई ड्राईक्लीनर की दुकान
  • दूसरी ओर तेजराम की चाय की दुकान, जहाँ ग्राहक बैठे बातें कर रहे हैं
  • महेश घी सेंटर से घी और मलाई की खुशबू आ रही है
  • गली में खेलते हुए बच्चे, कहीं कंचे तो कहीं पिट्टू खेल रहे हैं
  • ऊपर टेलीफोन के तारों पर चिड़ियाँ चहचहा रही हैं
  • एक कोने में फलवाला ठेला, जिसमें अमरूद, आम, केले
  • कुछ बच्चे आम चूसते हुए भाग रहे हैं
  • गली में से साइकिल, रिक्शा, और पैदल चलने वाले लोग जा रहे हैं
  • एक खिड़की से बच्चा चुपके से झाँक रहा है – कहानी का दृश्य

पाठ से आगे
आपकी बात

(क) बच्चे ने अस्पताल के वातावरण का विस्तार से सुंदर वर्णन किया है। इसी प्रकार आप अपनी कक्षा का वर्णन करें।
उत्तर: मेरी कक्षा बहुत सुंदर और जीवंत है। दीवारों पर रंग-बिरंगे चार्ट और बच्चों के बनाए चित्र लगे हैं। सामने बड़ा-सा ब्लैकबोर्ड है, जिस पर शिक्षक रंगीन चॉक्स से लिखते हैं। खिड़कियों से हल्की धूप और ताज़ी हवा आती है, जिससे माहौल तरोताज़ा रहता है। बेंच-डेस्क साफ-सुथरे हैं, और हर डेस्क पर किताबें और कॉपियाँ व्यवस्थित रहती हैं। कक्षा में बच्चों की हँसी और बातचीत की गुनगुन रहती है, लेकिन जब शिक्षक पढ़ाते हैं, तो सब शांत होकर ध्यान देते हैं। बाहर खिड़की से हरे पेड़ और खेल का मैदान दिखता है, जो मन को खुश करता है।

(ख) कहानी में बच्चे को घर में अकेले दिन भर लेटे रहना पड़ा था। क्या आप कभी कहीं अकेले रहे हैं? उस समय आपको कैसा लग रहा था? आपने क्या-क्या किया था?
उत्तर: हाँ, एक बार मैं घर पर अकेला था क्योंकि मम्मी-पापा को किसी काम से बाहर जाना पड़ा था।  

  • कैसा लगा: शुरू में मुझे मज़ा आया क्योंकि मैं टीवी देख सकता था, लेकिन कुछ देर बाद मुझे अकेलापन और ऊब महसूस हुई।  
  • क्या किया: मैंने अपनी पसंदीदा कार्टून फिल्म देखी, फिर कुछ बिस्किट खाए। मैंने अपनी पुरानी कॉमिक्स पढ़ीं और कागज पर एक सुपरहीरो का चित्र बनाया। बाद में मैंने मम्मी को फोन करके बात की, जिससे मुझे अच्छा लगा।

(ग) कहानी में आम खाने वाले मुनु को देखकर बच्चे को ईर्ष्या हुई थी। क्या आपको कभी किसी से या किसी को आपसे ईर्ष्या हुई है? आपने तब क्या किया था ताकि यह भावना दूर हो जाए?
उत्तर: हाँ, एक बार मेरे दोस्त को स्कूल में ड्राइंग प्रतियोगिता में पहला पुरस्कार मिला, और मुझे उससे थोड़ी ईर्ष्या हुई।  

  • क्या किया: मैंने अपने दोस्त को बधाई दी और उससे पूछा कि उसने इतना अच्छा चित्र कैसे बनाया। उसने मुझे कुछ टिप्स दिए। मैंने घर जाकर ड्राइंग की प्रैक्टिस की और अगली बार बेहतर करने की कोशिश की। इससे मेरी ईर्ष्या खुशी में बदल गई, और मैंने अपने दोस्त से कुछ नया सीखा।

बहाने(क) कहानी में बच्चे ने बीमारी का बहाना बनाया ताकि उसे स्कूल न जाना पड़े। क्या आपने कभी किसी कारण से बहाना बनाया है? यदि हाँ, तो उसके बारे में बताएँ। उस समय आपके मन में कौन-कौन से भाव आ-जा रहे थे? आप कैसा अनुभव कर रहे थे?
उत्तर: हाँ, एक बार मैंने मम्मी से कहा कि मेरा गला खराब है ताकि मुझे ट्यूशन न जाना पड़े।  

  • भाव: मुझे डर था कि मम्मी को पता चल जाएगा। साथ ही, थोड़ा मज़ा भी आ रहा था कि मैं घर पर रहकर टीवी देख सकूँगा। लेकिन बाद में मुझे थोड़ा अपराधबोध हुआ।  
  • अनुभव: शुरू में अच्छा लगा, लेकिन जब मम्मी ने मुझे दवा दी और आराम करने को कहा, तो मैं ऊब गया और पछतावा हुआ कि मैंने झूठ बोला।

(ख) आमतौर पर बनाए जाने वाले बहानों की एक सूची बनाएँ।
उत्तरबहानों की सूची

  1. “मुझे बुखार है।” (स्कूल या ट्यूशन से बचने के लिए)
  2. “मेरा होमवर्क कॉपी घर पर भूल गया।” (होमवर्क न करने पर)
  3. “मुझे पेट में दर्द है।” (खेल या काम से बचने के लिए)
  4. “बस छूट गई।” (देर होने पर)
  5. “मेरा फोन खराब हो गया।” (कॉल न करने पर)
  6. “मुझे नींद आ रही है।” (पढ़ाई से बचने के लिए)
  7. “मुझे कुछ याद नहीं।” (परीक्षा में जवाब न जानने पर)

(ग) बहाने क्यों बनाने पड़ते हैं? बहाने न बनाने पड़ें, इसके लिए हम क्या-क्या कर सकते हैं?
उत्तर: बहाने अक्सर तब बनाए जाते हैं जब हम कोई काम नहीं करना चाहते, जैसे स्कूल न जाना, होमवर्क न करना या ज़िम्मेदारी से बचना। यह आलस्य, डर या मन न लगने के कारण हो सकता है।
बहाने न बनाने पड़ें, इसके लिए हम ये कर सकते हैं:

  • समय पर सभी काम पूरे करें।
  • ईमानदारी और जिम्मेदारी से व्यवहार करें।
  • अपने मन की बात घरवालों और शिक्षकों से खुलकर कहें।
  • पढ़ाई और अन्य ज़िम्मेदारियों को बोझ नहीं, अवसर की तरह देखें।
  • अगर कोई परेशानी हो, तो उससे भागने की बजाय समाधान ढूंढें।

अनुमान“मैं रजाई में पड़ा-पड़ा घर में चल रही गतिविधियों का अनुमान लगाता रहा।”
कहानी में बच्चे ने अनेक प्रकार के अनुमान लगाए हैं। क्या आपने कभी किसी अनदेखे व्यक्ति/वस्तु/घटना/पक्षी/स्थान आदि के विषय में अनुमान लगाए हैं? किसके बारे में? क्या? कब? विस्तार से बताइए।
(संकेत — जैसे पेड़ से आने वाली आवाज़ सुनकर किसी प्राणी का अनुमान लगाना; कहीं दूर रहने वाले किसी संबंधी/रिश्तेदार के विषय में सुनकर उसके संबंध में अनुमान लगाना।)

उत्तर: हाँ, एक बार मैं पार्क में पेड़ से अजीब सी आवाज़ सुन रहा था।  

  • कब: पिछले साल गर्मियों की छुट्टियों में।  
  • क्या अनुमान लगाया: मुझे लगा कि शायद कोई पक्षी या गिलहरी है जो अपनी टहनियों में छिपी है। मैंने यह भी सोचा कि शायद कोई बड़ा पक्षी, जैसे कोयल या तोता, गाना गा रहा है।  
  • वास्तव में क्या था: जब मैंने ध्यान से देखा, तो वह एक छोटी सी गिलहरी थी जो पेड़ की छाल को कुतर रही थी।  
  • अनुभव: मुझे बहुत मज़ा आया क्योंकि यह एक छोटा सा रहस्य सुलझाने जैसा था। मैंने गिलहरी को थोड़ी देर देखा और उसकी तेज़ चाल देखकर हँसी आई।

घर का सामान“बहुत ढूँढ़ा गया पर थर्मामीटर मिला ही नहीं। शायद कोई माँगकर ले गया था।”
कहानी में बच्चे के घर पर थर्मामीटर (तापमापी) खोजने पर वह मिल नहीं पाता। आमतौर पर हमारे घरों में कोई न कोई ऐसी वस्तु होती है जिसे खोजने पर भी वह नहीं मिलती, जिसे कोई माँगकर ले जाता है या हम जिसे किसी से माँगकर ले आते हैं। अपने घर को ध्यान में रखते हुए ऐसी वस्तुओं की सूची बनाईए—
आम तौर पर हमारे घरों में कोई न कोई ऐसी वस्तु होती है जो खोजने पर भी नहीं मिलती, जिसे कोई माँगकर ले जाता है, या हम जिसे किसी से माँगकर ले आते हैं। अपने घर को ध्यान में रखते हुए ऐसी वस्तुओं की सूची बनाएँ।
उत्तर: 
खान-पान और आप(क) कहानी में सुधाकर काका को बीमार होने पर साबुदाने की खीर दी गई थी। आपके घर में किसी के बीमार होने पर उसे क्या-क्या खिलाया जाता है?
उत्तर

  • खिचड़ी: हल्की और पचने में आसान।
  • दाल का पानी: पौष्टिक और हल्का।
  • फल: जैसे केला या सेब, जो ऊर्जा देते हैं।
  • काढ़ा: जड़ी-बूटियों से बना, सर्दी-जुकाम के लिए।
  • ग्लूकोज़ पानी: कमजोरी दूर करने के लिए।

(ख) कहानी में बच्चे को बहुत-सी चीजें खाने का मन है। आपका क्या-क्या खाने का बहुत मन करता है?
उत्तर:

  • पिज़्ज़ा: चीज़ और टॉपिंग्स की वजह से।
  • गोलगप्पे: खट्टा-मीठा स्वाद बहुत पसंद है।
  • चॉकलेट केक: मीठा और नरम, हमेशा ललचाता है।
  • आलू पराठा: मक्खन और अचार के साथ मज़ेदार।
  • आम: रसदार और मीठा, गर्मियों में सबसे अच्छा।

(ग) कहानी में बच्चा सोचता है कि साबुदाने की खीर सिर्फ बीमारी या उपवास में क्यों मिलती है। आपके घर में ऐसा क्या-क्या है, जो केवल विशेष अवसरों या त्योहारों पर ही बनता है
उत्तर:

  • हलवा: दीवाली या जन्मदिन पर।
  • खीर: पूजा या रक्षाबंधन पर।
  • गुजिया: होली के त्योहार पर।
  • लड्डू: गणेश चतुर्थी या शादी में।
  • पंजीरी: जन्माष्टमी पर।

(घ) कहानी में बच्चा सोचता है कि अगर वह स्कूल जाता तो उसे ठेले पर नमक-मिर्च वाले अमरूद खाने को मिलते। आप अपने विद्यालय में क्या-क्या खाते-पीते हैं? विद्यालय में आपका रुचिकर भोजन क्या है?
उत्तरक्या खाते-पीते हैं:

  • टिफिन में पराठा, सब्जी, या सैंडविच।
  • कैंटीन में समोसा, चाट, या जूस।
  • दोस्तों के साथ बिस्किट या चिप्स शेयर करते हैं।
  • रुचिकर भोजन: कैंटीन का चटपटा समोसा, क्योंकि उसका मसालेदार स्वाद और कुरकुरापन बहुत पसंद है।

(ङ) इस कहानी में भोजन से जुड़ी बच्चे की कई रोचक बातें बताई गई हैं। आपके बचपन की भोजन से जुड़ी कोई विशेष याद क्या है, जिसे आप अब भी याद करते हैं?
उत्तर: मुझे याद है जब मैं 5 साल का था, और दादी ने मेरे जन्मदिन पर मेरे लिए खास चॉकलेट केक बनाया था।  

  • क्यों खास: केक पर मेरे नाम की सजावट थी, और उसका स्वाद इतना मज़ेदार था कि मैंने दो बड़े टुकड़े खा लिए।  
  • क्या हुआ: दादी ने मुझे गले लगाया और कहा कि यह केक मेरे लिए प्यार से बनाया है।  
  • आज भी क्यों याद: वह पल मेरे लिए बहुत खुशी भरा था, और अब भी चॉकलेट केक खाने पर मुझे दादी की याद आती है।

(च) कहानी में बच्चा भोजन की सुगंध से रजाई फेंककर रसोई में झाँकने लगा। क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि घर में किसी विशेष खाने की सुगंध से आप भी रसोई में जाकर तुरंत देखना चाहते हैं कि क्या पक रहा है? आपको किस-किस खाने की सुगंध सबसे अधिक पसंद है?
उत्तर: हाँ, मेरे साथ भी ऐसा कई बार हुआ है जब खाने की खुशबू ने मुझे रसोई की ओर खींच लिया है। एक बार माँ ने मेरे पसंदीदा आलू के पराठे बनाए थे। जैसे ही घी की खुशबू पूरे घर में फैली, मैं तुरंत रसोई में पहुँच गया कि पराठे कब मिलेंगे।
मुझे सबसे ज़्यादा पसंद है:

  • ताज़ा बने पूरी-आलू की सब्ज़ी की सुगंध
  • पाव भाजी की खुशबू, जिसमें मक्खन की महक होती है
  • गर्मा-गरम गुलाब जामुन या हलवे की मिठास भरी खुशबू
  • ऐसी सुगंधें भूख को बढ़ा देती हैं और मन करता है कि खाना जल्दी परोसा जाए।

आज की पहेलीकहानी में आपने खाने-पीने की अनेक वस्तुओं के बारे में पढ़ा है। अब हम आपके सामने खाने-पीने की वस्तुओं या व्यंजनों से जुड़ी कुछ पहेलियाँ लाए हैं। इन्हें पढ़िए और उत्तर लिखिए I

उत्तर: 

04. पानी रे पानी अध्याय समाधान 

पाठ सेमेरी समझ से(क) निम्नलिखित प्रश्नों का सही उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा  (*) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
(1) हमारा भूजल भंडार निम्नलिखित में से किससे समृद्ध होता है?

  • नल सूख जाने से।
  • पानी बरसने से। (*)
  • तालाब और झीलों से। (*)
  • बाढ़ आने से।

उत्तर: पानी बरसने से।
तालाब और झीलों से।
विश्लेषण: भूजल भंडार वर्षा के पानी और तालाबों, झीलों जैसे जल स्रोतों से रिसकर समृद्ध होता है। नल सूखने या बाढ़ से भूजल भंडार पर सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता

(2) निम्नलिखित में से कौन-सी बात जल-चक्र से संबंधित है?

  • वर्षा जल का संग्रह करना।
  • समुद्र से उठी भाप का बादल बनकर बरसना। (*)
  • नदियों का समुद्र में जाकर मिलना। (*)
  • बरसात में चारों ओर पानी ही पानी दिखाई देना।

उत्तर: समुद्र से उठी भाप का बादल बनकर बरसना।
नदियों का समुद्र में जाकर मिलना।
विश्लेषण: जल-चक्र में समुद्र से भाप बनकर बादल बनना, वर्षा होना और नदियों का पानी वापस समुद्र में मिलना शामिल है। वर्षा जल संग्रहण जल-चक्र का हिस्सा नहीं, बल्कि मानवीय प्रयास है।

(3) “इस बड़ी गलती की सजा अब हम सबको मिल रही है।” यहाँ किस गलती की ओर संकेत किया गया है?

  • जल-चक्र की अवधारणा को न समझना।
  • आवश्यकता से अधिक पानी का उपयोग करना।
  • तालाबों को कचरे से पाटकर समाप्त करना। (*)
  • भूजल भंडारण के विषय में विचार न करना। (*)

उत्तर: तालाबों को कचरे से पाटकर समाप्त करना।
भूजल भंडारण के विषय में विचार न करना।
विश्लेषण: पाठ में स्पष्ट है कि तालाबों को कचरे से पाटकर मकान, बाजार आदि बनाने से भूजल भंडार कम हुआ, जिसके कारण सूखा और बाढ़ की समस्याएँ बढ़ीं।

(ख) अब अपने मित्रों के साथ संवाद कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर: मैंने ऊपर दिए गए उत्तर इसलिए चुने क्योंकि:

  • भूजल भंडार वर्षा और तालाबों, झीलों से रिसने वाले पानी से भरता है, जैसा कि पाठ में बताया गया है।
  • जल-चक्र की प्रक्रिया में भाप से बादल बनना और नदियों का समुद्र में मिलना मुख्य हिस्सा है, जो प्रकृति का चक्र है।
  • तालाबों को नष्ट करना पाठ में मुख्य गलती के रूप में बताया गया है, जिससे पानी की कमी और बाढ़ की समस्या बढ़ी।

मिलकर करें मिलानपाठ में से कुछ शब्द समूह या संदर्भ चुनकर स्तंभ 1 में दिए गए हैं और उनके अर्थ स्तंभ 2 में दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और रेखा खींचकर सही मिलान कीजिए।

उत्तर: 

पंक्तियों पर चर्चा

इस पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और अपने सहपाठियों से चर्चा कीजिए।

  • पानी आता भी है तो बेवक्त।”

उत्तर: यह पंक्ति बताती है कि पानी की कमी के कारण नल में पानी अनियमित समय पर आता है, जैसे देर रात या सुबह जल्दी, जिससे लोगों को परेशानी होती है।

  • “देश के कई हिस्सों में तो अकाल जैसे हालात बन जाते हैं।”

उत्तर: यह दर्शाता है कि गर्मियों में पानी की भारी कमी के कारण कई जगहों पर सूखे जैसे हालात हो जाते हैं।

  • “कुछ दिनों के लिए सब कुछ थम जाता है।”

उत्तर: बरसात में बाढ़ के कारण सड़कें, स्कूल, और अन्य गतिविधियाँ रुक जाती हैं, जिससे जीवन प्रभावित होता है।

  • “अकाल और बाढ़ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।”

उत्तर: यह पंक्ति कहती है कि पानी की कमी (अकाल) और अधिकता (बाढ़) दोनों एक ही समस्या के दो रूप हैं, जिन्हें जल-चक्र को समझकर हल किया जा सकता है।

सोच-विचार के लिए

लेख को एक बार पुनः पढ़िए और निम्नलिखित के विषय में पता लगाकर लिखिए।
(क) पाठ में धरती को एक बहुत बड़ी गुल्लक क्यों कहा गया है?

उत्तर: धरती को गुल्लक इसलिए कहा गया क्योंकि यह वर्षा के पानी को तालाबों, झीलों और नदियों में जमा करती है, जैसे हम गुल्लक में पैसे जमा करते हैं। यह जमा पानी भूजल भंडार को समृद्ध करता है, जिसे हम बाद में उपयोग कर सकते हैं।

(ख) जल-चक्र की प्रक्रिया कैसे पूरी होती है?
उत्तर: जल-चक्र की प्रक्रिया इस प्रकार पूरी होती है:

  • वाष्पीकरण: सूर्य की गर्मी से पानी समुद्र, झीलों और नदियों से वाष्प के रूप में उड़कर वायुमंडल में जाता है।
  • संघनन: यह वाष्प ठंडी हवा में ऊपर जाकर बादल बनाता है।
  • वृष्टि: बादल से पानी बरसकर पृथ्वी पर वापस आ जाता है, यह बारिश, बर्फ या ओले के रूप में हो सकता है।
  • संचरण: बारिश का पानी जमीन में समा जाता है और भूजल में बदल जाता है।

यह चक्र लगातार चलता रहता है, जिससे जल का संतुलन बनाए रखा जाता है।

(ग) यदि सारी नदियाँ, झीलें और तालाब सूख जाएँ तो क्या होगा?
उत्तर: यदि सारी नदियाँ, झीलें और तालाब सूख जाएँ तो धरती पर भयंकर जल संकट उत्पन्न हो जाएगा। पीने, सिंचाई और उद्योगों के लिए पानी उपलब्ध नहीं होगा। पशु-पक्षी, पेड़-पौधे और मनुष्य सभी प्रभावित होंगे और जीवन संकट में पड़ जाएगा।

(घ) पाठ में पानी को रुपयों से भी कई गुना मूल्यवान क्यों बताया गया है?
उत्तर: पाठ में पानी को रुपयों से भी कई गुना मूल्यवान इसलिए बताया गया है क्योंकि पानी के बिना जीवन असंभव है, जबकि रुपयों से सब कुछ नहीं खरीदा जा सकता।

शीर्षक(क) इस पाठ का शीर्षक ‘पानी रे पानी’ दिया गया है। पाठ का यह नाम क्यों दिया गया होगा? अपने सहपाठियों के साथ चर्चा करके लिखिए। अपने उत्तर का कारण भी लिखिए।
उत्तर: इस पाठ का शीर्षक ‘पानी रे पानी’ इसलिए दिया गया है क्योंकि यह पाठ पानी की महत्ता, उसके संकट, और उसके संरक्षण की आवश्यकता को दर्शाता है। ‘रे’ शब्द एक पुकार की तरह प्रयोग हुआ है, जिससे यह दर्शाया गया है कि इंसान आज पानी के लिए पुकार रहा है। यह शीर्षक पाठ की विषयवस्तु से पूरी तरह मेल खाता है और भावनात्मक प्रभाव भी छोड़ता है।
कारण: यह नाम पाठ के भाव और संदेश को प्रभावी ढंग से प्रकट करता है कि पानी अब दुर्लभ हो गया है और हमें इसके संरक्षण के लिए गंभीरता से प्रयास करना चाहिए।

(ख) आप इस पाठ को क्या नाम देना चाहेंगे? इसका कारण लिखिए।
उत्तर: मैं इस पाठ का नाम ‘जल है तो जीवन है’ दूँगा।
कारण

  • यह नाम पानी के महत्व को स्पष्ट करता है और बताता है कि पानी के बिना जीवन संभव नहीं।  
  • यह लोगों को पानी संरक्षण के लिए प्रेरित करता है।

शब्दों की बातबात पर बल देना

  • “हमारी यह धरती भी इसी तरह की एक गुल्लक है।”  
  • “हमारी यह धरती इसी तरह की एक गुल्लक है।”

(क) इन दोनों वाक्यों को ध्यान से पढ़िए। दूसरे वाक्य में कौन-सा शब्द हटा दिया गया है? उस शब्द को हटा देने से वाक्य के अर्थ में क्या अंतर आया है, पहचान कर लिखिए।
उत्तर: हटाया गया शब्द और अर्थ में अंतर:  

  • दूसरे वाक्य में ‘भी’ शब्द हटा दिया गया है।  

अर्थ में अंतर:  

  • पहला वाक्य (“हमारी यह धरती भी…”) यह दर्शाता है कि धरती के अलावा और भी चीजें गुल्लक की तरह काम करती हैं, और धरती उनमें से एक है। ‘भी’ शब्द तुलना और जोर देता है।  
  • दूसरा वाक्य (“हमारी यह धरती…”) केवल धरती को गुल्लक बताता है, बिना किसी तुलना के, जिससे वाक्य का प्रभाव कम हो जाता है।

(ख) पाठ में ऐसे ही कुछ और शब्द भी आए हैं जो अपनी उपस्थिति से वाक्य में विशेष प्रभाव उत्पन्न करते हैं। पाठ को फिर से पढ़िए और इस तरह के शब्दों वाले वाक्यों को चुनकर लिखिए।
उत्तर: पाठ से प्रभाव पैदा करने वाले शब्दों वाले वाक्यः

1. “पानी आता भी है तो बेवक्त।”

  • “भी” शब्द यहाँ यह दर्शाता है कि पानी की उपस्थिति भी समस्या है, क्योंकि वह सही समय पर नहीं आता।

2. “कुछ दिनों के लिए सब कुछ थम जाता है।”

  • “सब कुछ” शब्द ज़्यादा व्यापक असर दर्शाने के लिए प्रयुक्त हुआ है।

3. “अकाल और बाढ़ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।”

  • “एक ही सिक्के के दो पहलू” एक मुहावरे के रूप में प्रयुक्त होकर अर्थ को प्रभावशाली बनाता है।

4. “पानी को रुपयों से भी कई गुना ज़्यादा मूल्यवान बताया गया है।”

  • “कई गुना ज़्यादा” शब्द यह दिखाते हैं कि पानी का मूल्य केवल आर्थिक दृष्टि से नहीं, जीवन के दृष्टिकोण से बहुत अधिक है।

समानार्थी शब्द

नीचे दिए गए वाक्यों में रेखांकित शब्दों के स्थान पर समान अर्थ देने वाले उपयुक्त शब्द लिखिए। इस कार्य के लिए आप बादल में से शब्द चुन सकते हैं।
(क) सूरज की किरणें पड़ते ही फूल खिल उठे।
(ख) समुद्र का पानी भाप बनकर ऊपर उठ जाता है। 
(ग) अचानक बादल गरजने लगे।?
(घ) जल-चक्र में हवा की भी बहुत बड़ी भूमिका है।
उत्तरः 
(क) सूर्य, भास्कर, दिवाकर, दिनकर
(ख) वाष्प, नीर
(ग) मेघ, जलद, वारिद समीर
(घ) वायु, पवन

उपसर्ग

“देश के कई हिस्सों में तो अकाल जैसे हालात बन जाते हैं”
उपयुक्त वाक्य में ‘अ’ और ‘काल’ शब्द में जुड़कर एक नया अर्थ दिया है। काल का अर्थ है—समय, मृत्यु जब अकाल का अर्थ है—कुसमय, सूखा। कुछ शब्दों में काल के आधार से जुकर उसके अर्थ में परिवर्तन कर देते हैं या कोई विशेषता उत्पन्न कर देते हैं और इस प्रकार नए शब्दों का निर्माण करते हैं। इस तरह के शब्दों को ‘उपसर्ग’ कहते हैं।
आइए, कुछ और उपसर्गों की पहचान करते हैं—

अब आप भी उपसर्ग के प्रयोग से नए शब्द बनाकर उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए—

उत्तरनए शब्दों से बने वाक्य:

  • सुपात्र: ज्ञान सुपात्र को ही देना चाहिए।
  • आपात्र: आपात्र को ज्ञान देने से बचना चाहिए।
  • अज्ञान: ज्ञान अज्ञान को दूर करता है।
  • विज्ञान: विज्ञान हमें प्रकृति के रहस्य समझने में मदद करता है।

पाठ से आगे

आपकी बात​(क) धरती की गुल्लक में जलराशि की कमी न हो इसके लिए आप क्या-क्या प्रयास कर सकते हैं, अपने सहपाठियों के साथ चर्चा करके लिखिए।
उत्तर: धरती की गुल्लक में जलराशि की कमी न हो इसके लिए प्रयास:  

  • वर्षा जल संग्रहण प्रणाली को घरों और स्कूलों में लगाना।  
  • तालाबों और झीलों को साफ रखना और कचरा न फेंकना।  
  • पेड़-पौधे लगाना ताकि भूजल रिसाव बढ़े।  
  • पानी का कम उपयोग करना, जैसे नहाते समय बाल्टी का उपयोग करना।  
  • लोगों को पानी बचाने के लिए जागरूक करना।

(ख) इस पाठ में एक छोटे से खंड में जल-चक्र की प्रक्रिया को प्रस्तुत किया गया है। उस खंड की पहचान करें और जल-चक्र को चित्र के माध्यम से प्रस्तुत करें।
उत्तर: इस पाठ में जल-चक्र की प्रक्रिया इस खंड में दी गई है: “पानी सूरज की गरमी से वाष्प बनकर ऊपर उठता है… और वर्षा के रूप में वापस धरती पर आता है।”
[सूरज] [समुद्र से भाप बनना] [बादल बनना] [नदियाँ, तालाब, झीलें] [वर्षा होना] [भूजल भंडार] [समुद्र में वापस]
जल-चक्र का चित्र



(ग) अपने द्वारा बनाए गए जल-चक्र के चित्र का विवरण प्रस्तुत कीजिए।  
उत्तर: जल-चक्र के चित्र का विवरण:

  • वाष्पीकरण (Evaporation): सूर्य की गर्मी से नदियों, तालाबों और समुद्रों का पानी भाप बनकर ऊपर उठता है।
  • संघनन (Condensation): भाप ठंडी होकर बादलों में बदल जाती है।
  • वर्षा (Precipitation): बादल भारी होकर वर्षा के रूप में जल को वापस धरती पर गिराते हैं।
  • संचयन और बहाव (Collection and Run-off): वर्षा का जल नदियों, झीलों और समुद्रों में जाकर एकत्र होता है और जल-चक्र फिर से शुरू हो जाता है।

सृजन

(क) कल्पना कीजिए कि किसी दिन आपके घर में पानी नहीं आया। आपके विद्यालय जाना है। आपके घर में सभी को एक सार्वजनिक नल से अपनी बाल्टी अथवा लोटे वहाँ पहुँचते हैं और ठीक उसी समय आपके पड़ोसी भी पानी लेने पहुँच जाते हैं। अब दोनों ही अपनी-अपनी बाल्टी पहले भरना चाहते हैं। ऐसी परिस्थिति में आपसे में किसी प्रकार का विवाद (तु-तु मैं-मैं) न हो, यह ध्यान में रखते हुए पाँच संदेश वाक्य (स्लोगन) तैयार कीजिए।
उत्तर: पाँच संदेश वाक्य (स्लोगन):  

  1. “पानी है अनमोल, बारी-बारी से लो।”  
  2. “सबको मिले पानी, न करो तू-तू मैं-मैं।”  
  3. “पानी बचाओ, प्यार से बाँटो।”  
  4. “जल है जीवन, मिलकर करें सम्मान।”  
  5. “एकजुट होकर पानी लें, विवाद नहीं करें।

इन स्लोगनों से हम सबको यह सीखने को मिलता है कि थोड़ा धैर्य, सहयोग और समझदारी से किसी भी परिस्थिति को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाया जा सकता है।

(ख) “सूरज, समुद्र, बादल, हवा, धरती, फिर बरसात की बूँद और फिर बहती हुई एक नदी और उसके किनार वसता तुम्हारा, हमारा घर, गाँव या शहर!”
इस वाक्य को पढ़कर आपके सामने कोई एक चित्र उभर आया होगा, उस चित्र को बनाकर उसमें रंग भरिए।

उत्तर: 

पानी रे पानी

नीचे हम सबके दिनचर्या से जुड़ी कुछ गतिविधियों के चित्र हैं। इन चित्रों पर बातचीत कीजिए जो धरती पर पानी के संकट को कम करने में सहायक हैं और उन चित्रों पर भी बात करें जो पानी की गुल्लक को जल्दी खाली कर रहे हैं।

उत्तरपानी के संकट को कम करने वाली गतिविधियाँ:  

  • वर्षा जल संग्रहण टैंक में पानी जमा करना।  
  • तालाबों की सफाई और रखरखाव।  
  • पेड़ लगाना, जो भूजल रिसाव को बढ़ाता है।  
  • कम पानी से नहाना और बर्तन धोना।

पानी की गुल्लक को खाली करने वाली गतिविधियाँ:  

  • नल को खुला छोड़ना।  
  • तालाबों में कचरा फेंकना।  
  • अनावश्यक रूप से मोटर पंप का उपयोग करना।  
  • जंगल काटना, जिससे भूजल रिसाव कम हो।

सबका पानी

सभी को अपनी आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त पानी कैसे मिले’ इस विषय पर एक परिचर्चा का आयोजन करें। परिचर्चा के मुख्य बिंदुओं को आधार बनाते हुए रिपोर्ट तैयार करें।  
उत्तरपरिचर्चा की रिपोर्ट
विषय: सभी को अपनी आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त पानी कैसे मिले
स्थानः कक्षा-7
तिथि: XX मई 2025
आयोजकः विज्ञान एवं पर्यावरण क्लब
मुख्य बिंदु:  

  1. वर्षा जल संग्रहण: हर घर और स्कूल में वर्षा जल संग्रहण प्रणाली लगाई जाए।  
  2. जल स्रोतों की रक्षा: तालाबों, नदियों और झीलों को कचरे से बचाना और उनकी सफाई करना।  
  3. पानी का समान वितरण: सार्वजनिक नलों पर पानी बारी-बारी से लिया जाए, ताकि सभी को मिले।  
  4. जागरूकता: लोगों को पानी बचाने के लिए जागरूक करना, जैसे कम पानी से काम करना।  
  5. सरकारी प्रयास: स्थानीय प्रशासन द्वारा भूजल स्तर बढ़ाने के लिए योजनाएँ शुरू करना।

निष्कर्ष: सभी को पानी मिले, इसके लिए सामूहिक प्रयास, जागरूकता और जल प्रबंधन जरूरी है।  

दैनिक कार्य में पानी(क) क्या आपने कभी यह जानने का प्रयास किया है कि आपके घर में एक दिन में औसतन कितना पानी खर्च होता है? अपने घर में पानी के उपयोग से जुड़ी एक तालिका बनाइए। इस तालिका के आधार पर पता लगाइए –

  • घर के कार्यों में एक दिन में लगभग कितना पानी खर्च होता है? (बालटी, घड़े या किसी अन्य बर्तन को मापक बना सकते हैं)
  • आपके माँ और पिता या घर के अन्य सदस्य पानी बचाने के लिए क्या-क्या उपाय करते हैं?

उत्तर: हाँ, मैंने यह जानने की कोशिश की है कि मेरे घर में एक दिन में औसतन कितना पानी खर्च होता है। नीचे एक तालिका दी गई है:

पानी बचाने के उपाय:  

  • मेरी माँ बर्तन धोते समय नल को बंद रखती हैं।
  • पिताजी गाड़ी धोने में बाल्टी का उपयोग करते हैं, पाइप नहीं।
  • मैं पौधों को नहाने के बाद बचे पानी से सींचता हूँ।

(ख) क्या पानी का उपयोग अनावश्यक रूप से किया जा रहा है? यदि हाँ, तो कहाँ और कैसे?
उत्तर: हाँ, हमारे घर में पानी नियमित रूप से आता है। नगर निगम की ओर से सुबह के समय नल में पानी आता है, लेकिन कभी-कभी गर्मियों में पानी की कमी हो जाती है।

(ग) आपके घर में दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए पानी का संचयन कैसे और किन पात्रों में किया जाता है?
जन-सुविधा के रूप में जल
नीचे दिए गए चित्रों को ध्यान से देखिए-

इन चित्रों के आधार पर जल आपूर्ति की स्थिति के बारे में अपने साथियों से चर्चा कीजिए और उसका विवरण लिखिए।
उत्तर: हमारे घर में पानी का संग्रह बाल्टी, टंकी और मटकों में किया जाता है। टंकी की मदद से ऊपरी मंजिल पर भी पानी पहुँचता है।
जल आपूर्ति की स्थिति (चित्रों के आधार पर विवरण):

  • इन चित्रों से स्पष्ट होता है कि बहुत सारे लोग पानी की कमी से जूझ रहे हैं। कहीं लोग टैंकर से पानी भर रहे हैं, कहीं नदी या पोखर से, तो कहीं जल रेल द्वारा पानी पहुँचाया जा रहा है। यह स्थिति बताती है कि जल संकट बहुत गंभीर है और सब जगह पर्याप्त जल आपूर्ति नहीं हो पा रही है।
  • हमें जल बचाने की आदत डालनी चाहिए और जल संरक्षण के उपाय अपनाने चाहिए, जैसे वर्षा जल संचयन, टपक सिंचाई, और रिसाव रोकना।

बिन पानी सब सून(क) पाठ में मूल स्तर से कम होने के कुछ कारण बताए गए हैं, जैसे— तालाबों में कचरा फेंककर भरना आदि। मूल स्तर कम होने के और क्या-क्या कारण हो सकते हैं? पता लगाइए और कक्षा में प्रस्तुत कीजिए। (इशारे लिए आप अपने सहपाठियों, शिक्षक और घर के सदस्यों की सहायता भी ले सकते हैं)
उत्तर: भूजल स्तर कम होने के अन्य कारण:  

  • जंगलों की कटाई, जिससे वर्षा कम होती है।  
  • अधिक खेती के लिए भूजल का अत्यधिक उपयोग।  
  • फैक्ट्रियों द्वारा पानी का दुरुपयोग।  
  • सीमेंट की सड़कों और इमारतों से पानी का रिसाव कम होना।

(ख) भूजल स्तर की कमी से हमें आजकल किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है?
उत्तर: कठिनाइयाँ:  

  • नलों में पानी की कमी, जिससे लोग रात को या सुबह जल्दी पानी भरते हैं।  
  • खेती के लिए पानी न मिलना, जिससे फसलें बर्बाद होती हैं।  
  • गर्मियों में सूखा और पानी के लिए लंबी लाइनें।  
  • पीने के पानी की कमी, जिससे स्वास्थ्य समस्याएँ बढ़ती हैं।

(ग) आपके विद्यालय, गाँव या शहर के स्थानीय प्रशासन द्वारा भूजल स्तर बढ़ाने के लिए क्या-क्या प्रयास किए जा रहे हैं, पता लगाकर लिखिए।  
उत्तर: प्रशासन के प्रयास:  

  • वर्षा जल संग्रहण के लिए स्कूलों और सरकारी भवनों में टैंक बनाए जा रहे हैं।  
  • तालाबों की सफाई और गहरा करने की योजनाएँ।  
  • पेड़ लगाने के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं।  
  • भूजल उपयोग पर नियम बनाए गए हैं, जैसे अधिक गहरे बोरवेल पर रोक।

यह भी जानें

वर्षा-जल संग्रहण
वर्षा के जल को एकत्र करना और उसका भंडारण करके बाद में प्रयोग करना जल की उपलब्धता में वृद्धि करने का एक उपाय है। इस उपाय द्वारा वर्षा का जल एकत्र करने को ‘वर्षा जल संग्रहण’ कहते हैं। वर्षा जल संग्रहण का मूल उद्देश्य यही है कि “जल जहाँ गिरे वहीं एकत्र कीजिए।” वर्षा जल संग्रहण की एक तकनीक इस प्रकार है-
छत के ऊपर वर्षा-जल संग्रहण
इस प्रणाली में भवनों की छत पर एकत्रित वर्षा जल को पाइप द्वारा भंडारण टंकी में पहुँचाया जाता है। इस जल में छत पर उपस्थित मिट्टी के कण मिल जाते हैं। अतः इसका उपयोग करने से पहले इसे स्वच्छ करना आवश्यक होता है।
अपने घर या विद्यालय के आस-पास, मुहल्ले या गाँव में पता लगाइए कि वर्षा जल संग्रहण की कोई विधि अपनाई जा रही है या नहीं? यदि हाँ, तो कौन-सी विधि है? उसके विषय में लिखिए। यदि नहीं, तो अपने शिक्षक या परिजनों की सहायता से इस विषय में समाचार पत्र के संपादक को एक पत्र लिखिए।

उत्तर:  वर्षा जल संग्रहण पर उत्तर / पत्र का उदाहरण
मेरे गाँव/मुहल्ले/विद्यालय में वर्षा जल संग्रहण की एक विधि अपनाई जा रही है। हमारे यहाँ छतों पर वर्षा जल संग्रहण की व्यवस्था है। छत पर गिरे हुए पानी को पाइप के माध्यम से एक टंकी में एकत्र किया जाता है। इस पानी को उपयोग करने से पहले साफ़ किया जाता है ताकि इसमें छत की मिट्टी और गंदगी न रहे। इससे जल की बचत होती है और सूखे के समय पानी की उपलब्धता बनी रहती है।
यदि आपके गाँव/मुहल्ले में ऐसी व्यवस्था नहीं है, तो आप इस प्रकार का पत्र भी लिख सकते हैं:
समाचार पत्र के संपादक को पत्र (वर्षा जल संग्रहण के लिए)
प्रति,
संपादक महोदय,
[समाचार पत्र का नाम]
[स्थान]
विषय: वर्षा जल संग्रहण की आवश्यकता

महोदय,
वर्तमान समय में जल संकट एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। हमारे गाँव/मुहल्ले/विद्यालय में वर्षा जल संग्रहण की कोई व्यवस्था नहीं है। यदि हम वर्षा के जल को इकट्ठा करके सही तरीके से संग्रहीत करें, तो जल की उपलब्धता बढ़ाई जा सकती है और सूखे के समय इसका लाभ उठाया जा सकता है। मैं आपसे निवेदन करता हूँ कि इस विषय पर जागरूकता बढ़ाने के लिए समाचार पत्र में लेख प्रकाशित करें ताकि अधिक से अधिक लोग वर्षा जल संग्रहण के महत्व को समझें और इसे अपनाएँ।

धन्यवाद,
आपका विश्वासी,
[आपका नाम]
[स्थान]
[दिनांक]

आज की पहेली

जल के प्राकृतिक स्रोत हैं— वर्षा, नदी, झील और तालाब। दिए गए वर्ग में जल और इन प्राकृतिक स्रोतों के समानार्थी शब्द ढूँढिए और लिखिए।

उत्तर:  

  • वर्षा: बारिश, मेह
  • नदी: प्रवाहिनी, तटिनी, तरंगिणी
  • झील /तालाबा: जलाशय, सर, ताल, सरोवर
  • जल: नीर, अंबु, वारि, सलिल

खोजबीन के लिए

पानी से संबंधित गीत या कविताओं का संकलन कीजिए और इनमें से कुछ को अपनी कक्षा में प्रस्तुत कीजिए। इसके लिए आप अपने परिजनों एवं शिक्षक अथवा पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता भी ले सकते हैं।
उत्तर
1. कविता: “पानी अमूल्य धन है”
लेखक: अज्ञात
पानी-पानी हर कोई पुकारे,
बिन पानी सब सूना है प्यारे।
बूँद-बूँद का मोल समझो,
पानी को यूँ मत बहाओ।
खेतों में जब न पानी होगा,
भूखा पेट फिर कैसे रोज़ा।
नहाना, धोना सब ठीक है,
पर जल बचाना और भी ठीक है।

2. कविता: “बचाओ-बचाओ पानी”
लेखक: कक्षा उपयोग के लिए सरल कविता
बूँद-बूँद है अनमोल,
इसे ना करो यूँ गोलमाल।
नल खुले ना छोड़ो कभी,
बरबादी की ना हो वजह अभी।
जल ही जीवन का है नाम,
इसे बचाना है काम तमाम।

3. कविता: “जल बचाओ, जीवन बचाओ”
लेखक: अज्ञात
जीवन है पानी से प्यारा,
इसका ना हो जाए किनारा।
पानी बचाकर रखो सदा,
ताकि रहे ये सबका भला।

साझी समझप्रश्न: ‘पानी रे पानी’ और ‘पाल के किनारे रखा इतिहास’ में आपको कौन-कौन सी बातें समान लगीं? उनके विषय में अपने सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए।  
उत्तरसमान बातें:  

  1. पानी की महत्ता: दोनों लेख पानी को जीवन का आधार बताते हैं। ‘पानी रे पानी’ में पानी को रुपये से अधिक कीमती कहा गया, और ‘पाल के किनारे…’ में तालाब बनाना अच्छा काम बताया गया।  
  2. तालाबों का महत्व: दोनों में तालाबों को धरती की गुल्लक के रूप में देखा गया, जो पानी जमा करते हैं।  
  3. समाज के लिए योगदान: ‘पानी रे पानी’ में जल संरक्षण और ‘पाल के किनारे…’ में तालाब बनाना समाज के लिए लाभकारी बताया गया।  
  4. प्रकृति और मानव का संबंध: दोनों लेख प्रकृति (पानी, तालाब) और मानव जीवन के बीच गहरा संबंध दर्शाते हैं।

चर्चा: दोनों लेख हमें पानी और तालाबों की रक्षा करने की प्रेरणा देते हैं, ताकि भविष्य में पानी की कमी न हो। 

03. फूल और काँटा अध्याय समाधान 

पाठ से
मेरी समझ से(क) कविता के आधार पर नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उनके सामने तारा (*) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
(1) कविता में काँटे के बारे में कौन-सा वाक्य सत्य है?

  • काँटा अपने आस-पास की सुगंध को नष्ट करता है।
  • काँटा तितलियों और भौंरों को आकर्षित करता है।
  • काँटा उँगलियों को छेदता है और वस्त्र फाड़ देता है। (*)
  • काँटा पौधे को हानि पहुँचाता है।

उत्तर: काँटा उँगलियों को छेदता है और वस्त्र फाड़ देता है।
विश्लेषण: कविता में काँटे को नकारात्मक रूप में दिखाया गया है, जो उँगलियों को छेदता है (“छेद कर काँटा किसी की उँगलियाँ”) और कपड़े फाड़ देता है (“फाड़ देता है किसी का वर बसन”)। अन्य विकल्प कविता के आधार पर सही नहीं हैं, क्योंकि काँटा सुगंध नष्ट नहीं करता, तितलियों-भौंरों को आकर्षित नहीं करता, और पौधे को हानि नहीं पहुँचाता।

(2) कविता में फूल और काँटे में समानताओं और विभिन्नताओं का उल्लेख किया गया है। निम्नलिखित में से कौन-सा वाक्य इन्हें सही रूप में व्यक्त करता है?

  • फूल सुंदरता का प्रतीक है और काँटा कठोरता का। (*)
  • फूल और काँटे के बारे में लोगों के विचार समान होते हैं।
  • फूल और काँटे एक ही पौधे पर उगते हैं, लेकिन उनके स्वभाव भिन्न होते हैं। (*)
  • फूल और काँटे को समान देखभाल मिलती है फिर भी उनके रंग-ढंग अलग होते हैं। (*)

उत्तर: फूल सुंदरता का प्रतीक है और काँटा कठोरता का।
फूल और काँटे एक ही पौधे पर उगते हैं, लेकिन उनके स्वभाव भिन्न होते हैं।
फूल और काँटे को समान देखभाल मिलती है फिर भी उनके रंग-ढंग अलग होते हैं।
विश्लेषण: कविता में फूल को सुंदर, कोमल और आनंददायक दिखाया गया है, जबकि काँटा कठोर और पीड़ादायक है। दोनों एक ही पौधे पर उगते हैं (“हैं जनम लेते जगह में एक ही”) और उन्हें समान देखभाल मिलती है (“मेह उन पर है बरसता एक सा”), लेकिन उनके स्वभाव और प्रभाव अलग हैं। इसलिए तीन विकल्प सही हैं। दूसरा विकल्प गलत है, क्योंकि लोगों के विचार फूल और काँटे के लिए समान नहीं हैं।

(3) कविता के आधार पर कौन-सा निष्कर्ष उपयुक्त है

  • व्यक्ति का कुल ही उसके सम्मान का आधार होता है।
  • व्यक्ति के कार्यों के कारण ही लोग उसका सम्मान करते हैं। (*)
  • कुल की प्रतिष्ठा हमेशा व्यक्ति के गुणों से बड़ी होती है।
  • यदि व्यक्ति अच्छे कार्य करता है तो उसके कुल को प्रसिद्धि मिलती है। (*)

उत्तर: व्यक्ति के कार्यों के कारण ही लोग उसका सम्मान करते हैं।
यदि व्यक्ति अच्छे कार्य करता है तो उसके कुल को प्रसिद्धि मिलती है।
विश्लेषण: कविता कहती है कि व्यक्ति का बड़प्पन उसके गुणों और कार्यों से तय होता है, न कि केवल कुल से (“किस तरह कुल की बड़ाई काम दे, जो किसी में हो बड़प्पन की कसर”)। फूल जैसे अच्छे कार्य करने वाले व्यक्ति को सम्मान मिलता है, जिससे उसके कुल को भी प्रसिद्धि मिलती है। इसलिए दो विकल्प सही हैं।

(4) कविता के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सा कथन ‘बड़प्पन’ के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है?

  • धन-दौलत और ताकत से व्यक्ति के बड़प्पन का पता चलता है।
  • कुल के बड़प्पन की प्रशंसा व्यक्ति की कमियों को ढक देती है।
  • बड़प्पन व्यक्ति के गुणों, स्वभाव और कर्मों से पहचाना जाता है। (*)
  • कुल का नाम व्यक्ति में बड़प्पन की पहचान का मुख्य आधार है।

उत्तर: बड़प्पन व्यक्ति के गुणों, स्वभाव और कर्मों से पहचाना जाता है। 
विश्लेषण: कविता में बड़प्पन को व्यक्ति के गुणों, स्वभाव, और कर्मों से जोड़ा गया है (“किस तरह कुल की बड़ाई काम दे, जो किसी में हो बड़प्पन की कसर”)। फूल जैसे गुणों वाला व्यक्ति सम्मान पाता है, जबकि काँटे जैसे स्वभाव वाला नहीं। इसलिए तीसरा विकल्प सही है।

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग या एक से अधिक उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुनें?
उत्तर: मैंने उपरोक्त उत्तर इसलिए चुने क्योंकि कविता में फूल और काँटे को प्रतीक के रूप में इस्तेमाल करके लोगों के स्वभाव और कर्मों के अंतर को दिखाया गया है। काँटे का उँगलियाँ छेदना और कपड़े फाड़ना इसकी कठोरता को दर्शाता है, जबकि फूल की सुगंध और रंग सुंदरता और आनंद का प्रतीक हैं। दोनों को एक ही पौधे पर समान देखभाल मिलती है, फिर भी उनके गुण अलग हैं। बड़प्पन के लिए कविता में गुणों और कर्मों को महत्व दिया गया है, न कि कुल या धन को। मेरे मित्रों के साथ चर्चा में मैं यह समझाऊँगा कि कविता का मुख्य संदेश व्यक्ति के कार्यों और स्वभाव से उसकी पहचान बनती है।

पंक्तियों पर चर्चानीचे दी गई पंक्तियों का अर्थ और विचार:
(क) “मेह उन पर है बरसता एक सा, 
एक सी उन पर हवायें हैं बही। 
पर सदा ही यह दिखाता है हमें, 
ढंग उनके एक से होते नहीं।”
उत्तर: अर्थ: इस पंक्ति में कहा गया है कि फूल और काँटे दोनों को एक जैसी बारिश (मेह) और हवा मिलती है, लेकिन फिर भी उनके स्वभाव और गुण अलग-अलग होते हैं।
विचार: यह पंक्ति हमें सिखाती है कि परिस्थितियाँ सबके लिए एक जैसी हो सकती हैं, लेकिन हर व्यक्ति का स्वभाव और व्यवहार उसकी अपनी खासियत के कारण अलग होता है। जैसे, एक ही परिवार के बच्चे एक जैसी परवरिश पाते हैं, फिर भी उनके गुण भिन्न हो सकते हैं।

(ख) “किस तरह कुल की बड़ाई काम दे, 
जो किसी में हो बड़प्पन की कसर।”
उत्तर: अर्थ: इस पंक्ति का मतलब है कि अगर किसी व्यक्ति में बड़प्पन (अच्छे गुण, स्वभाव, और कर्म) की कमी है, तो उसके कुल (परिवार) की प्रतिष्ठा या बड़ा नाम उसके लिए कोई काम नहीं आता।
विचार: यह पंक्ति मुझे प्रेरित करती है कि हमें अपने गुणों और कर्मों से अपनी पहचान बनानी चाहिए। कुल का नाम तभी सम्मान दिलाता है, जब हम स्वयं अच्छे कार्य करें।

मिलकर करें मिलानइस कविता में ‘फूल’ और ‘काँटा’ के उदाहरण द्वारा लोगों के स्वभावों के अंतर और समानताओं की ओर संकेत किया गया है। फूल और काँटा किस-किस के प्रतीक हो सकते हैं। इन्हें उपयुक्त प्रतीकों से जोड़िए:

उत्तर: 

विश्लेषण:  

  • फूल: फूल सुंदरता, कोमलता, सुगंध, और आनंद का प्रतीक है। यह दया, अच्छाई, सुख, परोपकार, प्रेम, और प्रसन्नता जैसे सकारात्मक गुणों को दर्शाता है।  
  • काँटा: काँटा कठोरता, पीड़ा, और नुकसान का प्रतीक है। यह स्वार्थ, बुराई, दुख, और कठोरता जैसे नकारात्मक गुणों को दर्शाता है।

सोच-विचार के लिए(क) कविता में ऐसी कौन-कौन सी समानताओं का उल्लेख किया गया है जो सभी पौधों पर समान रूप से लागू होती हैं?
उत्तर: कविता में फूल और काँटे के लिए निम्नलिखित समानताएँ बताई गई हैं:  

  • दोनों एक ही जगह पर जन्म लेते हैं (“हैं जनम लेते जगह में एक ही”)।  
  • दोनों को एक ही पौधा पालता है (“एक ही पौधा उन्हें है पालता”)।  
  • दोनों पर एक जैसी चाँदनी बरसती है (“रात में उन पर चमकता चाँद भी, एक ही सी चाँदनी है डालता”)।  
  • दोनों पर एक जैसी बारिश होती है (“मेह उन पर है बरसता एक सा”)।  
  • दोनों को एक जैसी हवाएँ मिलती हैं (“एक सी उन पर हवायें हैं बही”)।

(ख) आपको फूल और काँटे के स्वभाव में मुख्य रूप से कौन-सा अंतर दिखाई दिया?
उत्तर: फूल और काँटे के स्वभाव में मुख्य अंतर:  

  • फूल: फूल सुंदर, कोमल, और आनंददायक है। यह तितलियों को गोद में लेता है, भौंरों को रस पिलाता है, और अपनी सुगंध व रंगों से कली को खिलाता है (“फूल लेकर तितलियों को गोद में, भौंर को अपना अनूठा रस पिला”)। यह सकारात्मकता और प्रेम का प्रतीक है।  
  • काँटा: काँटा कठोर और पीड़ादायक है। यह उँगलियों को छेदता है और कपड़े फाड़ता है (“छेद कर काँटा किसी की उँगलियाँ, फाड़ देता है किसी का वर बसन”)। यह नकारात्मकता और कठोरता का प्रतीक है।

(ग) कविता में मुख्य रूप से कौन-सी बात कही गई है? उसे पहचानिए, समझिए और अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तरमुख्य बात: कविता में फूल और काँटे के माध्यम से यह बताया गया है कि एक ही परिस्थिति में पलने वाले लोग या चीजें अपने स्वभाव और कर्मों के कारण अलग-अलग हो सकते हैं। व्यक्ति का बड़प्पन उसके गुणों, स्वभाव, और कार्यों से तय होता है, न कि केवल उसके कुल या परिस्थितियों से।
अपने शब्दों में: कविता कहती है कि फूल और काँटा एक ही पौधे पर उगते हैं और उन्हें एक जैसी देखभाल मिलती है, लेकिन फूल अपनी सुंदरता और सुगंध से सबको खुशी देता है, जबकि काँटा दुख देता है। इसी तरह, लोग चाहे एक ही परिवार या परिस्थिति से हों, उनके अच्छे या बुरे कर्म ही उनकी पहचान बनाते हैं।

(घ) “किस तरह कुल की बड़ाई काम दे, जो किसी में हो बड़प्पन की कसर।” उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तरअर्थ: इस पंक्ति का मतलब है कि अगर किसी व्यक्ति में अच्छे गुण, स्वभाव, या कर्मों की कमी है, तो उसके परिवार या कुल का बड़ा नाम उसके लिए बेकार है।
उदाहरण: मान लीजिए एक अमीर और प्रसिद्ध परिवार का लड़का है। उसके परिवार का नाम बहुत बड़ा है, लेकिन वह झूठ बोलता है, दूसरों को धोखा देता है, और बुरा व्यवहार करता है। लोग उसका सम्मान नहीं करेंगे, क्योंकि उसमें बड़प्पन (अच्छे गुण) की कमी है। वहीं, एक साधारण परिवार का लड़का अगर ईमानदार, मेहनती, और दयालु है, तो लोग उसकी प्रशंसा करेंगे, भले ही उसका कुल प्रसिद्ध न हो।

(ङ) “है खटकता एक सब की आँख में, दूसरा है सोहता सूर शीश पर।” लोग कैसे स्वभाव के व्यक्तियों की प्रशंसा करते हैं और कैसे स्वभाव वाले व्यक्तियों से दूर रहना पसंद करते हैं?
उत्तर: इस पंक्ति में कहा गया है कि एक (काँटा) सबकी आँखों में खटकता है, यानी नापसंद किया जाता है, जबकि दूसरा (फूल) सिर पर सुशोभित होता है, यानी उसकी प्रशंसा होती है।  

  • प्रशंसा वाले व्यक्ति: लोग उन व्यक्तियों की प्रशंसा करते हैं जो फूल जैसे स्वभाव वाले होते हैं, यानी दयालु, कोमल, सुंदर व्यवहार करने वाले, और दूसरों को सुख देने वाले। उदाहरण के लिए, जो लोग दूसरों की मदद करते हैं, सच बोलते हैं, और प्यार से बात करते हैं, उनकी प्रशंसा होती है।  
  • दूर रहने वाले व्यक्ति: लोग उन व्यक्तियों से दूर रहना पसंद करते हैं जो काँटे जैसे स्वभाव वाले होते हैं, यानी कठोर, दूसरों को चोट पहुँचाने वाले, और बुरा व्यवहार करने वाले। उदाहरण के लिए, जो लोग झगड़ालू, स्वार्थी, या दूसरों को दुख देते हैं, उनसे लोग दूरी बनाते हैं।

अनुमान और कल्पना से(क) कल्पना कीजिए कि चाँदनी, हवा और मेघ केवल एक पौधे पर बरसते हैं। बाकी पौधे इन सबके बिना कैसे दिखेंगे और उनके जीवन पर इसका क्या प्रभाव होगा?
उत्तर: अगर हम कल्पना करें कि चाँदनी, हवा और मेघ (बारिश) केवल एक ही पौधे पर बरसते हैं और बाकी पौधों को ये सब नहीं मिलते, तो बाकी पौधे बहुत दुखी और कमज़ोर हो जाएंगे। उनके जीवन पर यह प्रभाव पड़ेगा:

  • बिना चाँदनी के: रात में वे अंधेरे में रहेंगे, जिससे उनका विकास प्रभावित होगा।
  • बिना हवा के: उन्हें ताज़ी हवा नहीं मिलेगी, जिससे वे साँस नहीं ले पाएँगे और मुरझा सकते हैं।
  • बिना पानी के: बारिश न मिलने से वे सूख जाएँगे और धीरे-धीरे मरने लगेंगे।

दिखावट में: वे पौधे पीले, मुरझाए हुए और निर्जीव दिखेंगे। उनके पत्ते सूखने लगेंगे और वे बढ़ नहीं पाएँगे।
प्रभाव: यह दिखाता है कि जैसे हर पौधे को जीने के लिए बराबर हवा, पानी और रोशनी की ज़रूरत होती है, वैसे ही हर इंसान को भी समान अवसर और प्यार मिलना चाहिए, तभी समाज सुंदर और स्वस्थ बन सकता है।
सीख: प्रकृति सबको समान रूप से देती है। अगर यह बराबरी न हो, तो जीवन अधूरा और दुखद हो जाता है।

(ख) यदि सभी पौधे एक जैसे होते तो दुनिया कैसी लगती?
उत्तरस्वरूप: अगर सभी पौधे एक जैसे होते, तो दुनिया में विविधता नहीं होती। हर जगह एक ही तरह के पौधे, फूल, और काँटे दिखते, जिससे प्रकृति एकरूप और बोरिंग लगती।  
प्रभाव:  

  • फूलों की सुंदरता और विविध रंगों का आनंद खत्म हो जाता।  
  • काँटों की कमी से पौधों की सुरक्षा कम हो सकती थी, क्योंकि काँटे जानवरों से रक्षा करते हैं।  
  • कीटों और पक्षियों को विभिन्न प्रकार के फूलों का रस और पराग नहीं मिलता, जिससे उनकी प्रजातियाँ प्रभावित होतीं।  
  • मानव जीवन भी प्रभावित होता, क्योंकि हम विभिन्न फूलों से इत्र, दवाइयाँ, और सजावट की चीजें बनाते हैं।

नैतिक दृष्टि: यह इंसानों की तरह है—अगर सभी लोग एक जैसे होते, तो जीवन में कोई नयापन या सीखने का अवसर नहीं होता।

(ग) यदि काँटे न होते और हर पौधा केवल फूलों से भरा होता तो क्या होता?
उत्तर: यदि काँटे न होते और हर पौधा केवल फूलों से भरा होता, तो देखने में दुनिया बहुत सुंदर और खुशबूदार लगती। चारों ओर रंग-बिरंगे फूल होते, जिनसे वातावरण मनमोहक हो जाता।
लेकिन इसके कुछ प्रभाव और बातें भी होतीं:

  • सौंदर्य तो होता, पर सुरक्षा नहीं होती: काँटे पौधों की रक्षा करते हैं। यदि काँटे न होते, तो जानवर और इंसान आसानी से फूलों को तोड़ लेते, जिससे पौधों का नुकसान होता।
  • प्राकृतिक संतुलन बिगड़ जाता: काँटे भी प्रकृति का हिस्सा हैं और कुछ जीव-जंतु उनसे अपना बचाव करते हैं या उनके साथ रहने के अभ्यस्त हैं।
  • सिर्फ फूल होने से मूल्य कम हो सकता था: जब कोई चीज़ बहुत ज़्यादा हो जाती है, तो उसकी अहमियत घट जाती है।
  • सिर्फ कोमलता जीवन में पर्याप्त नहीं होती: काँटे यह सिखाते हैं कि जीवन में केवल सुंदरता नहीं, बल्कि थोड़ी कठिनाई भी ज़रूरी है ताकि हम सावधान और संतुलित रह सकें।

(घ) कल्पना कीजिए कि एक तितली काँटे से मित्रता करना चाहती है, उनके बीच कैसा संवाद होगा?
उत्तरसंवाद रूप में:
तितली: नमस्ते, काँटे भाई! मैं तुमसे दोस्ती करना चाहती हूँ। तुम इतने मजबूत और नुकीले हो, मुझे तुम्हारा अंदाज पसंद है।
काँटा: अरे तितली, तुम तो फूलों की दोस्त हो! मेरे जैसे कठोर काँटे से दोस्ती करके क्या करोगी? मैं तो अपनी जगह पर खड़ा होकर बस रक्षा करता हूँ, पर लोग मुझे चुभने वाला समझते हैं।
तितलीनहीं-नहीं, तुम गलत समझ रहे हो। तुम पौधे की रक्षा करते हो, और यह बहुत बड़ा काम है। मैं फूलों से रस लेती हूँ, लेकिन तुम्हारी वजह से फूल सुरक्षित रहते हैं।
काँटा: हम्म, यह तो सही है। मैं फूलों को जानवरों से बचाता हूँ। लेकिन लोग मुझे पसंद नहीं करते, क्योंकि मैं चुभ जाता हूँ।
तितलीलोग फूलों को भी तोड़ लेते हैं, फिर भी हम उनकी परवाह नहीं करते। चलो, हम दोस्त बनें और साथ मिलकर पौधे को और खूबसूरत बनाएँ।
काँटा: ठीक है, तितली! मैं तुम्हारा साथ दूँगा। तुम अपनी रंग-बिरंगी पंखों से सुंदरता बढ़ाओ, और मैं सुरक्षा दूँगा।  
विश्लेषण: यह संवाद दिखाता है कि फूल और काँटा, भले ही अलग स्वभाव के हों, एक-दूसरे के पूरक हैं और साथ मिलकर प्रकृति को बेहतर बनाते हैं।

(ङ) कल्पना कीजिए कि आपको किसी काँटे, फूल या दोनों के गुणों के साथ जीवन जीने का अवसर मिलता है। आप किसके गुणों को अपनाना चाहेंगे? कारण सहित बताइए।
उत्तर: मैं दोनों के गुण (फूल और काँटे) अपनाना चाहूँगा।
कारण:  

  • फूल के गुण: फूल की तरह मैं दयालु, कोमल, और सकारात्मक बनना चाहूँगा। फूल की सुगंध और रंगों की तरह मैं अपने व्यवहार से दूसरों को खुशी देना चाहूँगा। इससे मेरे दोस्त और परिवार के साथ मेरे रिश्ते बेहतर होंगे।  
  • काँटे के गुण: काँटे की तरह मैं मजबूत और सावधान बनना चाहूँगा। काँटा अपने पौधे की रक्षा करता है; वैसे ही मैं अपने परिवार, दोस्तों, और अपने सिद्धांतों की रक्षा करना चाहूँगा। यह मुझे कठिन परिस्थितियों में दृढ़ रहने में मदद करेगा।  
  • दोनों का संतुलन: जीवन में सुख और चुनौतियाँ दोनों आती हैं। फूल के गुण मुझे सुख में दूसरों के साथ आनंद बाँटने में मदद करेंगे, और काँटे के गुण मुझे मुश्किलों का सामना करने की ताकत देंगे।

शब्द से जुड़े शब्द

नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में ‘बड़प्पन’ से जुड़े शब्द:

उत्तर:
बड़प्पन‘बड़प्पन’ शब्द ‘बड़ा’ और ‘पन’ से मिलकर बना होता है। इसका अर्थ होता है – बड़ाई, श्रेष्ठ या बड़ा होने का भाव, महत्त्व, गरिमा इसका उपयोग मुख्य रूप से व्यक्तित्व, गुण और चारित्र की ऊँचाई या महानता बताने के लिए किया जाता है, जैसे – उनकी सादगी और बड़प्पन ने सबका मन जीत लिया।
नीचे कुछ शब्द दिए गए हैं जो किसी भाव को व्यक्त करते हैं। इनमें से जो शब्द ‘बड़प्पन’ के भाव व्यक्त करते हैं, उन पर एक गोला बनाइए, जो बड़प्पन का भाव व्यक्त नहीं करते हैं, उनकी नीचे रेखा खींचिए।

उत्तर:

कविता की रचना

“फूल लेकर तितलियों को गोद में, 
भौंर को अपना अनूठा रस पिला। 
निज सुगंधों  निराले रंग से, 
है सदा देता कली का जी खिला।”
इस पंक्ति में रेखांकित शब्द पर ध्यान दीजिए। क्या आपने इस शब्द को पहले कहीं पढ़ा है? यह शब्द है-‘और’। कविता में ‘र’ वर्ण नहीं लिखा गया है। कई बार बोलते हुए हम शब्द की अंतिम ध्वनि उच्चरित नहीं करते हैं। कवि भी कविता की लय के अनुसार ऐसा प्रयोग करते हैं। इस कविता में ऐसी अनेक विशेषताएँ छिपी हैं, जैसे- ‘प्यार में डूबी तितलियों’ के स्थान पर ‘प्यार-डूबी तितलियों’ का प्रयोग किया गया है। हर दूसरी पंक्ति का अंतिम शब्द मिलती-जुलती ध्वनि वाला यानी ‘तुकांत’ है आदि।

(क) अपने समूह के साथ मिलकर इन विशेषताओं की सूची बनाइए। अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
उत्तरकविता की विशेषताएँ:  

  1. तुकबंदी: हर दूसरी पंक्ति का अंतिम शब्द मिलती-जुलती ध्वनि वाला है, जैसे “पालता” और “डालता”, “बही” और “नहीं”।  
  2. संक्षिप्त ध्वनि प्रयोग: कुछ शब्दों की अंतिम ध्वनि छोड़ी गई है, जैसे “और” को “औ” लिखा गया (“निज सुगंधों औ निराले रंग से”)।  
  3. प्राकृतिक चित्रण: फूल, काँटा, चाँद, हवा, और मेघ जैसे प्राकृतिक तत्वों का मानवीय रूप में वर्णन किया गया है।  
  4. विपरीत भाव: फूल और काँटे के विपरीत स्वभाव को दिखाया गया है, जैसे फूल का आनंद देना और काँटे का चुभना।  
  5. प्रश्नात्मक शैली: कविता में प्रश्न पूछा गया है, जैसे “किस तरह कुल की बड़ाई काम दे?”  
  6. समान ध्वनि वाले शब्द: एक ही पंक्ति में समान ध्वनि वाले शब्द हैं, जैसे “सुगंधों औ निराले”।

साझा करना: हम अपनी सूची कक्षा में पढ़ेंगे और बताएँगे कि ये विशेषताएँ कविता को रोचक और लयबद्ध बनाती हैं।

(ख) विशेषताओं का सही पंक्तियों से मिलान कीजिए।
उत्तर: 

कविता का सौंदर्य

(क) आगे कविता की कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। इनमें कुछ शब्द हटा दिए गए हैं और साथ में मिलते-जुलते अर्थ वाले शब्द भी दिए गए हैं। इनमें से प्रत्येक शब्द से वह पंक्ति पूरी करके देखिए जो शब्द उस पंक्ति में जँच रहे हैं, उन पर घेरा बनाइए।

उत्तर: 


(ख) अपने समूह में चर्चा करके पता लगाइए कि कौन-सा शब्द रिक्त स्थानों में सबसे अधिक साथियों को जँच रहा है और क्यों?
उत्तर: हमारे समूह ने चर्चा की और निम्नलिखित शब्द सबसे अधिक जँचे:  

  • रात और चाँद: ये शब्द सरल, काव्यात्मक, और रोजमर्रा की भाषा में प्रचलित हैं। “रात में चाँद” का चित्रण कविता की चाँदनी की कल्पना को जीवंत करता है।  
  • मेघ और हवायें: “मेघ” बारिश का प्रतीक है और कविता की लय के साथ मेल खाता है। “हवायें” बहुवचन में है, जो पंक्ति की संरचना के साथ सही बैठता है।

कारण: ये शब्द कविता की भावना, लय, और प्रकृति के चित्रण को बढ़ाते हैं।

विशेषण(क) नीचे दी गई पंक्तियों में विशेषण और विशेष्य शब्दों की पहचान करके लिखिए:

उत्तर: 


(ख) नीचे दिए गए विशेष्यों के लिए अपने मन से विशेषण सोचकर लिखिए:

   उत्तर:

पाठ से आगे
आपकी बात(क) यदि आपको फूल और काँटे में से किसी एक को चुनना हो तो आप किसे चुनेंगे और क्यों?
उत्तर: मैं फूल चुनूँगा। क्योंकि:

  • फूल सुंदरता, सुगंध, और आनंद का प्रतीक है। यह दूसरों को खुशी देता है और तितलियों-भौंरों को आकर्षित करता है।  
  • फूल की तरह मैं भी अपने व्यवहार से दूसरों के जीवन में सुख और प्रसन्नता लाना चाहता हूँ।  
  • फूल कोमलता और प्रेम का प्रतीक है, जो मेरे लिए महत्वपूर्ण है।

(ख) कविता में बताया गया है कि फूल अपनी सुगंध और व्यवहार से चारों ओर प्रसन्नता और आनंद फैलाता है। आप अपने मित्रों या परिवार के जीवन में प्रसन्नता और आनंद लाने के लिए क्या-क्या करते हैं और क्या-क्या कर सकते हैं?
उत्तरमैं जो करता हूँ:  

  • मैं अपने दोस्तों के साथ मजेदार कहानियाँ और चुटकुले साझा करता हूँ।  
  • परिवार में मैं छोटे-छोटे काम, जैसे माँ की मदद करना या भाई-बहन के साथ खेलना, करता हूँ।  
  • मैं सबके साथ प्यार से बात करता हूँ और उनकी परेशानियों को सुनता हूँ।

मैं जो कर सकता हूँ:  

  • मैं अपने दोस्तों के लिए छोटे-छोटे उपहार, जैसे हस्तनिर्मित कार्ड, बना सकता हूँ।  
  • परिवार के साथ समय बिताने के लिए पिकनिक या खेल की योजना बना सकता हूँ।  
  • स्कूल में किसी की मदद करके, जैसे नोट्स साझा करके, उनके चेहरे पर मुस्कान ला सकता हूँ।

(ग) ‘फूल’ और ‘काँटे’ एक-दूसरे से बिलकुल भिन्न हैं फिर भी साथ-साथ पाए जाते हैं। अपने आस-पास से ऐसे अन्य उदाहरण दीजिए।
(संकेत वस्तुएँ, जैसे- नमक और चीनी; स्वभाव, जैसे शांत और क्रोधी; स्वाद, जैसे-खट्टा-मीठा; रंग, जैसे- काला-सफेद; अनुभव, जैसे- सुख-दुख आदि)
उत्तर:  

  • वस्तुएँ: नमक और चीनी—नमक नमकीन होता है, चीनी मीठी। दोनों अलग स्वाद के हैं, लेकिन रसोई में साथ पाए जाते हैं।  
  • स्वभाव: शांत और क्रोधी—कुछ लोग शांत रहते हैं, कुछ जल्दी गुस्सा करते हैं, फिर भी एक ही परिवार में रहते हैं।  
  • स्वाद: खट्टा और मीठा—खट्टे नींबू और मीठे आम अलग स्वाद देते हैं, लेकिन दोनों फल एक ही बगीचे में उगते हैं।  
  • रंग: काला और सफेद—काला गहराई दिखाता है, सफेद शांति, लेकिन दोनों रंग एक चित्र में साथ दिखते हैं।  
  • अनुभव: सुख और दुख—सुख हमें खुशी देता है, दुख हमें सिखाता है, लेकिन दोनों जीवन का हिस्सा हैं।

(घ) “छेद कर काँटा किसी की उँगलियाँ, फाड़ देता है किसी का वर बसन।” आप अपने आस-पास की किसी समस्या का वर्णन कीजिए जिसे आप ‘काँटे’ के समान महसूस करते हैं। उस समस्या का समाधान भी सुझाइए।
उत्तर: समस्या: मेरे स्कूल के रास्ते में बहुत सारा कचरा बिखरा रहता है। यह ‘काँटे’ की तरह है, क्योंकि यह गंदगी फैलाता है, पैर में चुभ सकता है, और बीमारियाँ फैला सकता है।
समाधान:

  • मैं और मेरे दोस्त मिलकर एक सफाई अभियान शुरू कर सकते हैं।  
  • स्कूल में एक कचरा प्रबंधन समिति बना सकते हैं, जो नियमित सफाई कराए।  
  • लोगों को जागरूक करने के लिए पोस्टर बना सकते हैं, जिसमें कचरा न फैलाने की अपील हो।

सृजन(क) इस कविता के बारे में एक चित्र बनाइए। आप चित्र में जहाँ चाहें, अपने मनोनित रंग भर सकते हैं। आप किन रंगों या केवल उपलब्ध रंगों की सहायता से भी चित्र बना सकते हैं। चित्र बिल्कुल मौलिक होनी चाहिए। इसकी चिंता करने की भी आवश्यकता नहीं है। आप अपनी कल्पना को जैसे मन करे, वैसे साकार कर सकते हैं।
उत्तर: 

(ख) मान लीजिए कि फूल और कांटे के बीच बातचीत हो रही है। उनकी बातचीत या संवाद अपनी कल्पना से लिखिए।
संवाद का विषय निम्नलिखित हो सकता है—
उनके गुणों और विशेषताओं पर चर्चा
यह समझाना कि उनका जीवन में क्या योगदान है
उदाहरण:
फूल — मैं दूसरे के जीवन में सुगंध और सुख फैलाने आया हूँ।
कांटा — और मैं संबंधों की याद दिलाने और सुरक्षा देने के लिए हूँ।

उत्तर: संवाद:
फूल: नमस्ते, काँटे! देखो, मेरी सुगंध और रंगों से तितलियाँ कितनी खुश हैं। मैं सबके चेहरे पर मुस्कान लाता हूँ।
काँटा: हाँ, फूल, तुम तो बहुत सुंदर हो। लेकिन मैं भी कम नहीं। मैं तुम्हारी और पौधे की रक्षा करता हूँ, ताकि कोई जानवर हमें नुकसान न पहुँचाए।
फूल: सही कहते हो। तुम्हारी वजह से मैं सुरक्षित हूँ। लेकिन लोग तुमसे डरते हैं, क्योंकि तुम चुभ जाते हो।
काँटा: हा-हा, यह तो मेरा काम है! मैं कठोर हूँ, ताकि कोई हमें हल्के में न ले। तुम सुख बाँटते हो, और मैं चुनौतियों की याद दिलाता हूँ।
फूल: हम दोनों मिलकर इस पौधे को खास बनाते हैं, है ना? तुम मजबूती देते हो, और मैं सुंदरता।
काँटा: बिल्कुल! हम साथ-साथ हैं, जैसे सुख और दुख। चलो, मिलकर इस बगीचे को और खूबसूरत बनाएँ।

वाद-विवाद

विभिन्न समूह बनाकर कक्षा में एक वाद-विवाद गतिविधि का आयोजन कीजिए। इसके लिए विषय है-‘जीवन में फूल और कॉंटे, दोनों की आवश्यकता होती है’।
कक्षा में वाद-विवाद गतिविधि का आयोजन करने के लिए कुछ सुझाव निम्नलिखित हैं-
1. आपकी कक्षा में पहले से सात-आठ समूह बने होंगे। आधे समूह ‘फूल’ के पक्ष में तर्क देंगे। आधे समूह ‘काँटे’ के पक्ष में तर्क देंगे।
2. एक समूह निर्णायक मंडल की भूमिका निभाएगा। निर्णायक मंडल का काम होगा-

  • तर्कों को ध्यान से सुनना।
  • प्रस्तुति शैली और तर्कों की गहराई के आधार पर अंकों का निर्धारण करना।

3. प्रत्येक समूह को तैयारी के लिए 15 मिनट का समय मिलेगा ताकि वे अपने तर्क तैयार कर सकें। सभी समूह अपने-अपने तर्क मिलकर सोचेंगे और लिखेंगे।
4. प्रत्येक समूह को अपने पक्ष में बोलने के लिए तीन-चार मिनट का समय मिलेगा। दूसरा समूह पहले समूह के तकों पर एक-दो मिनट में उत्तर देगा या उनसे प्रश्न पूछेगा।
5. सभी प्रतिभागियों को एक-दूसरे की बात ध्यान से सुननी होगी। बीच में टोकने की अनुमति किसी को नहीं होगी।
6. सभी समूहों का क्रम तय किया जाएगा। वाद-विवाद के लिए क्रम इस प्रकार हो सकता है-

  • समूह 1 (फूल के पक्ष में)
  • समूह 2 (काँटे के पक्ष में)
  • समूह 3 (फूल के पक्ष में)
  • समूह 4 (काँटे के पक्ष में)
    और इसी क्रम से आगे बढ़ें।

7. जो समूह निर्णायक मंडल का कार्य कर रहा है, वह वाद-विवाद के अंतराल में तर्क, भाषा कौशल और प्रस्तुति शैली के आधार पर अंकों का निर्धारण करेगा।
8. निर्णायक मंडल अंकों के आधार पर विजेता समूह का निर्णय करेगा।
9. समूहों के प्रयासों के लिए तालियाँ बजाएँ और उनकी प्रशंसा करें। संभव हो तो विजेता समूह को कोई पुरस्कार या प्रमाणपत्र दिया जा सकता है।
10. विद्यार्थी वाद-विवाद गतिविधि के अनुभवों पर एक अनुच्छेद भी लिख सकते हैं।

उत्तर: हम कक्षा में वाद-विवाद गतिविधि निम्नलिखित तरीके से आयोजित करेंगे:  

  1. समूह विभाजन: कक्षा के 8 समूहों में से 4 समूह फूल के पक्ष में और 4 समूह काँटे के पक्ष में तर्क देंगे।  
  2. निर्णायक मंडल: एक समूह (9वाँ, अगर हो) निर्णायक मंडल होगा, जो तर्कों, भाषा, और प्रस्तुति के आधार पर अंक देगा।  
  3. तैयारी: प्रत्येक समूह को 15 मिनट मिलेंगे।
    • फूल के पक्ष में तर्क:
      • फूल सुंदरता और सुख का प्रतीक है, जो जीवन को आनंदमय बनाता है।  
      • फूल पर्यावरण को सुंदर बनाते हैं और कीटों के लिए भोजन देते हैं।  
      • फूल की तरह दयालु और कोमल व्यवहार समाज को बेहतर बनाता है।
    • काँटे के पक्ष में तर्क:
      • काँटे सुरक्षा और मजबूती का प्रतीक हैं, जो पौधों को नुकसान से बचाते हैं।  
      • काँटे हमें सिखाते हैं कि जीवन में चुनौतियाँ भी जरूरी हैं।  
      • काँटे की तरह दृढ़ता और साहस हमें मुश्किलों से लड़ना सिखाते हैं।
  4. प्रस्तुति: प्रत्येक समूह 3-4 मिनट बोलेगा, और दूसरा समूह 1-2 मिनट में जवाब देगा।  
  5. नियम: कोई बीच में नहीं टोकेगा; सभी एक-दूसरे को ध्यान से सुनेंगे।  
  6. क्रम: समूह 1 (फूल), समूह 2 (काँटा), समूह 3 (फूल), समूह 4 (काँटा), और इसी तरह आगे।  
  7. निर्णयन: निर्णायक मंडल अंकों के आधार पर विजेता का चयन करेगा। 
  8. प्रशंसा: सभी समूहों के लिए तालियाँ और प्रशंसा होगी। विजेता को प्रमाणपत्र दिया जा सकता है।  
  9. अनुभवमैं एक अनुच्छेद लिखूँगा: “वाद-विवाद बहुत मजेदार और शिक्षाप्रद था। फूल के पक्ष में बोलने वाले समूह ने सुंदरता और सुख की बात की, जबकि काँटे के पक्ष ने मजबूती और सुरक्षा पर जोर दिया। मैंने सीखा कि जीवन में दोनों का संतुलन जरूरी है। मेरे समूह ने अच्छी तैयारी की, और हमारी प्रस्तुति को सराहा गया। यह अनुभव मुझे आत्मविश्वास और तर्क करने की कला सिखाने वाला था।”

आज की पहेली

नीचे कुछ ऐसे पेड़-पौधों के चित्र दिए गए हैं जिनमें फूल और काँटे साथ-साथ पाए जाते हैं। चित्रों को सही नामों के साथ रेखा खींचकर जोड़िए –
उत्तर: 
खोजबीन के लिएनीचे दिए गए लिंक का प्रयोग करके आप बहुत-सी अन्य लोककथाएँ देख-सुन सकते हैं-

  • रंग-बिरंगे फूलों से
    https://www.youtube.com/watch?v=rIXpoQy4sHc
  • फूलों की घाटी में — कविता
    https://www.youtube.com/watch?v=yyrbxCtbgWg

उत्तर: विद्यार्थी स्वयं वीडियो देखे और इसकी खोजबीन करे।

02. तीन बुद्धिमान अध्याय समाधान 

पाठ से

मेरी समझ से

(क) लोककथा के आधार पर नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन सा है? उसके सामने तारा (*) बनाइए।

(1) लोककथा में पिता ने अपने बेटों से ‘धन संचय करने’ को कहा। उनकी इस बात का क्या अर्थ हो सकता है?

  • खेती-बारी करना और धन इकट्ठा करना
  • पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि का विकास करना  (*) 
  • ऊँट का व्यापार करना
  • गाँव छोड़कर किसी नगर में जाकर बसना

उत्तर: पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि का विकास करना
विश्लेषण: पिता ने अपने बेटों को सलाह दी कि वे रुपये-पैसे और सोने-चाँदी के बजाय पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि को संचित करें। यह धन उन्हें कभी कमी नहीं महसूस होने देगा। इसलिए सही उत्तर “पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि का विकास करना” है।

(2) तीनों भाइयों ने अपने ज्ञान और बुद्धि का उपयोग करके ऊँट के बारे में बहुत कुछ बता दिया। इससे क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?

  • बुद्धि का प्रयोग करके ऊँट के बारे में सब-कुछ बताया जा सकता है।
  • समस्या को सुलझाने के लिए ध्यान से निरीक्षण करना महत्वपूर्ण है।  (*) 
  • किसी व्यक्ति का ज्ञान, बुद्धि और धन ही सबसे बड़ी ताकत है।  (*) 
  • ऊँट के बारे में जानने के लिए दूसरों पर भरोसा करना चाहिए।

उत्तर: समस्या को सुलझाने के लिए ध्यान से निरीक्षण करना महत्वपूर्ण है।
समस्या को सुलझाने के लिए ध्यान से निरीक्षण करना महत्वपूर्ण है।  
विश्लेषण: भाइयों ने अपने अवलोकन और बुद्धि का उपयोग करके ऊँट के बारे में सटीक जानकारी दी। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि सावधानीपूर्वक निरीक्षण और बुद्धि किसी व्यक्ति की सबसे बड़ी ताकत होती है। इसलिए दो उत्तर सही हैं।

(3) राजा ने भाइयों की बुद्धिमत्ता पर विश्वास क्यों किया?

  • भाइयों ने अपनी बात को तर्क के साथ समझाया।  (*) 
  • राजा को ऊँट के स्वामी की बातों पर संदेह था।
  • राजा ने स्वयं ऊँट और पेटी की जाँच कर ली थी।  (*) 
  • भाइयों ने राजा को अपनी बात में उलझा लिया था।

उत्तर: भाइयों ने अपनी बात को तर्क के साथ समझाया।
राजा ने स्वयं ऊँट और पेटी की जाँच कर ली थी।
विश्लेषण: राजा ने भाइयों की बुद्धिमत्ता पर तब विश्वास किया जब उन्होंने तर्क के साथ ऊँट और पेटी के बारे में सही-सही बताया। साथ ही, राजा ने पेटी की जाँच करके उनकी बात की पुष्टि की। इसलिए दो उत्तर सही हैं।

(4) लोककथा के पात्रों और घटनाओं के आधार पर, राजा के निर्णय के पीछे कौन-सा मूल्य छिपा है?

  • दोषी को कड़ा से कड़ा दंड देना हर समस्या का सबसे बड़ा समाधान है।
  • अच्छी तरह जाँच किए बिना किसी को दोषी नहीं ठहराना चाहिए।  (*) 
  • राजा की प्रत्येक बात और निर्णय को सदा सही माना जाना चाहिए।
  • ऊँट की चोरी के निर्णय के लिए सेवक की बुद्धि का उपयोग करना चाहिए।

उत्तर: अच्छी तरह जाँच किए बिना किसी को दोषी नहीं ठहराना चाहिए।
विश्लेषण: राजा ने भाइयों को दोषी ठहराने से पहले उनकी बुद्धिमत्ता की जाँच की और सही निर्णय लिया। इससे यह मूल्य सामने आता है कि बिना जाँच के किसी को दोषी नहीं ठहराना चाहिए।

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने भिन्न-भिन्न उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुनें।
उत्तर: मैंने उपरोक्त उत्तर इसलिए चुने क्योंकि लोककथा में स्पष्ट रूप से दिखाया गया है कि भाइयों की पैनी दृष्टि और बुद्धि ही उनकी सबसे बड़ी ताकत थी। उनके पिता ने उन्हें यही सलाह दी थी, और उन्होंने उसी का उपयोग करके ऊँट और पेटी के बारे में सटीक जानकारी दी। राजा ने भी उनकी बातों को तर्क और जाँच के आधार पर सही माना। अपने मित्रों के साथ चर्चा में मैं यह समझाऊँगा कि कहानी का मुख्य संदेश बुद्धि और अवलोकन की शक्ति है, और यही कारण है कि मैंने ये उत्तर चुने।

पंक्तियों पर चर्चा

पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए-

(क) “रुपये-पैसे के स्थान पर तुम्हारे पास पैनी दृष्टि होगी और सोने-चाँदी के स्थान पर तीव्र बुद्धि होगी। ऐसा धन संचित कर लेने पर तुम्हें कभी किसी प्रकार की कमी न रहेगी और तुम दूसरों की तुलना में उन्नीस नहीं रहोगे।”
उत्तर: अर्थ: इस पंक्ति में पिता अपने बेटों को समझाते हैं कि सच्चा धन पैसा या सोना-चाँदी नहीं, बल्कि पैनी दृष्टि (सावधानी से देखने की क्षमता) और तीव्र बुद्धि (समझ और तर्क की शक्ति) है। यह धन कभी खत्म नहीं होता और जीवन में हर कमी को पूरा करता है। इससे व्यक्ति हमेशा दूसरों से बेहतर स्थिति में रहता है।
विचार: यह पंक्ति मुझे बहुत प्रेरणादायक लगती है क्योंकि यह बताती है कि ज्ञान और समझ ही सबसे मूल्यवान संपत्ति है। इससे हम किसी भी समस्या का समाधान कर सकते हैं।

(ख) “हर वस्तु और स्थिति को पूर्णतः समझने और जानने का प्रयास करो। कुछ भी तुम्हारी दृष्टि से न बच पाए।”
उत्तर: अर्थ: इस पंक्ति में पिता बेटों को सलाह देते हैं कि वे अपने आसपास की हर चीज़ और परिस्थिति को ध्यानपूर्वक देखें और पूरी तरह समझने की कोशिश करें। कोई भी बात उनकी नजर से नहीं छूटनी चाहिए।
विचार: यह पंक्ति सिखाती है कि हमें हमेशा जागरूक और सतर्क रहना चाहिए। छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देने से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं और मुश्किल परिस्थितियों में सही निर्णय ले सकते हैं।

(ग) “हमने अपने परिवेश को पैनी दृष्टि से देखने और बुद्धि से सोचने के प्रयास में बहुत समय लगाया है।”
उत्तर: अर्थ: इस पंक्ति में भाइयों ने बताया कि उन्होंने बचपन से ही अपने आसपास की चीजों को ध्यानपूर्वक देखने और समझने की आदत डाली। इसके लिए उन्होंने काफी मेहनत और समय लगाया।
विचार: यह पंक्ति हमें सिखाती है कि किसी भी कौशल को विकसित करने के लिए समय और मेहनत की जरूरत होती है। भाइयों की तरह हमें भी अपने अवलोकन और सोच को बेहतर बनाने के लिए अभ्यास करना चाहिए।

मिलकर करें मिलान

स्तंभ 1 के वाक्यों को स्तंभ 2 के उपयुक्त वाक्यों से सुमेलित करें:
उत्तर: 

सोच-विचार के लिए

(क) तीनों भाइयों ने बिना ऊँट को देखे उसके विषय में कैसे बता दिया था?
उत्तरः
 उन्होंने रास्ते पर मिले चिन्हों, घास की दिशा, पैरों के निशानों, और पेटी की आवाज़ जैसे संकेतों का सूक्ष्म निरीक्षण किया। इसी तीव्र बुद्धि और अवलोकन शक्ति से उन्होंने ऊँट, सवारों और वस्तुओं के बारे में सही अनुमान लगाया।

(ख) आपके अनुसार इस लोककथा में सबसे अधिक महत्व किस बात को दिया गया है- तार्किक सोच, अवलोकन या सत्यवादिता? लोककथा के आधार पर समझाइए।
उत्तर: अवलोकन सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि पूरी कहानी में भाइयों ने हर घटना, वस्तु और निशान का गहराई से निरीक्षण किया और वहीं से निष्कर्ष निकाला। उन्होंने बिना देखे सब कुछ जान लिया, यह उनकी पैनी दृष्टि और अभ्यास का परिणाम था।

(ग) लोककथा में राजा ने पहले भाइयों पर संदेह किया लेकिन बाद में उन्हें निर्दोष माना। राजा की सोच क्यों बदल गई?
उत्तर: राजा की सोच इसलिए बदली क्योंकि:

  • भाइयों ने पेटी में कच्चे अनार के बारे में सही अनुमान लगाया, जिसे राजा ने जाँचकर सत्यापित किया।
  • भाइयों ने तर्क के साथ समझाया कि उन्होंने ऊँट के बारे में कैसे जाना, जैसे पैरों के निशान, घास की स्थिति, और जूतों के निशान।
  • उनकी बुद्धिमत्ता और सच्चाई ने राजा को प्रभावित किया, और उसने महसूस किया कि वे चोर नहीं, बल्कि असाधारण बुद्धिमान लोग हैं।

(घ) ऊँट के स्वामी ने भाइयों पर तुरंत संदेह क्यों किया? आपके विचार से उसे क्या करना चाहिए था जिससे उसे अपना ऊँट मिल जाता?
उत्तर:  
ऊँट के स्वामी ने भाइयों पर संदेह किया क्योकि:

  • भाइयों ने ऊँट के बारे में ऐसी सटीक जानकारी दी (जैसे उसका आकार, एक आँख से न देखना, और उस पर सवार महिला और बच्चा), जो बिना देखे कोई नहीं बता सकता था।
  • स्वामी को लगा कि इतनी जानकारी केवल चोर ही दे सकते हैं, क्योंकि उसने स्वयं इस बारे में कुछ नहीं बताया था।

हमें क्या करना चाहिए:

  • स्वामी को भाइयों पर संदेह करने के बजाय उनकी सलाह मानकर उस दिशा में जाना चाहिए था, जहाँ उन्होंने ऊँट के जाने की बात कही थी।
  • उसे भाइयों से और जानकारी माँगनी चाहिए थी, जैसे निशानों के आधार पर ऊँट कहाँ जा सकता है।
  • वह भाइयों की मदद ले सकता था, क्योंकि उनकी पैनी दृष्टि से ऊँट को खोजने में आसानी होती।

(ङ) पिता ने बेटों को “दूसरे प्रकार का धन” संचित करने की सलाह क्यों दी? इससे पिता के बारे में क्या-क्या पता चलता है?
उत्तर:
पिता ने यह सलाह दी क्योंकि:

  • पिता निर्धन थे और उनके पास रुपये-पैसे या धन-दौलत नहीं था। इसलिए उन्होंने बेटों को सलाह दी कि वे पैनी दृष्टि और तीव्र बुद्धि को संचित करें, जो सच्चा और स्थायी धन है।
  • वे चाहते थे कि उनके बेटे जीवन में किसी पर निर्भर न रहें और अपनी बुद्धि से हर समस्या का समाधान करें।

पिता के बारे में हमें यह पता चलता है कि:

  • बुद्धिमान: पिता को जीवन का गहरा ज्ञान था कि बुद्धि और अवलोकन ही सबसे बड़ा धन है।
  • दूरदर्शी: उन्होंने बेटों को भविष्य के लिए ऐसी सलाह दी जो उन्हें हमेशा काम आएगी।
  • प्रेरणादायक: उन्होंने निर्धनता के बावजूद अपने बेटों को आत्मविश्वास और मेहनत का पाठ पढ़ाया।
  • सकारात्मक: उन्होंने कमी को कमजोरी नहीं माना, बल्कि बेटों को भावनाओं की ओर मार्गदर्शन किया।

(च) राजा ने भाइयों की परीक्षा लेने के लिए पेटी का उपयोग किया। इस परीक्षा से राजा के व्यक्तित्व और निर्णय शैली के बारे में क्या-क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?
उत्तर:
राजा के व्यक्तित्व और निर्णय शैली के निष्कर्ष:

  • निष्पक्ष: राजा ने भाइयों को तुरंत दोषी नहीं ठहराया, बल्कि उनकी बुद्धिमत्ता की जाँच की। यह दिखाता है कि वह निष्पक्ष निर्णय लेता था।
  • जिज्ञासु: वह भाइयों की असाधारण बुद्धि को परखना चाहता था, इसलिए उसने पेटी की परीक्षा आयोजित की।
  • तार्किक: राजा ने भाइयों के उत्तरों की तर्क और प्रमाण के आधार पर जाँच की, जैसे पेटी में कच्चा अनार देखकर उनकी बात की पुष्टि की।।
  • प्रशंसक: भाइयों की बुद्धिमत्ता से प्रभावित होकर उसने उनकी तारीफ की और उन्हें अपने दरबार में रख लिया।
  • निर्णय लेने में सावधान: उसने जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लिया, बल्कि पूरी जाँच के बाद फैसला किया।

(छ) आप इस लोककथा के भाइयों की किस विशेषता को अपनाना चाहेंगे और क्यों?
उत्तर: मैं भाइयों की पैनी दृष्टि और अवलोकन की विशेषता को अपनाना चाहूँगा।
क्योंकि:

  • अवलोकन की शक्ति से मैं अपने आसपास की छोटी-छोटी चीजों पर ध्यान दे सकूँगा, जिससे मुझे समस्याओं को बेहतर तरीके से समझने और हल करने में मदद मिलेगी।
  • यह विशेषता मुझे तार्किक सोच और सही निर्णय लेने में सहायता देगी, जैसा कि भाइयों ने ऊँट और पेटी के बारे में किया।
  • इससे मैं अपने जीवन में अधिक जागरूक और आत्मविश्वास से भरा रहूँगा।

अनुमान और कल्पना से

(क) यदि राजा ने बिना जाँच के भाइयों को दोषी ठहरा दिया होता तो इस लोककथा का क्या परिणाम होता?
उत्तर: यदि राजा ने बिना जाँच के भाइयों को दोषी ठहरा दिया होता तो:

  • भाइयों को सजा मिलती, जैसे जेल या दंड, और उनकी बुद्धिमत्ता का कोई मूल्य नहीं रहता।
  • कहानी का संदेश बदल जाता, और यह दिखाया जाता कि बुद्धि और सच्चाई की जीत नहीं होती।
  • ऊँट का स्वामी भी अपना ऊँट नहीं खोज पाता, क्योंकि भाइयों की सलाह नहीं मिलती।
  • राजा की छवि एक अन्यायी शासक की बन जाती, और लोककथा का नैतिक मूल्य (निष्पक्षता और बुद्धि की शक्ति) खो जाता।

(ख) यदि भाइयों ने अनार के बारे में सही अनुमान न लगाया होता तो लोककथा का अंत किस प्रकार होता? अपने विचार व्यक्त करें।
उत्तर: यदि भाइयों ने अनार के बारे में सही अनुमान न लगाया होता तो:

  • राजा को भाइयों की बुद्धिमत्ता पर संदेह हो जाता, और वह उन्हें चोर मान लेता।
  • भाइयों को सजा मिल सकती थी या उन्हें अपनी सच्चाई साबित करने के लिए और परीक्षा देनी पड़ती।
  • कहानी का अंत दुखद हो सकता था, और भाइयों की बुद्धि की प्रशंसा नहीं होती।
  • ऊँट के स्वामी को भी उसकी संपत्ति नहीं मिलती, क्योंकि राजा भाइयों की सलाह पर भरोसा नहीं करता।

(ग) लोककथा में यदि तीनों भाई ऊँट को खोजने जाते तो उन्हें कौन-कौन सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता था?
उत्तर: लोककथा में यदि तीनों भाई ऊँट को खोजने जाते तो उन्हें निम्नलिखित कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता था:

  • भूख और थकान: भाइयों के पास पहले ही खाने-पीने का सामान खत्म हो चुका था और वे थके हुए थे। ऊँट की खोज में उन्हें और अधिक भूख और थकान झेलनी पड़ती।
  • रास्ते की कठिनाई: वे सुनसान घाटियों और ऊँचे पहाड़ों से गुजर चुके थे। खोज में उन्हें और मुश्किल रास्तों से गुजरना पड़ता।
  • खतरा: जंगल या सुनसान इलाकों में जंगली जानवरों या लुटेरों का खतरा हो सकता था।
  • स्वामी का संदेह: ऊँट का स्वामी उन पर और अधिक संदेह करता, जिससे उनकी मुश्किलें बढ़तीं।
  • संसाधनों की कमी: उनके पास पैसे या अन्य साधन नहीं थे, जिससे खोज में परेशानी होती।

(घ) यदि राजा के स्थान पर आप होते तो भाइयों की परीक्षा लेने के लिए किस प्रकार के सवाल या गतिविधियाँ करते? अपनी कल्पना साझा करें।
उत्तर: यदि मैं राजा होता, तो भाइयों की परीक्षा के लिए मैं निम्नलिखित सवाल या गतिविधियाँ करता:

  • गुप्त वस्तु पहचान: मैं एक बंद कमरे में तीन अलग-अलग वस्तुएँ रखता, जैसे एक फल, एक कपड़ा, और एक गहना। भाइयों को बिना देखे, केवल कमरे के बाहर के निशानों जैसे गंध, आवाज़ या पैरों के निशान देखकर वस्तुओं का अनुमान लगाना होता।
  • कहानी पूरा करना: मैं एक अधूरी कहानी सुनाता, जिसमें कुछ हिस्से छूट जाते। भाइयों को अपनी समझ और तर्क से उस कहानी के छूटे हुए भाग को पूरा करना होता।
  • रहस्यमय निशान: मैं महल के बगीचे में कुछ नकली निशान बनवाता, जैसे टूटे पत्ते, मिट्टी पर पैरों के निशान, या बिखरे हुए फूल। भाइयों को इन निशानों से यह बताना होता कि वहाँ क्या हुआ था।

शब्द से जुड़े शब्द

नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में ‘बुद्धि’ से जुड़े शब्द:

उत्तर:

लोककथा को सुनाना

लोककथा के लिखित रूप में आने से पहले कहानियों का प्रचलन मौखिक रूप में ही पीडी-दर-पीडी चलता था। इसमें कहानी सुनने-सुनाने और याद रखने की महत्वपूर्ण भूमिका होती थी। कहानी कहने या सुनाने वाला इस तरह से कहानी सुनाता था कि सुनने वालों को रोचक लगे। इसमें कहानी सुनने वालों को आनंद तो आता ही था, कथा उन्हें याद भी हो जाती थी।
अब आप अपने समूह के साथ मिलकर इस लोककथा को रोचक ढंग से सुनाइए। लोककथा को प्रभावशाली और रोचक रूप में सुनाने के लिए नीचे कुछ सुझाव दिए गए हैं जो लोककथा को और भी आकर्षक बना सकते हैं-

उत्तर: हम अपने समूह के साथ मिलकर लोककथा को इस प्रकार रोचक ढंग से सुनाएँगे:

  • स्वर में उतार-चढ़ाव: जब भाइयों को ऊँट के स्वामी राजा के पास ले जाता है, तो आवाज़ में रहस्यमय और तनावपूर्ण बदलाव लाएँगे।
  • भावनाओं का प्रदर्शन: राजा के आश्चर्य को उत्साह और हैरानी के साथ व्यक्त करेंगे।
  • पात्रों के अलग-अलग स्वर: बड़े भाई के लिए गंभीर, मझले भाई के लिए आत्मविश्वासी, और छोटे भाई के लिए उत्साही स्वर अपनाएँगे।
  • शारीरिक अभिव्यक्ति: ऊँट के निशान बताते समय हाथों और शरीर की भाषा का इस्तेमाल करेंगे, जैसे जमीन की ओर इशारा।
  • हास्य: जब भाइयों ने पेटी में कच्चा अनार होने का अनुमान लगाया, तो हल्की मुस्कान और मज़ेदार अंदाज में प्रस्तुत करेंगे।
  • विवरणात्मक भाषा: बगीचे, सड़क, और महल का ऐसा चित्रण करेंगे कि श्रोता आँखें बंद करके भी वहाँ की कल्पना कर सकें।
  • रोचक मोड़: पेटी खोलने से पहले कुछ देर रुकर पूछेंगे, “क्या आप जानना चाहते हैं कि पेटी में क्या था?”
  • संवादों को स्पष्ट बनाना: भाइयों और राजा के संवादों को जीवंत और स्पष्ट तरीके से प्रस्तुत करेंगे।

कारक

नीचे दिए गए बाक्य को ध्यान से पढ़िए-
“भाइयों जवाब दिया।”
यह वाक्य कुछ अटपटा लग रहा है न? अब नीचे दिए गए वाक्य को पढ़िए-
“भाइयों ने जवाब दिया।”
इन दोनों वाक्यों में अंतर समझ में आया? बिलकुल सही पहचाना आपनेः दूसरे वाक्य में ‘ने’ शब्द ‘भाइयों और ‘जवाब दिया’ के बीच संबंध को जोड़ रहा है। संज्ञा या सर्वनाम के साथ प्रयुक्त होने वाले शब्दों के ऐसे रूपों को कारक या परसर्ग कहते हैं। कारक शब्दों के कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं-

नीचे दिए गए वाक्यों में कारक लिखकर इन्हें पूरा कीजिए-

  1. “हमने तो तुम्हारे ऊँट ____ देखा तक नहीं”, भाइयों ____ परेशान होते हुए कहा।
  2. मैं अपने रेवड़ों ____ पहाड़ों ____ लिये जा रहा था”, उसने कहा, “और मेरी पत्नी मेरे छोटे-से बेटे ____ साथ एक बड़े-से ऊँट ____ मेरे पीछे-पीछे आ रही थी।”
  3. राजा ____ उसी समय अपने मंत्री  ____ बुलाया और उसके कान ____ कुछ फुसफुसाया।
  4. यह सुनकर राजा ____ पेटी  ____ पास लाने ____ आदेश दिया। सेवकों ____ तुरंत आदेश ____ पालन किया। राजा  ____ सेवकों  ____  पेटी खोलने  ____  कहा।

उत्तर: 

  1. “हमने तो तुम्हारे ऊँट को देखा तक नहीं”, भाइयों ने परेशान होते हुए कहा।
  2. मैं अपने रेवड़ों को पहाड़ों पर लिये जा रहा था”, उसने कहा, “और मेरी पत्नी मेरे छोटे-से बेटे के साथ एक बड़े-से ऊँट पर मेरे पीछे-पीछे आ रही थी।”
  3. राजा ने उसी समय अपने मंत्री को बुलाया और उसके कान में कुछ फुसफुसाया।
  4. यह सुनकर राजा ने पेटी को पास लाने का आदेश दिया। सेवकों ने तुरंत आदेश का पालन किया। राजा ने सेवकों से पेटी खोलने के लिए कहा।

सूचनापत्र

कल्पना कीजिए कि आप इस लोककथा के वह घुड़सवार हैं जिसका ऊँट खो गया है। आप अपने ऊँट को खोजने के लिए एक सूचना कागज पर लिखकर पूरे शहर में जगह-जगह चिपकाना चाहते हैं। अपनी कल्पना और लोककथा में दी गई जानकारी के आधार पर एक सूचनापत्र लिखिए।
उत्तर:
 
सूचनापत्र 
खोया हुआ ऊँट – सूचना
सभी नगरवासियों से विनम्र अनुरोध है कि मेरे खोए हुए ऊँट को खोजने में कृपया सहायता करें।
विवरण:

  • ऊँट का प्रकार: बहुत बड़ा ऊँट, भूरे रंग का।
  • विशेषता: एक आँख से नहीं देखता (दाईं आँख खराब)।
  • सवार: मेरी पत्नी और छोटा बेटा ऊँट पर सवार थे।
  • खोने का स्थान: नगर के निकट सुनसान रास्ते पर।
  • खोने का समय: कुछ दिन पहले।

संपर्क: यदि आपको ऊँट या मेरे परिवार के बारे में कोई जानकारी मिले, तो कृपया मुझे नगर के मुख्य चौक पर मिलें या राजा के महल में संदेश भेजें।
इनाम: जो भी मेरे ऊँट और परिवार को सुरक्षित लौटाने में मदद करेगा, उसे उचित इनाम दिया जाएगा।
धन्यवाद,
[आपका नाम]
घुड़सवार

पाठ से आगे आपकी बात

1. लोककथा में तीन भाइयों की पैनी दृष्टि की बात कही गई है। क्या आपने कभी अपनी पैनी दृष्टि का प्रयोग किसी समस्या को हल करने के लिए किया है? उस समस्या और आपके द्वारा दिए गए हल के विषय में लिखिए।
उत्तर: हाँ, मैंने एक बार अपनी पैनी दृष्टि का उपयोग किया। मेरे घर में टीवी अचानक बंद हो गया था। सबको लगा कि यह खराब हो गया है। लेकिन मैंने ध्यान से देखा कि टीवी का प्लग ढीला था और बिजली का कनेक्शन ठीक नहीं था। मैंने प्लग को ठीक किया, और टीवी फिर से चालू हो गया।

2. लोककथा में बताया गया है कि भाइयों ने “बचपन से हर वस्तु पर ध्यान देने की आदत डाली।” यदि आपने ऐसा किया है तो आपको अपने जीवन में इसके क्या-क्या लाभ मिलते हैं?
उत्तर: मैंने भी बचपन से छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देने की आदत बनाई है। इसके कारण मुझे कई फायदे मिलते हैं:

  • बेहतर सीखना: स्कूल में मैं शिक्षक की हर बात ध्यान से सुनता हूँ, जिससे मुझे पढ़ाई अच्छे से समझ आती है और मैं अच्छे अंक प्राप्त करता हूँ।
  • समस्याओं का समाधान: जब भी कुछ खो जाता है, तो मैं ध्यान से सोचता हूँ कि आखिरी बार उसे कहाँ देखा था। इससे वह चीज़ जल्दी मिल जाती है।
  • जागरूकता: मैं अपने आस-पास की परिस्थितियों को बेहतर समझ पाता हूँ, जैसे मौसम में बदलाव या किसी के मन की भावनाएँ।
  • सावधानी: छोटी-छोटी बातों को समझकर मैं गलतियों से बच पाता हूँ और सही निर्णय ले पाता हूँ।

3. लोककथा में भाइयों को यात्रा करते समय अनेक कठिनाइयाँ आईं, जैसे- भूख, थकान और पैरों में छाले। आप अपने दैनिक जीवन में किन-किन कठिनाइयों का सामना करते हैं? लिखिए।
उत्तर: मेरे दैनिक जीवन में मुझे कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, जैसे:

  • समय की कमी: स्कूल, होमवर्क, खेल-कूद और आराम के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता।
  • पढ़ाई का दबाव: कुछ विषय, जैसे गणित और विज्ञान, समझने में मुश्किल लगते हैं।
  • थकान: दिनभर की पढ़ाई और अन्य कामों के बाद मैं बहुत थक जाता हूँ।
  • छोटी-मोटी परेशानियाँ: जैसे बारिश में स्कूल जाना या बस के देर से आने पर इंतजार करना।

4. भाइयों ने बिना देखे ही ऊँट के बारे में सही-सही बातें बताई। क्या आपको लगता है कि अनुभव और की समझ से देखे बिना भी सही निर्णय लिया जा सकता है? क्या आपने भी कभी ऐसा किया है?
उत्तर: हाँ, मुझे लगता है कि अनुभव और समझ से बिना देखे भी सही निर्णय लिया जा सकता है। उदाहरण के लिए, एक बार मेरी माँ ने मुझसे कहा कि मैंने उनका पर्स गलत जगह रख दिया। मैंने सोचा और याद किया कि मैंने उसे सोफे के पास देखा था। बिना दोबारा देखे मैंने उन्हें बताया, और पर्स वहीँ मिला।
विश्लेषण: अनुभव और याददाश्त से हम सही अनुमान लगा सकते हैं, जैसा कि भाइयों ने किया।

5. जब ऊँट के स्वामी ने भाइयों पर शंका की तो भाइयों ने बिना गुस्सा किए शांति से उत्तर दिया। क्या आपको लगता है कि कभी किसी को संदेह होने पर हमें भी शांत रहकर उत्तर देना चाहिए? क्या आपने कभी ऐसी स्थिति का सामना किया है? ऐसे में आपने क्या किया?

उत्तर: हाँ, मुझे लगता है कि जब किसी को संदेह हो तो हमें शांत रहकर समझदारी से उत्तर देना चाहिए। ऐसा करने से गलतफहमी खत्म होती है और बात साफ हो जाती है। एक बार मेरी सहेली ने मुझ पर गलतफहमी जताई थी कि मैंने उसका काम पूरा नहीं किया, लेकिन मैंने शांत रहकर पूरा सच समझाया। इससे वह मेरी बात मान गई और हमारा रिश्ता और मजबूत हो गया।

6. राजा ने भाइयों की बुद्धिमानी देखकर बहुत आश्चर्य व्यक्त किया। क्या आपको कभी किसी की सोच, समझ या किसी विशेष कौशल को देखकर आश्चर्य हुआ है? क्या आपने कभी किसी से कुछ ऐसा सीखा है जो आपके लिए बिलकुल नया और चौकाने वाला हो?
उत्तर: हाँ, मुझे अपने शिक्षक की गणित समझाने की कला देखकर बहुत आश्चर्य हुआ। उन्होंने एक जटिल सवाल को इतने आसान तरीके से समझाया कि मुझे तुरंत समझ आ गया। मैंने उनसे सीखा कि किसी भी मुश्किल चीज को आसान बनाने के लिए उसे छोटे-छोटे हिस्सों में तोड़ना चाहिए। यह मेरे लिए नया और उपयोगी था।

7. लोककथा में पिता ने अपने बेटों को यह सलाह दी कि वे समझ और ज्ञान जमा करें। क्या आपको कभी किसी बड़े व्यक्ति से ऐसी कोई सलाह मिली है जो आपके जीवन में उपयोगी रही हो? क्या आप भी अपने अनुभव से किसी को ऐसी सलाह देंगे?
उत्तर: मेरे दादाजी ने मुझे यह सलाह दी थी कि हमेशा मेहनत और ईमानदारी से काम करना चाहिए क्योंकि ये गुण जीवन में बहुत मदद करते हैं। यह सलाह मेरे लिए बहुत उपयोगी साबित हुई, क्योंकि स्कूल में मेहनत करने से मेरे अंक बेहतर हुए और मैं अपनी पढ़ाई में सफल हुआ। मैं भी अपने छोटे भाई को यही सलाह देता हूँ कि वह पढ़ाई में पूरी मेहनत करे और हमेशा सच बोलें।

8. भाइयों ने अपने ऊपर लगे आरोपों के होते हुए भी सदा सच्चाई का साथ दिया। क्या आपको लगता है कि सदा सच बोलना महत्वपूर्ण है, भले ही स्थिति कठिन क्यों न हो? क्या आपको किसी समय ऐसा लगा है कि आपकी सच्चाई ने आपको समस्याओं से बाहर निकाला हो?
उत्तर: हाँ, मुझे लगता है कि सच्चाई हमेशा बोलनी चाहिए, चाहे परिस्थिति कितनी भी कठिन क्यों न हो। सच बोलने से लोगों का विश्वास बढ़ता है और समस्याएँ जल्दी हल हो जाती हैं। एक बार मैंने गलती से अपनी माँ का गिलास तोड़ दिया था। मैं डर गया था, लेकिन मैंने ईमानदारी से सच बता दिया। माँ ने मुझे डाँटा, लेकिन बाद में मेरी सच्चाई की तारीफ की और मुझे माफ कर दिया।

ध्यान से देखना-सुनना-अनुभव करना

अचपन से ही हमें ऐसी आदत पड़ गई है कि हम किसी वस्तु को अपनी दृष्टि से नहीं चूकने देते। हमने वस्तुओं को पैनी दृष्टि से देखने और बुद्धि से सोचने के प्रयास में बहुत समय लगाया है।”
इस लोककथा में तीनों भाई आसपास की प्रत्येक घटना, वस्तु आदि को ध्यान से देखते, सुनते, सूंघते और अनुभव करते हैं अर्थात् अपनी ज्ञानेंद्रियों और बुद्धि का पूरा उपयोग करते हैं। ज्ञानेंद्रियाँ पाँच होती हैं- आँख, कान, नाक, जीभ और त्वचा। आँख से देखकर, कान से सुनाकर, नाक से सूपकर, जीभ से चखकर और त्वचा से स्पर्श करके हम किसी वस्तु के विषय में ज्ञान प्राप्त करते हैं। आइए, अब एक खेल खेलते हैं जिसमें आपको अपनी ज्ञानेंद्रियों और बुद्धि का उपयोग करने के अवसर मिलेंगे।

(क) हाँ’ या ‘नहीं’ प्रश्न-उत्तर खेल
चरण-

  1. एक विद्यार्थी कक्षा से बाहर जाकर दिखाई देने वाली किसी एक वस्तु या स्थान का नाम चुनेगा। कक्षा के भीतर से भी कोई नाम चुना जा सकता है।
  2. विद्यार्थी वापस कक्षा में आएगा और उस नाम को एक कागज पर लिख लेगा। लेकिन ध्यान रहे, वह कागज पर लिखे नाम को किसी को न दिखाए।
  3. अन्य विद्यार्थी बारी-बारी से उस वस्तु का नाम पता करने के लिए प्रश्न पूछेंगे। 
  4. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर केवल ‘हाँ’ या ‘नहीं’ में दिया जाएगा।
    उदाहरण के लिए-
    • क्या इस वस्तु का उपयोग कक्षा में होता है?
    • क्या यह खाने-पीने की चीज है?
    • क्या यह लकड़ी से बनी है?
    • ज्या यह बिजली से चलती है?
  5. सभी विद्यार्थी अधिकतम 20 प्रश्न ही पूछ सकते हैं। इसलिए उन्हें सोच-समझकर प्रश्न पूछने होंगे ताकि वे उस वस्तु का नाम पत्ता कर सकें।
  6. यदि 20 प्रश्नों के अंदर विद्यार्थी वस्तु का सही अनुमान लगा लेते हैं तो वे जीत जाएँगे।
  7. अब दूसरे विद्यार्थी को बाहर भेजकर गतिविधि दोहराएँगे।
  8. गतिविधि के अंत में सभी मिलकर इस खेल से जुड़े अपने अनुभवों के बारे में चर्चा करें।

उत्तर: हम इस खेल को निम्नलिखित तरीके से खेलेंगे:
चरण:

  1. वस्तु का चयन: एक विद्यार्थी कक्षा से बाहर जाएगा और एक वस्तु का नाम चुनेगा, जैसे “किताब”। वह कक्षा के अंदर की वस्तु, जैसे “बोर्ड” या “पंखा”, भी चुन सकता है। इससे खेल शुरू होता है और जिज्ञासा बढ़ती है।
  2. नाम लिखना: विद्यार्थी वापस कक्षा में आएगा और चुनी गई वस्तु, जैसे “किताब”, का नाम एक कागज पर लिखेगा। वह इस कागज को किसी को नहीं दिखाएगा ताकि रहस्य बना रहे।
  3. प्रश्न पूछना: अन्य विद्यार्थी बारी-बारी से वस्तु का नाम पता करने के लिए प्रश्न पूछेंगे। प्रत्येक प्रश्न का जवाब केवल “हाँ” या “नहीं” में होगा। उदाहरण: “क्या यह कक्षा में उपयोग होता है?” या “क्या यह कागज से बना है?”
  4. प्रश्नों का उदाहरण: विद्यार्थी ऐसे प्रश्न पूछेंगे जो वस्तु को पहचानने में मदद करें। जैसे:
    • क्या यह वस्तु कक्षा में उपयोग होती है? (हाँ)
    • क्या यह खाने-पीने की चीज है? (नहीं)
    • क्या यह कागज से बना है? (हाँ)
    • क्या यह पढ़ने के लिए है? (हाँ)
  5. प्रश्नों की सीमा: सभी विद्यार्थी अधिकतम 20 प्रश्न पूछ सकते हैं। उन्हें सोच-समझकर चतुर प्रश्न पूछने होंगे ताकि वे कम से कम प्रश्नों में वस्तु का नाम, जैसे “किताब”, पता कर सकें।
  6. जीत का नियम: यदि 20 प्रश्नों के अंदर विद्यार्थी सही अनुमान लगा लेते हैं, जैसे “किताब”, तो वे जीत जाएँगे। यह उनकी तार्किक सोच और अवलोकन कौशल को दर्शाता है।
  7. गतिविधि दोहराना: जीत के बाद, एक नया विद्यार्थी बाहर जाकर दूसरी वस्तु चुनेगा, और खेल फिर से शुरू होगा। इससे सभी को खेलने और सीखने का मौका मिलेगा।
  8. अनुभव पर चर्चा: गतिविधि के अंत में सभी विद्यार्थी मिलकर अपने अनुभव साझा करेंगे। हम चर्चा करेंगे कि कौन से प्रश्न सबसे उपयोगी थे, जैसे “क्या यह जीवित है?” जिसने वस्तु की श्रेणी स्पष्ट की। कुछ प्रश्न, जैसे “क्या यह नीले रंग का है?”, कम उपयोगी थे। यह खेल हमें सिखाता है कि सही प्रश्न पूछने से तेजी से जवाब मिलता है, जैसा कि लोककथा में भाइयों ने अपनी पैनी दृष्टि से किया।

(ख) गतिविधि- ‘स्पर्श, गंध और स्वाद से पहचानना’

  1. एक बैले या डिब्बे में (सावधानीपूर्वक एवं सुरक्षित) विभिन्न वस्तुएँ (जैसे- फल, फूल, मसाले, खिलौने, कपड़े, किताब, गुड आदि) रखें।
  2. विद्यार्थियों को आँखों पर पट्टी बाँधकर केवल स्पर्श, गंध या स्वाद का उपयोग करके वस्तु की पहचान करनी होगी और उसका नाम बताना होगा।
  3. बारी-बारी से प्रत्येक विद्यार्थी को बुलाकर उसकी आँखों पर पट्टी बाँध।
  4. उसे डिब्बे से एक वस्तु दी जाए। विद्यार्थी उसे छूकर, सुपकर, चखकर पहचानने का प्रयास करेंगे।
  5. सही पहचान करने के बाद विद्यार्थी बताएँगे कि उन्होंने उस बस्तु को कैसे पहचाना।
  6. एक-एक करके सभी विद्यार्थियों को अलग-अलग वस्तुओं को पहचानने का अवसर मिलेगा।
  7. अंत में सभी वस्तुओं को कक्षा में दिखाएँ और उनके बारे में चर्चा करें कि किस वस्तु को पहचानना आसान या कठिन लगा।

उत्तर:
हम इस गतिविधि को निम्नलिखित तरीके से करेंगे:

  1. वस्तुओं का चयन और तैयारी: हम एक डिब्बे में सावधानीपूर्वक और सुरक्षित वस्तुएँ रखेंगे, जैसे सेब (फल), गुलाब (फूल), इलाइची (मसाला), छोटा प्लास्टिक का खिलौना, सूती कपड़ा, किताब, और गुड़। ये वस्तुएँ ऐसी होंगी जिन्हें छूना, सूँघना, या चखना सुरक्षित हो।
  2. पट्टी बाँधकर पहचान: प्रत्येक विद्यार्थी को आँखों पर पट्टी बाँधकर केवल स्पर्श, गंध, या स्वाद का उपयोग करके डिब्बे से दी गई वस्तु की पहचान करनी होगी। उन्हें वस्तु का नाम बताना होगा, जैसे “यह सेब है”।
  3. बारी-बारी से भागीदारी: हम बारी-बारी से प्रत्येक विद्यार्थी को बुलाएँगे और उनकी आँखों पर पट्टी बाँधेंगे। इससे सभी को समान अवसर मिलेगा और गतिविधि रोचक बनी रहेगी।
  4. वस्तु देना और पहचानना: प्रत्येक विद्यार्थी को डिब्बे से एक वस्तु दी जाएगी। उदाहरण के लिए, अगर सेब दिया गया, तो विद्यार्थी उसे छूकर (गोल और चिकना), सूँघकर (हल्की मिठास), या चखकर।
  5. पहचान का तरीका बताना: सही पहचान करने के बाद विद्यार्थी बताएँगे कि उन्होंने वस्तु को कैसे पहचाना। उदाहरण के लिए, “मैंने सेब को उसके चिकने स्पर्श और हल्की मीठी गंध से पहचाना।” इससे हमें उनकी सोच और इंद्रियों के उपयोग को समझने में मदद मिलेगी।
  6. सभी को अवसर: एक-एक करके सभी विद्यार्थियों को अलग-अलग वस्तुओं को पहचानने का मौका मिलेगा। उदाहरण के लिए, एक को सेब, दूसरे को इलाइची, तीसरे को किताब, आदि। इससे सभी को विभिन्न अनुभव मिलेंगे।
  7. चर्चा और प्रदर्शन: अंत में, हम सभी वस्तुओं को कक्षा में दिखाएँगे और चर्चा करेंगे कि किस वस्तु को पहचानना आसान या कठिन था। उदाहरण के लिए, सेब और इलाइची को उनकी मजबूत गंध के कारण पहचानना आसान था, लेकिन खिलौना कठिन था क्योंकि उसकी कोई गंध नहीं थी। हम यह भी चर्चा करेंगे कि कौन सी इंद्रिय (स्पर्श, गंध, या स्वाद) सबसे उपयोगी थी।

अनुभव: यह गतिविधि बहुत मजेदार और शिक्षाप्रद थी। इसने हमें सिखाया कि हम अपनी इंद्रियों का उपयोग करके बिना देखे भी बहुत कुछ जान सकते हैं, जैसा कि लोककथा में भाइयों ने किया। सेब और गुड़ जैसी वस्तुओं को पहचानना आसान था क्योंकि उनकी गंध और स्वाद मजबूत थे, लेकिन किताब और कपड़े को पहचानना थोड़ा मुश्किल था क्योंकि उनकी गंध कम थी। इस गतिविधि ने हमें धैर्य, जागरूकता, और अपनी इंद्रियों पर भरोसा करना सिखाया।

आज की पहेली

आपने पढ़ा कि तीनों बुद्धिमान भाई किस प्रकार अपने अवलोकन से वे बातें भी जान जाते थे जो अन्य लोग नहीं जान पाते। अभआपके सामने कुछ पहेलियाँ प्रस्तुत हैं जहाँ आपको कुछ संकेत दिए जाएँगे। संकेतों के आधार पर आपको उत्तर खोजने हैं-

1. कौन है यह प्राणी?
संकेत:

  1. इसकी लंबी पूँछ होती है जो पेड़ों की शाखाओं के चारों ओर लिपटी रहती है।
  2. इसका मुख्य आहार कीट और छोटे जीव होते हैं जिन्हें यह चुपके से पकड़ता है।
  3. यह प्राणी अपने परिवेश में घुल-मिल जाता है और अपनी रंगत को बदल सकता है।
  4. इसके पास तेज आँखें होती हैं जो चारों दिशाओं में देख सकती हैं।

उत्तर: गिरगिट
विश्लेषण: गिरगिट की पूँछ लंबी और लिपटने वाली होती है, यह कीट खाता है, रंग बदल सकता है, और इसकी आँखें चारों ओर देख सकती हैं।

2. रंगीन डिब्बे
संकेत:

  1. लाल डिब्बा नीले डिब्बे के पास है।
  2. हरा डिब्बा पीले डिब्बे के पास नहीं है।
  3. पीला डिब्बा लाल डिब्बे के पास नहीं है।
  4. हरा डिब्बा लाल डिब्बे के पास है।

उत्तर: पीले डिब्बे के बराबर में नीला डिब्बा है।
विश्लेषण: चार डिब्बे एक सीध में हैं: स्थान 1, 2, 3, 4।

  • संकेत 1: लाल (R) नीले (B) के पास है।
  • संकेत 4: हरा (G) लाल (R) के पास है।
  • संकेत 3: पीला (Y) लाल (R) के पास नहीं है।
  • संकेत 2: हरा (G) पीले (Y) के पास नहीं है।
  • संभव क्रम: G, R, B, Y (स्थान 1: G, स्थान 2: R, स्थान 3: B, स्थान 4: Y)।
  • यहाँ पीला (Y) स्थान 4 पर है, और इसके बराबर नीला (B) स्थान 3 पर है।
  • सभी संकेत संतुष्ट होते हैं:
    • R और B पास-पास (2 और 3)।
    • G और R पास-पास (1 और 2)।
    • Y और R पास नहीं (4 और 2)।
    • G और Y पास नहीं (1 और 4)।

इसलिए, पीले डिब्बे के बराबर नीला डिब्बा है।

खोजबीन के लिए

नीचे दिए गए लिंक का प्रयोग करके आप बहुत-सी अन्य लोककथाएँ देख-सुन सकते हैं-

  • सुनो लोककथा 
    https://www.youtube.com/watch?v=JEti31XNpmA 
  • दुनिया की छत 
    https://www.youtube.com/watch?v=PehlQ71udFg 
  • भूल चूक लेनी देनी 
    https://www.youtube.com/watch?v=GjYW-CZIDEA

उत्तर: विद्यार्थी स्वयं वीडियो देखे और इसकी खोजबीन करे। 

01. माँ, कह एक कहानी अध्याय समाधान 

पाठ से
मेरी समझ से(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सबसे सही उत्तर कौन-सा है? उनके सामने तारा (*) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

(1) माँ अपने बेटे को करुणा और न्याय की कहानी क्यों सुनाती है?

  • राजाओं की कहानियों से उसका मनोरंजन करने के लिए।
  • उसमें सही और गलत की समझ विकसित करने के लिए। (*)
  • उसे परिवार की विरासत और पूर्वजों के बारे में बताने के लिए।
  • उसे प्रकृति और जानवरों के बारे में जानकारी देने के लिए।

उत्तर: उसमें सही और गलत की समझ विकसित करने के लिए।
विश्लेषण: माँ अपने बेटे राहुल को यह कहानी इसलिए सुनाती है ताकि वह करुणा, न्याय, और सही-गलत की समझ विकसित कर सके। कविता का मुख्य उद्देश्य नैतिक मूल्यों को सिखाना है, न कि केवल मनोरंजन या परिवार की विरासत बताना।

(2) कविता में घायल पक्षी की कहानी का उपयोग किस लिए किया गया है?

  • निर्दोष पक्षी के प्रति आखेटक की क्रूरता दिखाने के लिए। (*)
  • पिता की वीरता और साहस पर ध्यान दिलाने के लिए।
  • करुणा और हिंसा के बीच के संघर्ष को दिखाने के लिए। (*)
  • मित्रता और निष्ठा के महत्व को उजागर करने के लिए।

उत्तर: निर्दोष पक्षी के प्रति आखेटक की क्रूरता दिखाने के लिए।
करुणा और हिंसा के बीच के संघर्ष को दिखाने के लिए।
विश्लेषण: घायल पक्षी की कहानी आखेटक की क्रूरता और करुणा-हिंसा के बीच के संघर्ष को दर्शाती है। यह कहानी नैतिकता और दया के महत्व को उजागर करती है। पिता की वीरता या मित्रता का यहाँ कोई विशेष उल्लेख नहीं है।

(3) कविता के अंत तक पहुँचते-पहुँचते बच्चे को क्या समझ में आने लगता है?

  • न्याय सदैव करुणा के साथ होना चाहिए।(*)
  • निर्णय लेते समय सदैव निडर रहना चाहिए।
  • आखेटकों का सदैव विरोध करना चाहिए।
  • जानवरों की हर स्थिति में रक्षा करनी चाहिए।

उत्तर: न्याय सदैव करुणा के साथ होना चाहिए।
विश्लेषण: कविता के अंत में राहुल कहता है, “न्याय दया का दानी!” इससे पता चलता है कि उसे यह समझ आ गया है कि न्याय में करुणा का होना बहुत जरूरी है।

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तरमैंने ऊपर दिए गए उत्तर इसलिए चुने क्योंकि कविता का मुख्य उद्देश्य राहुल को नैतिक मूल्य सिखाना है। माँ की कहानी करुणा और न्याय पर आधारित है, जो बच्चे में सही-गलत की समझ विकसित करती है। घायल पक्षी की कहानी क्रूरता और दया के बीच के संघर्ष को दिखाती है, और अंत में राहुल का जवाब दर्शाता है कि वह न्याय में करुणा के महत्व को समझ गया है। अपने मित्रों के साथ चर्चा करके मैं उनके दृष्टिकोण को समझ सकता हूँ, जैसे कि कुछ लोग मनोरंजन या प्रकृति के बारे में सोच सकते हैं, लेकिन कविता का मुख्य संदेश नैतिकता और करुणा है।

मिलकर करें मिलानइस पाठ में आपने माँ और पुत्र के बीच की बातचीत को एक कविता के रूप में पढ़ा है। इस कविता में माँ अपने पुत्र को उसके पिता की एक कहानी सुना रही हैं। क्या आप जानते हैं कि ये माँ, पुत्र और पिता कौन हैं? अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और उन्हें पहचानकर सूचीबद्ध कीजिए।

उत्तर

पंक्तियों पर चर्चापाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए—
(क) “कोई निरपराध को मारे, तो क्यों अन्य उसे न उबारे? रक्षक पर भक्षक को वारे, न्याय दया का दानी!”
उत्तर: इन पंक्तियों का अर्थ है कि अगर कोई निर्दोष को मारता है, तो दूसरों को उसकी रक्षा करनी चाहिए। जो रक्षक है, उसे भक्षक (हिंसक) पर विजय प्राप्त करनी चाहिए। न्याय हमेशा दया के साथ होना चाहिए, अर्थात् न्याय करने वाला दयालु होना चाहिए। यह पंक्ति राहुल के विचार को दर्शाती है कि निर्दोष की रक्षा और दया के साथ न्याय करना सही है।

(ख) “हुआ विवाद सदय-निर्दय में, उभय आग्रही थे स्वविषय में, गई बात तब न्यायालय में, सुनी सभी ने जानी।”
उत्तर: इन पंक्तियों का अर्थ है कि दयालु (जो पक्षी को बचाना चाहता था) और निर्दयी (आखेटक) के बीच विवाद हो गया। दोनों अपनी-अपनी बात पर अड़े थे। मामला न्यायालय में गया, जहाँ सभी ने कहानी सुनी और समझा। यह दर्शाता है कि जब दो पक्ष सहमत नहीं होते, तो न्यायालय में न्याय की माँग की जाती है।

सोच-विचार के लिएकविता को एक बार फिर से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए—
(क) आपके विचार से इस कविता में कौन-सी पंक्ति सबसे महत्वपूर्ण है? आप उसे ही सबसे महत्वपूर्ण क्यों मानते हैं?
उत्तर: मेरे विचार से सबसे महत्वपूर्ण पंक्ति है:
“न्याय दया का दानी!”
कारण: यह पंक्ति कविता का मुख्य संदेश देती है कि न्याय हमेशा करुणा के साथ होना चाहिए। राहुल इस पंक्ति में अपनी समझ व्यक्त करता है कि निर्दोष की रक्षा करना और दया के साथ न्याय करना सही है। यह कविता का निष्कर्ष और नैतिक संदेश है।

(ख) आखेटक और बच्चे के पिता के बीच तर्क-वितर्क क्यों हुआ था?
उत्तरआखेटक और बच्चे के पिता (सिद्धार्थ) के बीच तर्क-वितर्क इसलिए हुआ क्योंकि आखेटक ने एक निर्दोष हंस को तीर मारकर घायल कर दिया था। सिद्धार्थ ने हंस को बचाया और उसका इलाज किया। आखेटक ने घायल हंस को वापस माँगा, लेकिन सिद्धार्थ ने उसे देने से इनकार कर दिया, क्योंकि वे निर्दोष की रक्षा करना चाहते थे। दोनों अपनी-अपनी बात पर अड़े थे, जिसके कारण विवाद हुआ।

(ग) माँ ने पुत्र से “राहुल, तू निर्णय कर इसका” क्यों कहा?
उत्तर: माँ ने राहुल से “राहुल, तू निर्णय कर इसका” इसलिए कहा ताकि वह स्वयं सोच-विचार करके सही और गलत का निर्णय ले सके। माँ चाहती थी कि राहुल कहानी से नैतिक शिक्षा ग्रहण करे और करुणा व न्याय के महत्व को समझे। यह प्रश्न राहुल की सोच को प्रोत्साहित करने और उसे स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने के लिए प्रेरित करने के लिए था।

(घ) यदि कहानी में आप उपवन में होते तो घायल हंस की सहायता के लिए क्या करते? आपके अनुसार न्याय कैसे किया जा सकता था?
उत्तर: अगर मैं उपवन में होता, तो मैं घायल हंस को उठाकर उसका इलाज करता, जैसे कि उसके घाव को साफ करके उसे सुरक्षित स्थान पर रखता। मैं आखेटक से कहता कि निर्दोष प्राणी को मारना गलत है और उसे ऐसा नहीं करना चाहिए।  
न्याय के लिए: मैं दोनों पक्षों (आखेटक और हंस को बचाने वाले) की बात सुनता। चूँकि हंस निर्दोष था, मैं हंस को बचाने वाले का पक्ष लेता और आखेटक को समझाता कि हिंसा गलत है। न्याय में दया को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, और हंस को आजाद करना सही होता

(ङ) कविता में माँ और बेटे के बीच बातचीत से उनके बारे में क्या-क्या पता चलता है?

उत्तर:  

  • माँ (यशोधरा): माँ बहुत दयालु, बुद्धिमान और शिक्षक की तरह है। वह अपने बेटे को कहानी के माध्यम से नैतिक मूल्य सिखाती है। वह राहुल को सोचने और निर्णय लेने के लिए प्रोत्साहित करती है।  
  • बेटा (राहुल): राहुल जिज्ञासु और उत्सुक है। वह बार-बार वही कहानी सुनना चाहता है, जिससे उसका कहानी के प्रति प्रेम झलकता है। वह कहानी सुनकर नैतिकता और दया के बारे में सीखता है और अंत में अपनी समझ व्यक्त करता है।  
  • संबंध: माँ और बेटे के बीच प्रेमपूर्ण और शिक्षाप्रद संबंध है। माँ धैर्यपूर्वक राहुल के सवालों का जवाब देती है और उसे सही दिशा में ले जाती है।

अनुमान और कल्पना से

अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए—
(क) माँ ने अपने बेटे को कहानी सुनाते समय अंत में कहानी को स्वयं पूरा नहीं किया, बल्कि उसी से निर्णय करने के लिए कहा। यदि आप किसी को यह कहानी सुना रहे होते तो कहानी को आगे कैसे बढ़ाते?
उत्तर: अगर मैं यह कहानी सुना रहा होता, तो मैं कहानी को इस तरह आगे बढ़ाता:
न्यायालय में सभी ने दोनों पक्षों की बात सुनी। दयालु व्यक्ति (सिद्धार्थ) ने कहा कि निर्दोष हंस को मारना गलत है और उसकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। आखेटक ने कहा कि उसने हंस को शिकार के लिए मारा, जो उसका अधिकार है। न्यायाधीश ने दया और नैतिकता को प्राथमिकता दी और फैसला सुनाया कि हंस को आजाद किया जाए। आखेटक को समझाया गया कि हिंसा छोड़कर करुणा अपनाए। हंस ठीक होकर आकाश में उड़ गया, और सभी ने इस फैसले की प्रशंसा की।

(ख) मान लीजिए कि कहानी में हंस और तीर चलाने वाले के बीच बातचीत हो रही है। कल्पना से बताइए कि जब उसने हंस को तीर से घायल किया तो उसमें और हंस में क्या-क्या बातचीत हुई होगी? उन्होंने एक-दूसरे को क्या-क्या तर्क दिए होंगे?
उत्तरहंस: “हे आखेटक, तुमने मुझे क्यों मारा? मैं तो निर्दोष हूँ और केवल आकाश में उड़ रहा था।”
आखेटक: “मैं एक शिकारी हूँ, और शिकार करना मेरा काम है। तुम मेरे निशाने पर आ गए, इसलिए मैंने तीर चलाया।”
हंस: “पर मेरा क्या अपराध था? मैंने तुम्हारा कोई नुकसान नहीं किया। सभी प्राणियों को जीने का अधिकार है।”
आखेटक: “यह जंगल है, और यहाँ शिकार करना स्वाभाविक है। मुझे तुम्हारा मांस चाहिए।”
हंस: “क्या तुम्हें मेरी पीड़ा नहीं दिखती? दया करो और मुझे बचाओ, मैं तुम्हें कभी नहीं भूलूँगा।”
आखेटक: “मुझे दया की नहीं, अपने शिकार की जरूरत है।”  
विश्लेषण: हंस करुणा और अपने जीने के अधिकार की बात करता है, जबकि आखेटक अपने शिकार को सही ठहराता है। यह बातचीत दया और हिंसा के बीच के संघर्ष को दर्शाती है।

(ग) मान लीजिए कि माँ ने जो कहानी सुनाई है, आप भी उसके एक पात्र हैं। आप कौन-सा पात्र बनना चाहेंगे? और क्यों?
उत्तर: मैं पक्षी को बचाने वाला व्यक्ति बनना चाहूँगा।
कारण: यह पात्र दयालु और नैतिक है, जो निर्दोष हंस की रक्षा करता है। मैं भी निर्दोष प्राणियों की मदद करना चाहता हूँ और हिंसा के खिलाफ खड़ा होना चाहता हूँ। यह पात्र करुणा और न्याय का प्रतीक है, जो मुझे प्रेरित करता है।

संवाद

इस कविता में एक माँ और उसके पुत्र का संवाद दिया गया है लेकिन कौन-सा कथन किसने कहा है, यह नहीं बताया गया है। आप कविता में दिए गए संवादों को पहचानिए कि कौन-सा कथन किसने कहा है और उसे दिए गए उचित स्थान पर लिखिए।

  • पुत्र द्वारा कहे गए कथन
  • माँ द्वारा कहे गए कथन 

उत्तर: पुत्र द्वारा कहे गए कथन:  

  • “माँ, कह एक कहानी।”  
  • “राजा था या रानी?”  
  • “लहराता था पानी?”  
  • “हुई पक्ष की हानी?”  
  • “लक्ष्य-सिद्धि का मानी?”  
  • “हठ करने की ठानी?”  
  • “सुनी सभी ने जानी?”  
  • “माँ, मेरी क्या बानी? मैं सुन रहा कहानी।”

माँ द्वारा कहे गए कथन:  

  • “बेटा, समझ लिया क्या तूने मुझको अपनी नानी?”  
  • “सुन, उपवन में बड़े सबेरे, तात भ्रमण करते थे तेरे,”  
  • “वर्ण वर्ण के फूल खिले थे, झलमल कर हिम-बिंदु क्षिले थे,”  
  • “गाते थे खग कल कल स्वर से, सहसा एक हंस ऊपर से,”  
  • “चाँक उन्होंने उसे उठाया, नया जन्म-सा उसने पाया।”  
  • “राहुल, तू निर्णय कर इसका– न्याय पक्ष लेता है किसका?”

विश्लेषण: पुत्र जिज्ञासु है और सवाल पूछता है, जबकि माँ कहानी सुनाती है और नैतिक शिक्षा देती है।

शब्द से जुड़े शब्दनीचे दिए गए रिक्त स्थानों में प्रकृति से जुड़े शब्द कविता में से चुनकर लिखिए—
उत्तर:  

विश्लेषण: ये सभी शब्द कविता में प्रकृति का वर्णन करते हैं, जैसे उपवन (बगीचा), फूल, हिम-बिंदु (ओस), आदि।

पंक्ति से पंक्तिनीचे स्तंभ 1 और स्तंभ 2 में कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। मिलती-जुलती पंक्तियों को रेखा खींचकर मिलाइए—
उत्तर:  

कविता की रचनाकविता की विशेषताओं की सूची बनाइए और विशेषताओं का सही पंक्तियों से मिलान कीजिए।
“राजा था या रानी?
राजा था या रानी?
माँ, कह एक कहानी!”
इन पंक्तियों पर ध्यान दीजिए! इन पंक्तियों की तरह इस पूरी कविता में अनेक स्थानों पर कुछ पंक्तियाँ बेरंग आई हैं! इस कारण कविता में माँ और बेटी की बातचीत पाठकों को बेहतर ढंग से समझ में आती है! इससे कविता के सौंदर्य में भी वृद्धि हुई है!
आप ध्यान दें तो इस कविता में आपको ऐसी अनेक विशेषताएँ दिखाई देंगी! उदाहरण के लिए, कविता में माँ-बेटी का संवाद है, जिसे ‘संवादात्मक शैली’ कहा जाता है! इसी प्रकार, इसमें प्रकृति और कार्यों का वर्णन है, जिसे ‘वर्णनात्मक शैली’ कहते हैं!

(क) इस कविता को एक बार पुनः पढ़िए और अपने समूह में मिलकर इस कविता की विशेषताओं की सूची बनाइए। अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
उत्तरकविता की विशेषताएँ: 

  • संवादात्मक शैली: माँ और पुत्र के बीच बातचीत।  
  • प्रश्न-उत्तर शैली: पुत्र सवाल पूछता है, माँ जवाब देती है।  
  • प्रकृति का वर्णन: उपवन, फूल, हिम-बिंदु आदि का चित्रण।  
  • पुनरावृत्ति: कुछ पंक्तियाँ दोहराई गई हैं, जैसे “यही कहानी!”  
  • तुकबंदी: पंक्तियों के अंत में समान ध्वनियाँ।  
  • विपरीत शब्द: जैसे “सदय-निर्दय”, “कोमल-कठिन”।  
  • नैतिक शिक्षा: करुणा और न्याय का संदेश।  
  • सरल भाषा: बच्चों के लिए समझने योग्य।

(ख) नीचे इस कविता की कुछ विशेषताएँ और वे पंक्तियाँ दी गई हैं जिनमें ये विशेषताएँ दिखाई देती हैं। विशेषताओं का सही पंक्तियों से मिलान कीजिए।
उत्तर:  
रूप बदलकर

“सुन, उपवन में बड़े सबेरे, तात भ्रमण करते थे तेरे,”
कविता की इन पंक्तियों को निम्न प्रकार से बदलकर लिखा जा सकता है—
→ “सुनो! आपके पिता एक उपवन में बहुत सवेरे भ्रमण किया करते थे…”
अब आप भी पाठ के किसी एक पद को एक अनुच्छेद के रूप में लिखिए।

उत्तर: पंक्ति: “वर्ण वर्ण के फूल खिले थे, झलमल कर हिम-बिंदु क्षिले थे, हलके झोंके हिले-मिले थे, लहराता था पानी!”  
अनुच्छेद: सुबह के समय उपवन में रंग-बिरंगे फूल खिले हुए थे। ओस की बूँदें सूरज की रोशनी में चमक रही थीं। हल्की हवा के झोंके पेड़ों को हिला रहे थे, और पास में बहता पानी लहरा रहा था। यह दृश्य बहुत ही सुंदर और शांत था।

कविता में विराम चिह्न

“माँ, कह एक कहानी!”
इस प्रचलित में आपके अनेक विश्वास चिह्न दिखाए दे रहे हैं, जो—

  • अल्प विराम (,)
  • पूर्ण विराम (।)
  • उद्धरण चिह्न (” “)

इस कविता में विराम चिह्नों का बहुत अच्छा प्रयोग किया गया है और विराम चिह्नों इस कविता में अनेक कार्य कर रहे हैं, जैसे यह बताना कि—

  • कविता पाठ करने समय कहा ठहरना है (,), कहा अधिक ठहरना है (।)
  • कौन सी प्रचलित किसने कही है पूरे या माँ ने (” “)
  • कहा प्रश्न पूछा गया है (?)
  • कौन-सी बात आश्चर्य से बोली गई है (!)

(क) नीचे कविता का एक अंश बिना विराम चिह्नों के दिया गया है। इसमें उपयुक्त स्थानों पर विराम चिह्न लगाइए—
राहुल, तू निर्णय कर इसका
न्याय पक्ष लेता है किसका
कह दे निर्भय, जय हो जिसका
सुन लूँ तेरी बानी
माँ, मेरी क्या बानी
मैं सुन रहा कहानी
कोई निरपराध को मारे
तो क्यों अन्य उसे न उबारे
रक्षक पर भक्षक को वारे
न्याय दया का दानी
न्याय दया का दानी
तूने गुनी कहानी

उत्तर: राहुल, तू निर्णय कर इसका,
न्याय पक्ष लेता है किसका?
कह दे निर्भय, जय हो जिसका,
सुन लूँ तेरी बानी।
माँ, मेरी क्या बानी?
मैं सुन रहा कहानी।
कोई निरपराध को मारे,
तो क्यों अन्य उसे न उबारे?
रक्षक पर भक्षक को वारे,
न्याय दया का दानी!
न्याय दया का दानी!
तूने गुनी कहानी।  

(ख) अब विराम चिह्नों का ध्यान रखते हुए कविता को अपने समूह में सुनाइए।
उत्तर: यह कार्य समूह में करना है। आप ऊपर दिए गए विराम चिह्नों के साथ कविता को जोर-जोर से और भावपूर्ण तरीके से पढ़ सकते हैं। प्रत्येक पंक्ति में रुकावट और भाव पर ध्यान दें।

पाठ से आगे
आपकी बात

(क) “सुन, उपवन में बड़े सबेरे, 
तात भ्रमण करते थे तेरे,” 
​आप या आपके परिजन भ्रमण के लिए कहाँ-कहाँ जाते हैं? और क्यों?
उत्तर: मैं और मेरे परिजन सुबह पार्क या नजदीकी बगीचे में भ्रमण के लिए जाते हैं। हम ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि सुबह की ताजी हवा और प्रकृति का दृश्य हमें तरोताजा करता है। यह हमारे स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा है और मन को शांति देता है।

(ख) इस पाठ में एक माँ अपने पुत्र को कहानी सुना रही है। आप किस-किस से कहानी सुनते हैं या थे? आप किसको और कौन-सी कहानी सुनाते हैं?
उत्तर: मैं अपनी माँ, दादी, और कभी-कभी शिक्षकों से कहानियाँ सुनता हूँ। पहले मैं दादी से पंचतंत्र और रामायण की कहानियाँ सुनता था। मैं अपने छोटे भाई-बहनों को “चालाक खरगोश” या “शेर और चूहे” की कहानी सुनाता हूँ, क्योंकि ये कहानियाँ मजेदार और शिक्षाप्रद होती हैं।

(ग) माँ ने कहानी सुनाने के बीच में एक प्रश्न पूछ लिया था। क्या कहानी सुनाने के बीच में प्रश्न पूछना सही है? क्यों?
उत्तर: हाँ, कहानी सुनाने के बीच में प्रश्न पूछना सही है। इससे सुनने वाला अधिक ध्यान देता है और कहानी को गहराई से समझता है। माँ ने राहुल से प्रश्न पूछकर उसकी सोच को प्रोत्साहित किया और उसे कहानी का नैतिक संदेश समझने में मदद की।

(घ) कविता में बालक अपनी माँ से बार-बार ‘वही’ कहानी सुनने की हठ करता है। क्या आपका भी कभी कोई कहानी बार-बार सुनने का मन करता है? अगर हाँ, तो वह कौन-सी कहानी है और क्यों?
उत्तर: हाँ, मेरा भी मन “पंचतंत्र” की “शेर और चूहा” कहानी बार-बार सुनने का करता है। यह कहानी मुझे इसलिए पसंद है क्योंकि यह दोस्ती और मदद के महत्व को सिखाती है। यह छोटी लेकिन बहुत मजेदार और प्रेरणादायक है।

निर्णय करें“राहुल, तू निर्णय कर इसका–”
नीचे कुछ स्थितियाँ दी गई हैं। बताइए कि इन स्थितियों में आप क्या करेंगे?

(1) खेलते समय आप देखते हैं कि एक मित्र ने भूल से एक नियम तोड़ा है।
उत्तर: मैं अपने मित्र को प्यार से समझाऊँगा कि उसने नियम तोड़ा है और उसे सही तरीके से खेलने के लिए कहूँगा। अगर वह नहीं मानता, तो मैं खेल के नियमों के बारे में सभी को याद दिलाऊँगा।

(2) एक सहपाठी को कक्षा में दूसरों द्वारा चिढ़ाया जा रहा है।
उत्तर: मैं सहपाठी का साथ दूँगा और चिढ़ाने वालों को रोकूँगा। मैं शिक्षक को भी बता सकता हूँ ताकि ऐसी घटना दोबारा न हो।

(3) एक समूह परियोजना के बीच एक सहपाठी अपने भाग का कार्य नहीं कर रहा है।
उत्तर: मैं सहपाठी से बात करूँगा और पूछूँगा कि उसे कोई समस्या तो नहीं है। मैं उसकी मदद करूँगा या समूह के साथ मिलकर कार्य को पूरा करने की योजना बनाऊँगा।

(4) आपके दो मित्रों के बीच एक छोटी-सी बात पर तर्क-वितर्क हो रहा है।
उत्तर: मैं दोनों की बात सुनूँगा और उन्हें शांत करने की कोशिश करूँगा। मैं उन्हें समझाऊँगा कि छोटी बात पर झगड़ा नहीं करना चाहिए और मिलकर सुलझाने का सुझाव दूँगा।

(5) एक सहपाठी को कुछ ऐसा करने के लिए अनुचित रूप से दंडित किया जा रहा है जिसे उसने नहीं किया।
उत्तर: मैं शिक्षक को सच बताऊँगा और सहपाठी का पक्ष लूँगा। मैं यह सुनिश्चित करूँगा कि उसे न्याय मिले।

(6) एक सहपाठी प्रतियोगिता में हार जाने पर उदास है।
उत्तर: मैं सहपाठी को ढांढस बंधाऊँगा और कहूँगा कि हार-जीत खेल का हिस्सा है। मैं उसे अगली बार बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित करूँगा।

(7) कक्षा में चर्चा के बीच एक सहपाठी संकोच कर रहा है और बोलने का अवसर नहीं पा रहा है।
उत्तर: मैं सहपाठी को प्रोत्साहित करूँगा कि वह अपनी बात रखे। मैं उसे बोलने का मौका दूँगा और उसकी राय को महत्व दूँगा।

(8) सहपाठी किसी विषय में संघर्ष कर रहा है और आपसे सहायता माँगता है।
उत्तर: मैं सहपाठी की मदद करूँगा और उसे विषय समझाऊँगा। अगर मुझे कुछ समझ न आए, तो मैं शिक्षक की मदद लूँगा।

सुनी कहानी

अपने घर या आस-पास सुनी-सुनाई जाने वाली किसी लोककथा को लिखकर कक्षा में सुनाइए।
उत्तर: लोककथा: चालाक खरगोश
एक जंगल में एक शेर रहता था, जो रोज एक जानवर को मारकर खाता था। सभी जानवर डरते थे। एक दिन खरगोश की बारी आई। खरगोश ने सोचा कि वह चालाकी से शेर को सबक सिखाएगा। वह जान-बूझकर देर से शेर के पास पहुँचा। शेर ने गुस्से में पूछा, “तू इतनी देर से क्यों आया?” खरगोश ने कहा, “रास्ते में एक और शेर मिला, जो कह रहा था कि वह सबसे ताकतवर है।” शेर गुस्से में उस शेर को देखने गया। खरगोश उसे एक कुएँ के पास ले गया और कहा, “वह कुएँ में है।” शेर ने कुएँ में अपनी परछाई देखी और सोचा कि यह दूसरा शेर है। वह गुस्से में कुएँ में कूद गया और मर गया। इस तरह खरगोश की चालाकी से जंगल के जानवरों को शेर से छुटकारा मिल गया।  
नैतिक: चालाकी और बुद्धि से बड़ी-बड़ी समस्याओं का हल निकाला जा सकता है।

आज की पहेलीनीचे कुछ पहेलियाँ दी गई हैं। इनके उत्तर आपको कविता में से मिल जाएँगे। पहेलियाँ बूझिए—

पहेली 1
नानी की बेटी है कौन?
मामा की बहना है कौन?
भायार है पिता की कौन?
भाभी है चाचा की कौन?  

उत्तर: माँ (यशोधरा)

पहेली 2
आसमान में उड़-उड़ जाए,
तरह-तरह के गाने गाए,
पर फैलाकर करता सैर,
दो हैं जिसके पर और पैर।  

उत्तर: हंस

पहेली 3
बागों में जो सुगंध फैलाती,
फूल-फूल में बसती गाती,
हवा-हवा में घुल-मिल जाए,
कौन है जो यह नाम बताए?  

उत्तर: सुरभि

खोजबीन के लिएनीचे दिए गए लिंक का प्रयोग करके आप बहुत-सी अन्य लोककथाएँ देख-सुन सकते हैं-

  • माँ, कहे एक कहानी
    https://www.youtube.com/watch?v=nQUltEEDx4s&ab_channel=NCERTOFFICIAL
  • हंसी किसका
    https://www.youtube.com/watch?v=O6Jnj49jMGc
  • मैथिलीशरण गुप्त द्वारा एक कविता का पाठ
    https://www.youtube.com/watch?v=sIWB9ZasRNY&t=126s

उत्तर: विद्यार्थी स्वयं वीडियो देखे और इसकी खोजबीन करे।

12. Understanding Markets Chapter short and Long Answer Questions

Short Answer Questions

Q1: How do price changes affect the supply and demand of goods in a market?
Ans: If the price is set too high, fewer buyers may purchase, leading to a decrease in demand. On the other hand, if the price is set too low, more buyers will purchase, but the seller may raise the price to earn more, adjusting the supply accordingly.
MarketsQ2: What are the main differences between wholesale and retail markets?
Ans: Wholesale markets involve large-scale purchases of goods from producers and are typically sold in bulk, while retail markets sell smaller quantities to individual consumers. Retailers buy from wholesalers and sell directly to customers.

Q3: How do government controls, like price ceilings and floors, affect markets?
Ans: Price ceilings prevent sellers from charging excessively high prices, ensuring goods remain affordable for consumers. Price floors prevent prices from falling too low, ensuring producers are fairly compensated, especially in essential sectors like agriculture.

Q4: What is the importance of guilds in ancient markets?
Ans: Guilds were organizations of traders or craftsmen that established rules, standards, and practices for their trade. They ensured fair transactions and supported each other, fostering a cooperative environment for businesses to grow.

Q5: How does the demand and supply model work in a market?
Ans: In the demand and supply model, the price of goods is determined by the interaction between buyers’ demand and sellers’ supply. When demand exceeds supply, prices rise, and when supply exceeds demand, prices fall to balance the market.

Q6: What role do markets play in a country’s economy?
Ans: Markets are essential for the economy as they enable the exchange of goods and services, contributing to economic growth. They facilitate the movement of resources, help create jobs, and ensure that products reach consumers efficiently.

Q7: How does the barter system work, and why was it replaced by money?
Ans: The barter system involves exchanging goods and services directly without using money. It was replaced by money to make transactions more efficient, as money is a universally accepted medium that eliminates the need for a direct exchange of goods.

Barter System

Q8: How did markets evolve with the advent of online platforms?
Ans: Online markets enable transactions to occur remotely through websites or apps, allowing buyers to access a wider range of products and services. These platforms offer convenience, greater variety, and sometimes better prices than physical markets.

Q9: What are domestic and international markets?
Ans: Domestic markets involve trade within a country’s borders, while international markets involve the exchange of goods and services between countries. International markets are critical for accessing goods not available domestically and for expanding business opportunities globally.

Q10: How do physical and online markets differ in terms of consumer experience?
Ans: In physical markets, consumers can see, touch, and try goods before buying, offering a direct experience. Online markets, however, provide convenience and a wider selection but lack the ability for consumers to physically inspect items before purchasing.

Q11: What is the role of distributors in the market?
Ans: Distributors play a vital role in connecting wholesalers to retailers, ensuring goods reach their final destinations. They help manage the logistics of large-scale distribution, especially in regions where direct access to retailers is challenging.

Q12: How does government regulation ensure fair pricing and safety in markets?
Ans: The government regulates markets by setting price limits on essential goods, ensuring the quality and safety of products, and protecting consumers. These regulations help avoid exploitation, maintain product standards, and promote consumer trust in the marketplace.
Long Answer Questions

Q1: How do markets contribute to the economy of a country?
Ans: 

  • Markets play a vital role in the economy by facilitating the exchange of goods and services. 
  • They ensure that resources are distributed efficiently across the country, promoting trade and stimulating production. 
  • Markets also help generate employment opportunities, boost income generation, and support businesses by connecting them with consumers. 
  • \Moreover, taxes collected from markets provide revenue for the government to fund public services.

Q2: Why are price negotiations important in a market?
Ans: 

  • ​Price negotiations are important because they allow buyers and sellers to agree on a fair price for goods or services, ensuring both sides benefit from the transaction. 
  • If the price is set too high, demand decreases, while a price set too low may lead to losses for sellers. 
  • Through negotiation, the price stabilizes, making the transaction mutually beneficial and maintaining a balance between supply and demand.

Q3: How do government controls on prices affect markets?
Ans: 

  • Government controls, like price ceilings and floors, are essential to prevent price manipulation and ensure fairness in markets. 
  • A price ceiling ensures that essential goods, such as medicines or food, remain affordable for consumers. 
  • On the other hand, price floors guarantee that producers, especially farmers, receive a fair price for their goods, protecting them from market fluctuations. 
  • These regulations maintain market stability and protect both consumers and producers.

Online Payment Methods

Q4: What is the role of guilds in market transactions and trade?
Ans: 

  • ​Guilds were organized groups of traders and craftsmen that regulated trade in ancient markets. 
  • They set standards for quality, ensured fair pricing, and resolved disputes within the community. 
  • Guilds provided members with resources, protection, and a network for business opportunities. By promoting cooperation rather than competition, guilds played a critical role in maintaining a stable and efficient market system.

Q5: How have physical and online markets evolved over time?
Ans: 

  • ​Physical markets have been around for centuries, where buyers and sellers meet face-to-face to exchange goods. With technological advancements, online markets have emerged, enabling consumers to shop from the comfort of their homes. 
  • Online platforms offer convenience, a wider range of products, and competitive prices. 
  • However, physical markets still hold value by providing a direct sensory experience and immediate product availability, and they are ideal for certain services like tailoring or street food.

Q6: What are the differences between wholesale and retail markets in terms of function and trade?
Ans: 

  • ​Wholesale markets deal with large quantities of goods bought in bulk from producers and sold to retailers, who then sell smaller quantities to consumers in retail markets. 
  • Retail markets cater directly to the consumer, making goods available in smaller amounts. While wholesale markets focus on supply chain efficiency, retail markets focus on providing goods to individuals and households, supporting the final step of the distribution process.

Q7: How do markets impact people’s lives on a daily basis?
Ans: 

  • Markets are essential for people’s daily needs, providing food, clothing, services, and more. 
  • They connect producers and consumers, allowing people to access goods they cannot produce themselves. 
  • Markets also foster relationships and trust, as families often rely on local grocers or tailors for regular purchases. In addition, markets provide economic opportunities and support livelihoods for millions of people involved in production, trade, and services.

Q8: How does the government balance regulation and freedom in markets?
Ans: 

  • The government regulates markets to ensure fairness, safety, and transparency in transactions. 
  • This includes setting price controls, ensuring product quality, and protecting consumers from exploitation. 
  • At the same time, the government allows businesses to operate freely to encourage innovation and competition. 
  • A balance is necessary to prevent monopolies, protect the environment, and ensure that markets remain efficient and responsive to consumer needs.

11. From Barter to Money Chapter short and Long Answer Questions

Short Answer Questions

Q1: What problems did the barter system have that led to the need for money?
Ans: The barter system had issues like double coincidence of wants, where both parties needed to have what the other wanted. It also lacked a common standard of value, and goods like cattle were not portable or divisible, making trade slow and inefficient.

Barter System

Q2: How did the introduction of money simplify trade compared to the barter system?
Ans: Money simplified trade by providing a portable, divisible, and universally accepted medium of exchange. It allowed for easier transactions, and people could store value and make future payments, overcoming the limitations of the barter system.

Q3: What is the role of money as a store of value?
Ans: Money acts as a store of value by allowing individuals to save it for future use. Unlike perishable goods like wheat, money does not lose its value quickly, making it easy to save for future purchases or investments.

Q4: How does the common denomination function of money help in trade?
Ans: The common denomination function of money helps by allowing goods of different values to be compared and priced in a standard way. This makes it easier for people to understand the worth of various items and conduct transactions efficiently.

Q5: Why did early societies use items like cowrie shells and Rai stones as money?
Ans: Early societies used items like cowrie shells and Rai stones as money because they were valuable, durable, and could be easily traded. These items were widely accepted in their respective regions as a form of exchange.

Q6: How did the advent of coins change trade in ancient India?
Ans: The advent of coins in ancient India made trade more efficient by providing a standardized, portable, and durable form of money. Coins made from metals like gold, silver, and copper were easy to carry and were accepted across regions, promoting wider trade networks.

Q7: What was the significance of the introduction of paper currency in India?
Ans: The introduction of paper currency in India provided a more convenient way to handle large sums of money, especially for higher denominations. It made trade easier and reduced the need to carry heavy coins, facilitating smoother transactions.

Q8: How did the design of modern Indian currency notes evolve?
Ans: Modern Indian currency notes feature cultural motifs, symbols, and security features like raised marks for the visually impaired. These notes are made of durable cotton paper and are designed to prevent counterfeiting and to reflect India’s heritage.

Paper Currency

Q9: How does digital money work, and how has it impacted modern transactions?
Ans: Digital money works through electronic systems like mobile payments, bank transfers, and online banking. It has made transactions faster, easier, and more accessible, reducing the need for physical money and increasing convenience for users.

Q10: What is UPI, and how does it simplify payments?
Ans: UPI (Unified Payments Interface) is a digital payment system that allows users to transfer money instantly between bank accounts using their mobile phones. It simplifies payments by linking multiple bank accounts to a single app and facilitates easy transactions.

Q11: How do QR codes facilitate digital payments in modern commerce?
Ans: QR codes facilitate digital payments by providing a quick and secure way to transfer money from one person’s bank account to another. By scanning the code with a smartphone, payments can be made instantly, making transactions more efficient.

Q12: What were the limitations of the barter system that money helped overcome?
Ans: The barter system had limitations such as the double coincidence of wants, where both parties needed to have what the other wanted, and issues with portability, divisibility, and durability. Money solved these problems by offering a universally accepted, portable, divisible, and durable means of trade.

Long Answer Questions

Q1: What were the main challenges of the barter system, and how did money address these issues?
Ans: 

  • The barter system faced challenges such as the double coincidence of wants, where both parties needed to have what the other wanted. 
  • There were also issues with measuring value, dividing goods, and portability. 
  • Money addressed these by providing a universally accepted, portable, divisible, and durable medium of exchange. 
  • It allowed for easy transactions, saving, and future payments, making trade more efficient.

Q2: How did the introduction of coins benefit ancient India’s economy and trade?
Ans: 

  • Coins helped facilitate trade by offering a standardized, easily portable, and widely accepted form of money. 
  • In ancient India, coins made from precious metals like gold, silver, and copper were used for transactions. 
  • The use of coins allowed for easier trade within the region and with foreign countries, such as during the Roman trade. The presence of coins helped stimulate economic activity and provided a stable basis for conducting business.

Digital Currency

Q3: What are the functions of money, and how do they help the economy?
Ans: 

  • Money serves as a medium of exchange, a store of value, a common denomination for measuring the value of goods, and a standard of deferred payment. 
  • These functions help simplify trade by providing a common tool for transactions, enabling people to save wealth for future use, compare prices, and make payments over time. 
  • The functions of money contribute to economic stability by making transactions smoother and more predictable.

Q4: How did the transition from barter to money impact social and cultural life?
Ans: 

  • The transition from barter to money made trade more efficient, allowing for greater social interaction and the expansion of economies.
  • With the ability to store wealth and trade more easily, people could engage in more diverse economic activities, from farming to craftsmanship. 
  • This shift also led to greater cultural exchanges, as people could now trade goods across longer distances, influencing art, philosophy, and other cultural aspects.

Q5: Why is the standard of deferred payment an important function of money?
Ans: 

  • The standard of deferred payment allows people to make transactions over time by agreeing to pay at a later date. 
  • This function is important because it enables businesses and individuals to engage in long-term contracts and investments, providing flexibility in financial planning. 
  • It allows for purchases that may be too expensive to pay upfront, such as education, real estate, or larger goods, supporting both economic growth and personal financial management.

Q6: How did paper currency evolve, and what role did it play in modern economies?
Ans: 

  • Paper currency evolved in ancient China and was introduced to India in the 18th century by banks. It was used for higher denominations, making large-scale transactions easier. 
  • Paper currency facilitated economic growth by providing a more convenient alternative to heavy coins, promoting trade and commerce. 
  • Today, it plays a crucial role in modern economies by being the main medium for most transactions, controlled by central banks to ensure stability.

Q7: How has the rise of digital money impacted traditional systems of payment?
Ans: 

  • The rise of digital money has transformed traditional payment systems by providing faster, more convenient alternatives like mobile payments, credit and debit cards, and online banking. 
  • Digital money has made transactions quicker and more accessible, especially for online shopping, reducing the need for physical currency. It has also expanded financial inclusion by allowing people in remote areas to access banking services through smartphones and the internet.

Q8: How did the development of trade routes impact the evolution of money and currency?
Ans: 

  • The development of trade routes, such as those connecting India to the Roman Empire, encouraged the need for a standardized form of money. 
  • Trade across long distances required a universal medium of exchange that could be easily carried and recognized. This led to the invention of coins, which facilitated smoother and more secure transactions. 
  • Over time, the growth of trade networks and the increasing complexity of economies led to the evolution of paper money and, later, digital currency.

10. The constitution of India- An Introduction Chapter short and Long Answer Questions

Short Answer Questions

Q1: Why was the Constitution of India adopted in 1949 but implemented in 1950?
Ans: The Constitution was adopted on 26 November 1949 but came into effect on 26 January 1950 to give time for the country to prepare for the transition from British rule. This also marked India’s Republic Day, symbolizing the country’s self-governance.

Constitution of India

Q2: What was the role of the Constituent Assembly in shaping India’s Constitution?
Ans: The Constituent Assembly was responsible for drafting the Constitution of India. It included representatives from diverse regions and communities, ensuring the Constitution reflected India’s values of democracy, equality, and justice.

Q3: What are the main components of the government structure as per the Indian Constitution?
Ans: The Indian Constitution establishes three main branches of government: the legislature (which makes laws), the executive (which implements laws), and the judiciary (which ensures laws are followed and settles disputes).

Q4: How did the Indian Freedom Movement influence the Constitution?
Ans: The Indian Freedom Movement emphasized values like equality, justice, and freedom, which were incorporated into the Constitution. Leaders of the movement brought their experiences into the Constituent Assembly to create a fair and democratic system.

Q5: How is the Constitution a “living document”?
Ans: The Constitution is a “living document” because it can be amended to meet the changing needs of the country. Amendments help adapt the Constitution to new challenges and evolving societal norms, keeping it relevant over time.

Q6: What is the significance of the Preamble to the Constitution of India?
Ans: The Preamble sets out the fundamental values and objectives of the Constitution, including justice, liberty, equality, and fraternity. It guides the government and citizens in ensuring a fair and just society.

Q7: What is the role of the President, Prime Minister, and judges in the Constitution?
Ans: The President is the ceremonial head of state, the Prime Minister leads the executive, and judges in the judiciary ensure laws are in line with the Constitution. These officials take an oath to uphold the Constitution.

Q8: How does the Indian Constitution protect individual rights?
Ans: The Constitution provides Fundamental Rights that guarantee individual freedoms like equality, freedom of speech, and protection from exploitation. These rights are enforceable in court if violated by the government or others.

Constituent Assembly

Q9: What are Directive Principles of State Policy (DPSP) and how do they guide the government?
Ans: DPSPs are guidelines for the government to create laws and policies aimed at improving the standard of living, ensuring justice, and protecting the environment. They are not legally enforceable but guide government actions.

Q10: What changes have been made to the Constitution since its adoption?
Ans: The Constitution has been amended several times to address evolving issues. Notable changes include the addition of Fundamental Duties in 1976, the recognition of the Panchayati Raj System in 1992, and rights like the freedom to fly the national flag.

Q11: How does the Indian Constitution ensure a separation of powers?
Ans: The Constitution ensures the separation of powers by clearly defining the roles and responsibilities of the legislature, executive, and judiciary. This system prevents any one branch from becoming too powerful and ensures fairness in governance.

Q12: How does the Constitution promote equality in India?
Ans: The Constitution promotes equality by ensuring that all citizens are treated equally before the law, regardless of religion, caste, gender, or race. It guarantees equal opportunities and prohibits discrimination, upholding the values of justice and fairness.

Long Answer Questions

Q1: What was the role of Dr. B.R. Ambedkar in the drafting of the Indian Constitution?
Ans: 

  • Dr. B.R. Ambedkar played a pivotal role as the Chairman of the Drafting Committee of the Indian Constitution.
  • He ensured that the Constitution upheld the values of equality, justice, and social rights, particularly for marginalized groups.
  • His leadership and vision shaped key sections of the Constitution, particularly those related to fundamental rights, social justice, and the protection of individual liberties.

Dr. B.R. Ambedkar

Q2: How did the freedom struggle influence the inclusion of Fundamental Rights in the Constitution?
Ans: 

  • The freedom struggle was focused on the protection of citizens’ rights against colonial oppression.
  • Leaders from the movement, including Mahatma Gandhi, Jawaharlal Nehru, and others, ensured that the Constitution included Fundamental Rights to protect individual freedoms.
  • These rights guarantee equality, freedom of speech, and protection from exploitation, ensuring the spirit of democracy and justice.

Q3: Why was it necessary to include the concept of “Separation of Powers” in the Constitution?
Ans: 

  • The separation of powers ensures that no one branch of government becomes too powerful.
  • By dividing authority among the legislature, executive, and judiciary, the Constitution maintains a system of checks and balances.
  • This system allows each branch to act independently, preventing misuse of power and safeguarding democratic principles.

Q4: Explain the significance of the Preamble and how it reflects the values of the Constitution.
Ans: 

  • The Preamble serves as the introduction to the Constitution, outlining its core values and objectives.
  • It reflects the ideals of justice, liberty, equality, and fraternity.
  • The Preamble emphasizes India’s commitment to a sovereign, secular, democratic republic, guiding the government in ensuring fairness and respect for all citizens, regardless of their background.

Q5: What role did the Constituent Assembly play in shaping the Indian Constitution?
Ans: 

  • The Constituent Assembly was tasked with framing the Constitution of India after independence.
  • It consisted of elected representatives who debated key issues such as governance, fundamental rights, and the structure of the government.
  • The assembly’s decisions shaped India’s democratic framework and ensured the inclusion of values like equality, justice, and social welfare.

Q6: How does the Indian Constitution ensure the protection of minority rights?
Ans: 

  • The Indian Constitution guarantees the protection of minority rights through provisions like the Right to Equality and the Right to Freedom of Religion.
  • It ensures that no individual or community is discriminated against based on religion, caste, or language.
  • Additionally, the Constitution encourages the protection of minority languages and cultures, promoting an inclusive society.

Q7: What is the significance of the Directive Principles of State Policy (DPSP) in the Indian Constitution?
Ans: 

  • The DPSP provides guidelines to the government for achieving social and economic justice.
  • While they are not legally enforceable, they guide government policies on issues like healthcareeducation, and the environment.
  • The DPSPs reflect the Constitution’s commitment to improving the quality of life for all citizens, particularly the disadvantaged.

Q8: How does the Constitution accommodate India’s diversity in terms of religion, language, and culture?
Ans: 

  • The Indian Constitution accommodates India’s diversity by recognizing multiple languages, religions, and cultures.
  • It guarantees the freedom to practice any religion and promotes the idea of “unity in diversity.”
  • The Constitution allows for the protection of cultural heritage and the promotion of multiple languages through the recognition of various regional languages in the Eighth Schedule.

09. From the Rulers to Ruled: Types Of Governments Chapter short and Long Answer Questions

Short Answer Questions

Q1: How do governments ensure the safety and welfare of people?
Ans: Governments ensure safety by maintaining law and order, protecting the country from external threats, and providing essential services like healthcare, education, and infrastructure. They also create policies for economic stability and social welfare.

Q2: What is the difference between a monarchy and a democracy in terms of power?
Ans: In a monarchy, power is typically inherited by a king or queen, while in a democracy, power is derived from the people through elections, and leaders are chosen by the citizens.

Q3: Why is democracy considered important for people?
Ans: Democracy is important because it gives people the power to choose their leaders, ensuring that their voices are heard and their rights are protected. It promotes equality, freedom, and accountability in governance.

Q4: How does the process of electing representatives work in a democracy?
Ans: In a democracy, citizens vote in regular elections to choose representatives who will make decisions on their behalf. These elections are held at different levels, such as local, state, and national.

Q5: What is a theocracy, and how does it differ from a democracy?
Ans: A theocracy is a form of government where religious leaders rule based on religious laws. Unlike democracy, where people elect their leaders, in a theocracy, power is vested in religious authorities.

Q6: How is the separation of powers important in a democracy?
Ans: The separation of powers ensures that no single branch of government (legislative, executive, judiciary) has unchecked authority. It maintains a system of checks and balances, ensuring fairness and preventing abuse of power.

Q7: What is the role of a legislature in a democracy?
Ans: The legislature’s role is to make laws that govern the country. In democracies, the legislature is often elected by the people and is responsible for representing their interests and ensuring justice through laws.

Q8: What is the role of an executive in a democracy?
Ans: The executive implements the laws made by the legislature and manages the country’s day-to-day affairs. It includes leaders like the president, prime minister, and ministers, who are responsible for governance.

Q9: How does a judicial system contribute to a democracy?
Ans: The judicial system ensures that laws are followed and resolves disputes between citizens or between the government and the people. It protects citizens’ rights and ensures justice, upholding the rule of law.

Q10: What challenges does democracy face in the modern world?
Ans: Democracy faces challenges such as corruption, unequal access to resources, and the concentration of power in the hands of a few people or groups. Additionally, misinformation and the influence of money in politics can undermine democratic processes.

Q11: What is the significance of universal adult franchise in a democracy?
Ans: Universal adult franchise allows all adult citizens, regardless of gender, caste, or wealth, the right to vote. This ensures that every citizen has an equal say in choosing their leaders and shaping the government.

Q12: How do monarchies today differ from those in ancient times?
Ans: Today’s monarchies are mostly constitutional, where the king or queen has limited power, and the government is run by elected officials. In ancient times, monarchies were absolute, with kings having full control over the state and its people.

Monarchy

Long Answer Questions

Q1: How does democracy give people a voice in governance?
Ans: 

  • In a democracy, the people are the source of power. They have the right to vote in elections, choosing representatives who will make decisions on their behalf. 
  • This gives citizens a direct role in shaping the laws and policies of their country. 
  • Additionally, democratic governments are accountable to the people, meaning that they must listen to their concerns and act in their best interests.

Q2: Explain how the separation of powers works in a democracy.
Ans: 

  • The separation of powers divides the government into three branches: the legislature, the executive, and the judiciary. Each branch has its distinct functions and is independent of the others. 
  • The legislature makes laws, the executive implements them, and the judiciary ensures that laws are followed and resolves disputes.
  • This system prevents any one branch from becoming too powerful and ensures that decisions are fair and just.

Q3: How is the concept of accountability significant in a democracy?
Ans: 

  • ​Accountability means that government officials must answer to the people for their actions. 
  • In a democracy, elected representatives are held accountable through regular elections, where citizens can choose to re-elect or replace them. 
  • This ensures that leaders work in the best interests of the people and are not above the law. It also promotes transparency and reduces the chances of corruption.

Q4: What is the role of a constitution in a democratic government?
Ans: 

  • constitution outlines the basic laws and principles that govern a country. It sets up the structure of government, defines the roles of the branches, and protects the rights of citizens. 
  • In a democracy, the constitution ensures that the government operates fairly and transparently. 
  • It also serves as a guiding document for resolving conflicts and ensuring that the rights and freedoms of individuals are safeguarded.

Constitution of India

Q5: How do different forms of government affect people’s rights and freedoms?
Ans: 

  • In democracies, people enjoy greater rights and freedoms, such as the freedom of speech, equality before the law, and the right to vote.
  • However, in other forms of government like dictatorship or monarchy, these rights may be restricted. 
  • Dictatorships often suppress opposition and control media, while monarchies might limit people’s participation in decision-making. 
  • The form of government significantly influences how individuals can express their opinions and live their lives.

Q6: What is the significance of universal adult franchise in the democratic system?
Ans: 

  • Universal adult franchise means that every adult citizen has the right to vote, regardless of gender, caste, or social status. 
  • This is important in a democracy because it ensures equal representation for all segments of society. 
  • It helps to ensure that the government reflects the will of the entire population, not just a select few, and prevents discrimination based on social or economic background.

Q7: Explain the difference between direct and representative democracy.
Ans: 

  • In direct democracy, all citizens directly participate in making decisions and laws, which is possible in small communities. 
  • However, in representative democracy, citizens elect representatives who then make decisions on their behalf. 
  • Most modern democracies, like India and the USA, follow representative democracy, where elections are held periodically to choose lawmakers and leaders.

Q8: How does a dictatorship differ from a democracy in terms of decision-making?
Ans: 

  • In a dictatorship, decision-making is centralized in the hands of one individual or a small group, with little to no input from the general public. Leaders in dictatorships have unchecked power and are not held accountable to the people. 
  • In contrast, democracies allow citizens to participate in decision-making through elections and other democratic processes. 
  • In a democracy, leaders are accountable to the people and must act in their interests.

08. How The Land Becomes sacred Chapter short and Long Answer Questions

Short Answer Questions

Q1: How does the concept of sacred geography connect people across India?
Ans: Sacred geography connects people by linking pilgrimage sites and sacred spaces, fostering cultural exchanges and shared spiritual values. Pilgrims traveling to these sites from different regions encounter diverse traditions but share common religious goals.

Q2: What role do rivers play in sacred geography?
Ans: Rivers are considered divine in sacred geography, with many being worshipped as goddesses. Rituals are performed at riverbanks, and places like the Ganga and Yamuna are seen as lifelines for both spiritual and physical sustenance.

Sangam of Rivers

Q3: Why is the Char Dhām Yātrā significant?
Ans: The Char Dhām Yātrā, consisting of four pilgrimage sites in different parts of India, is significant as it connects the northern, southern, eastern, and western regions, promoting unity and spiritual growth across diverse cultures.

Q4: How does sacred ecology contribute to environmental preservation?
Ans: Sacred ecology links spiritual beliefs with nature conservation by encouraging the protection of rivers, mountains, and forests. By viewing nature as sacred, communities feel responsible for preserving these spaces from harm or exploitation.

Q5: What is the story behind the Shakti Pithas?
Ans: The Shakti Pithas are sacred sites where the body parts of Sati, the divine mother, are believed to have fallen after Vishnu cut her body. These sites are revered as places of worship for the goddess Shakti.

Q6: How does the Kumbh Mela reflect the significance of sacred geography?
Ans: The Kumbh Mela, held at four sacred river sites, reflects sacred geography by bringing millions together to bathe in the holy rivers. It’s an event that connects various regions of India through shared religious practices and beliefs.

Kumbh Mela

Q7: What is the significance of sacred groves in India?
Ans: Sacred groves are protected forests, often associated with deities, and serve as a way to conserve biodiversity. They play an important role in maintaining the ecological balance by preserving unique plant and animal species.

Q8: How do trees, like the peepul, feature in sacred geography?
Ans: In sacred geography, trees like the peepul are considered sacred, with religious and spiritual significance. The peepul tree, especially at Bodh Gaya, is associated with Buddha’s enlightenment and is revered in Hinduism, Buddhism, Sikhism, and Jainism.

Q9: How did pilgrimage routes overlap with trade routes in ancient India?
Ans: Pilgrimage routes often overlapped with trade routes, facilitating not just religious journeys but also the exchange of goods, ideas, and culture, enriching both spiritual and economic life.

Q10: Why is the Ganga river considered sacred in Hinduism?
Ans: The Ganga river is considered sacred in Hinduism because it is believed to be a goddess who purifies souls. Pilgrims bathe in the river to cleanse their sins and seek spiritual liberation.

Q11: How do sacred mountains relate to religious beliefs?
Ans: Sacred mountains, like the Himalayas, are believed to be gateways to heaven. Many pilgrimage sites are located at mountain peaks, symbolizing the physical and spiritual journey to divine realms.

Q12: What impact has pollution had on sacred sites in India?
Ans: Pollution has harmed sacred sites, like rivers and temples, leading to a strained relationship between people and nature. The pollution of holy rivers like the Yamuna and Ganga disrupts spiritual practices and threatens the sanctity of these sites.

Char Dham

Long Answer Questions

Q1: How do pilgrimage routes and sacred geography contribute to cultural unity in India?
Ans: 

  • Pilgrimage routes and sacred geography contribute to cultural unity by connecting different regions through shared religious journeys.
  • As people travel to sacred sites like the Char Dhām or Kumbh Mela, they encounter diverse customs and traditions, but also uphold shared values of reverence for nature and spirituality. 
  • This exchange of culture strengthens India’s unity by bridging regional differences and fostering a common religious identity.

Q2: What is the concept of sacred ecology, and how does it relate to environmental conservation?
Ans: 

  • ​Sacred ecology refers to the belief that natural elements like rivers, mountains, and forests are sacred and should be protected due to their spiritual significance. 
  • This belief encourages communities to preserve and protect the environment, as they view these natural elements as divinely sacred.
  • Sacred ecology blends spirituality and environmental conservation, ensuring that these natural resources are treated with reverence and care for future generations.

Q3: How do sacred sites like the Ganga River and the Himalayas connect nature with spirituality in India?
Ans: 

  • Sacred sites like the Ganga River and the Himalayas are seen as divine entities in Hinduism, with the Ganga considered a goddess and the Himalayas a gateway to heaven. 
  • Pilgrims travel to these places not only for spiritual purification but also to connect with the natural world. 
  • The belief that nature itself is sacred fosters a deep connection between religious practices and the preservation of these natural landscapes.

Q4: Describe the importance of the Kumbh Mela in shaping India’s religious and cultural landscape.
Ans: 

  • The Kumbh Mela is one of the largest religious gatherings in the world, where millions of pilgrims gather at sacred river confluences to bathe and cleanse themselves spiritually. 
  • This pilgrimage is deeply rooted in India’s religious and cultural identity, as it reflects the importance of sacred geography, rituals, and unity. 
  • The Kumbh Mela not only highlights the sacredness of the rivers but also strengthens communal bonds across different regions of India through shared religious practices.

Q5: How does the concept of sacred groves contribute to biodiversity conservation?
Ans: 

  • ​Sacred groves are protected forests that are revered as homes of deities in various Indian cultures. 
  • These groves are a vital part of biodiversity conservation, as they preserve unique species of plants, animals, and ecosystems. 
  • Since these groves are protected by local communities, they offer a sanctuary for endangered species and play a crucial role in maintaining ecological balance, while also fostering a sense of reverence for nature.

Q6: What is the significance of the Shakti Pithas and Jyotirlingas in Hinduism?
Ans: 

  • The Shakti Pithas and Jyotirlingas are sacred sites dedicated to the goddess Shakti and Lord Shiva, respectively. 
  • The Shakti Pithas are believed to be locations where the body parts of Sati, the divine consort of Shiva, fell, while the Jyotirlingas represent sacred shrines of Shiva. 
  • Both these sites are central to Hindu spirituality, with pilgrims visiting them to seek blessings, spiritual purification, and divine protection.

Jyotirlingas

Q7: How does the sacredness of rivers like the Yamuna and Kaveri influence local communities?
Ans: 

  • Rivers like the Yamuna and Kaveri are considered sacred in India, and their sanctity influences local communities in many ways. 
  • People often perform rituals, prayers, and festivals along the banks of these rivers, believing that the water holds purifying power.
  • Communities that depend on these rivers for their livelihoods, like fishing or farming, also maintain strong cultural practices that protect and preserve the river, reinforcing the sacred bond between the people and the land.

Q8: Explain the impact of sacred geography on India’s cultural diversity and unity.
Ans: 

  • Sacred geography in India plays a significant role in promoting cultural diversity and unity by providing shared spaces for religious practices. 
  • Sites like the Char Dhām, Kumbh Mela, and various pilgrimage routes bring together people from different regions, languages, and traditions. 
  • Although these pilgrims come from diverse backgrounds, they are united by their respect for sacred places and their common belief in the divine power of nature and geography, creating a sense of national unity through shared religious values.