12. वायुमनः प्राणस्वरूपम् – Summary
प्रस्तुत पाठ पर्यावरण की समस्या को ध्यान में रखकर लिखा गया एक लघु निबंध है। आज मनुष्य का वातावरण बुरी […]
प्रस्तुत पाठ पर्यावरण की समस्या को ध्यान में रखकर लिखा गया एक लघु निबंध है। आज मनुष्य का वातावरण बुरी […]
प्रस्तुत पाठ पर्यावरण की समस्या को ध्यान में रखकर लिखा गया एक लघु निबंध है। आज मनुष्य का वातावरण बुरी
प्रस्तुत पाठ महाकाव्य ‘रामायणम्’ के अरण्यकांड से लिया गया है। इस महाकाव्य के रचयिता आदिकवि वाल्मीकि हैं। इस पाठ में
यह पाठ ‘कथासरित्सागर’ के सप्तम लम्बक से लिया गया है। मूलतः यह सोमदेव की रचना है। इसमें तपोदत्त नामक एक
प्रस्तुत पाठ ‘पञ्चतन्त्रम्’ नामक ग्रंथ के ‘मित्र भेद’ नामक तंत्र से लिया गया है। इसके रचयिता विष्णुशर्मा हैं। इस कथा
कहानी का परिचय ‘भ्रान्तो बालः’ पाठ “संस्कृत-प्रौढ़पाठावली” नामक ग्रंथ से लिया गया है। यह एक शिक्षाप्रद कहानी है जिसमें एक ऐसे बालक का
नीति-ग्रंथों की दृष्टि से संस्कृत साहित्य काफी समृद्ध है। इन ग्रंथों में सरल और सारगर्भित भाषा में नैतिक शिक्षाएँ दी
‘वेतालपञ्चविंशतिः’ मनोहर एवं आश्चर्यजनक घटनाओं से युक्त कथाओं का अनोखा संग्रह है। प्रस्तुत पाठ इसी संग्रह से लिया गया है।
यह नाटयांश कृष्णचंद्र त्रिपाठी महोदय द्वारा रचित ‘चतुर्म्यहम्’ पुस्तक से सम्पादित करके लिया गया है। इस नाटक में ऐसे व्यक्ति
कहानी का परिचय ‘स्वर्णकाकः – सोने का कौआ’ श्री पद्मशास्त्री द्वारा रचित “विश्वकथाशतकम्” नामक संग्रह से ली गई एक प्रसिद्ध लोककथा